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UAE की Iran को कड़ी चेतावनी, ADNOC टैंकर पर Missile Attack को बताया UN Resolution का उल्लंघन

संयुक्त अरब अमीरात ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रते समय ADNOC टैंकर पर ईरान की आक्रामकता की कड़ी निंदा की है। AE के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, यह हमला UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन था; यह प्रस्ताव समुद्री आवाजाही की आज़ादी का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाने का विरोध करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने या आर्थिक ब्लैकमेल के लिए करना, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा समुद्री डकैती (piracy) जैसा काम है। इससे इलाके और वहां के लोगों की स्थिरता के साथ-साथ ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए भी सीधा खतरा पैदा होता है।

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सरकारी समाचार एजेंसी WAM की रिपोर्ट के अनुसार, यह राजनयिक निंदा शनिवार तड़के हुई एक घटना के बाद आई है, जिसमें अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के एक जहाज को एक अहम शिपिंग रूट से गुजरते समय मिसाइल से निशाना बनाया गया था। हमले की पुष्टि करते हुए ADNOC ने कहा कि स्थिति को जल्द ही काबू में कर लिया गया और क्रू मेंबर्स में से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अबू धाबी की सरकारी कंपनी दुनिया के प्रमुख एनर्जी उत्पादकों में से एक है, जो ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद सप्लाई करती है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में जहाज की पहचान, उसमें लदे सामान या हुए नुकसान के बारे में खास जानकारी नहीं दी गई थी, लेकिन UAE ने साफ तौर पर इस हमले के लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहराया। उसने "होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे ADNOC के टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाने वाले ईरान के इस दुश्मन जैसे हमले" की निंदा की, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
तेहरान ने अभी तक इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही इसकी ज़िम्मेदारी ली है। हालाँकि, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर जहाज़ दुश्मन देशों से जुड़े हों या ईरान के नेविगेशन नियमों का पालन न करें, तो वे इस अहम समुद्री रास्ते पर जहाज़ों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई कर सकते हैं।

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यह तनाव होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिरता की व्यापक चिंताओं के बीच बढ़ा है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग दुनिया का मुख्य समुद्री ऊर्जा कॉरिडोर है, जहाँ से रोज़ाना दुनिया भर में होने वाली तेल की खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुज़रता है। ईरान के साथ अमेरिका और इज़राइल के टकराव के व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने के बाद से इस अहम समुद्री रास्ते से होने वाले व्यापार में बार-बार रुकावटें आई हैं, जिससे समुद्री माल ढुलाई का किराया बढ़ गया है और सुरक्षा का ख़तरा भी बढ़ गया है।

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हिंदुओं को धोखा देने वाले इस देश को ले डूबे मुस्लिम, हिल गया यूरोप !

ब्रिटेन पर एक बहुत बड़ा संकट आ गया है। ब्रिटेन को मुस्लिम तृष्टीकरण का ऐसा श्राप लगा है जिसने पूरे यूरोप को हिला दिया है। हैरानी की बात देखिए कि ब्रिटेन ने मुस्लिमों के प्रति उदारता दिखाते हुए हिंदुओं की आस्था पर एक बहुत बड़ा हमला किया था। लेकिन ब्रिटेन को कर्मों का फल मिल गया है। ब्रिटेन पर उसी के लोग टूट पड़े हैं। हमने हाल ही में ब्रिटेन ने 40 साल पुरानी मंदिर की एक जमीन मुस्लिमों को बेच दी। लेकिन इसके बाद ब्रिटेन पर तगड़ी बिजली गिरी है। मंदिर की जमीन मस्जिद को देने वाले ब्रिटेन के एक गांव ने ब्रिटेन से ही आजादी के लिए जनमत संग्रह करने का फैसला कर लिया है। इस गांव के लोगों का कहना है कि मुस्लिम शरणार्थियों की वजह से हम ब्रिटेन से अलग होना चाहते हैं। हमें इस्लामिक बनते जा रहे ब्रिटेन के साथ नहीं रहना। 

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इसे कर्मों का फल ही कहिए कि जिस ब्रिटेन ने भारत के टुकड़े करके एक हिस्सा मुसलमानों को देकर पाकिस्तान बनवा दिया। उसी पाकिस्तान की वजह से ब्रिटेन का एक हिस्सा पीओके की तरह बगावत करने पर उतर आया है। दरअसल लंदन से 120 कि.मी. दूर पीटर बरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की जमीन यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन नाम की एक मुस्लिम संस्था को बेचने का फैसला कर लिया गया। न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स नाम के एक परिसर में पिछले चार दशकों से भारत हिंदू समाज का मंदिर और कम्युनिटी सेंटर सफलतापूर्वक चल रहा था। इस पूरी जमीन और परिसर का मालिकाना हक पीटरबरो शहर की स्थानीय सरकार यानी पीटरबरो सिटी काउंसिल के पास था। आपको बता दें कि पीटर बरो काउंसिल इस समय भारी बजट घाटे से जूझ रहा है। इस घाटे को पूरा करने के लिए काउंसिल ने उस परिसर को नीलाम करने का फैसला कर लिया जिस पर 40 साल से मंदिर चल रहा था। ब्रिटेन के हिंदू भी जमीन की नीलामी में हिस्सा लेने आए थे। लेकिन पीटर बरो काउंसिल ने नीलामी के दौरान बोलियों की जांच और स्कोरिंग के मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही और गलतियां की और यह जमीन जानबूझकर मुस्लिम पक्ष को दे दी।

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ब्रिटेन को तुरंत मुस्लिम तुष्टीरण का करंट भी लग गया। दरअसल लंदन के गांव ऑक्सफोर्ड शहर के लोगों ने फैसला किया है कि वह ब्रिटेन से अलग होने के लिए जनमत संग्रह करेंगे। इन लोगों का कहना है कि ब्रिटेन की सरकार ने हमारे इलाके के पास शरणार्थियों की एक बस्ती बसाने का ऐलान किया है। इस बस्ती में 3750 शरणार्थियों को बसाने की प्लानिंग हो रही है। ऑक्सफोर्ड शायर के लोगों ने कहा है कि ब्रिटेन की सरकार ने हमसे पूछा तक नहीं। हमारे गांव के बाहर शरणार्थियों को लाकर बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमारे अधिकारों का क्या होगा? अगर इन शरणार्थियों ने दंगे किए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? डेमोग्राफी बदली तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

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  Sports

RIP Jorge Messi: लियोनेल मेस्सी पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता जॉर्ज मेस्सी का 68 साल की उम्र में निधन

Lionel Messi Father Passes Away: अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के पिता और लंबे समय तक उनके प्रतिनिधि रहे जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो स्थित एक मेडिकल क्लिनिक में शुक्रवार रात अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।

जॉर्ज मेसी लियोनेल मेसी के फुटबॉल करियर में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले लोगों में शामिल थे। उन्होंने बचपन से ही अपने बेटे के फुटबॉल सफर को करीब से देखा और उनके करियर के शुरुआती दौर में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। 

जब मेसी कम उम्र में अर्जेंटीना से स्पेन गए और बार्सिलोना के साथ अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की, तब भी उनके पिता उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। बाद में जॉर्ज मेसी ने उनके प्रतिनिधि के तौर पर करियर और बिजनेस से जुड़े मामलों को संभाला।

Lionel Messi के पिता और लंबे समय तक उनके प्रतिनिधि रहे Jorge Messi का 68 साल की उम्र में निधन।
जॉर्ज मेसी

लंबे समय से चल रहा था इलाज
जॉर्ज मेसी की तबीयत को लेकर पिछले कुछ समय से खबरें सामने आ रही थीं। जून में उनके निधन की झूठी खबर भी सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में सामने आई थी। इसके बाद परिवार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि वह बीमार हैं और उनका इलाज चल रहा है।

वर्ल्ड कप में भावुक हुए थे मेसी
जॉर्ज मेसी की खराब सेहत के बीच लियोनेल मेसी इस साल के फीफा वर्ल्ड कप में भी भावुक नजर आए थे। अर्जेंटीना के एक मुकाबले में गोल करने के बाद उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए थे। मेसी ने बाद में बताया था कि उनकी भावुकता फुटबॉल से इतर कुछ निजी मुश्किलों से जुड़ी थी।

जॉर्ज मेसी का निधन लियोनेल मेसी के लिए एक बेहद निजी और भावनात्मक क्षति है। पिता के तौर पर उन्होंने मेसी के शुरुआती फुटबॉल सफर में साथ दिया और आगे चलकर उनके प्रोफेशनल करियर के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Sat, 08 Aug 2026 20:13:29 +0530

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