Lucknow News: लखनऊ नगर निगम को CM योगी की बड़ी सौगात, कूड़ा प्रबंधन में नई रफ्तार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ नगर निगम को 250 ग्रीन वाहनों की बड़ी सौगात दी. इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए उन्होंने साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और साथ ही विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला.
डोर-टू-डोर कलेक्शन से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सफाई को लेकर कोई ठोस सोच नहीं थी. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पहले डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की कल्पना भी की जा सकती थी? उनके अनुसार, मौजूदा सरकार ने न केवल इस व्यवस्था को लागू किया, बल्कि इसे प्रभावी भी बनाया.
ग्रीन वाहनों की शुरुआत से अब कचरा संग्रहण अधिक व्यवस्थित, पर्यावरण के अनुकूल और तेज होगा. इससे शहरी स्वच्छता को नई दिशा मिलेगी.
बीमारू राज्य से ग्रोथ इंजन तक का सफर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान उत्तर प्रदेश 'बीमारू राज्य' की श्रेणी में आ गया था. गंदगी और अव्यवस्था के कारण इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती थीं.
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने इन चुनौतियों पर काबू पाया है और राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है. आज उत्तर प्रदेश देश की टॉप अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है और “ग्रोथ इंजन” के रूप में उभर रहा है.
सफाई से स्वास्थ्य तक सीधा संबंध
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कूड़ा प्रबंधन सिर्फ सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा है. बेहतर कचरा प्रबंधन से बीमारियों में कमी आती है और लोगों का जीवन स्तर सुधरता है. ग्रीन वाहनों के जरिए अब कचरे का वैज्ञानिक और नियमित निस्तारण संभव होगा, जिससे शहरों में स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों बेहतर होंगे.
राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट
इस मौके पर मुख्यमंत्री का संदेश साफ था विकास और सुशासन ही सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारें समस्याओं को नजरअंदाज करती थीं, जबकि वर्तमान सरकार समाधान पर काम कर रही है.
कुल मिलाकर, यह पहल न केवल लखनऊ की सफाई व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य सरकार के विकास मॉडल को भी दर्शाती है.
114% महंगा होने वाला था घरेलू फ्लाइट्स का किराया, जानें सरकार के हस्तक्षेप से कैसे टला बड़ा खतरा?
एक अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत हो रही है. नए वित्त वर्ष की शुरुआत होते ही हवाई यात्रियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में एक लाख प्रति किलोमीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी के अपने फैसले पर बड़ा यूटर्न ले लिया है. सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप किया, जिस वजह से घरेलू उड़ानों के लिए किराये में भारी बढ़ोतरी का खतरा टल गया है. हालांकि, इंटरनेशनल रूट पर सफर करना बहुत महंगा साबित होगा.
चंद घंटों में बदला फैसला
इंडियन ऑयल ने एटीएफ की कीमतों में बुधवार सुबह ऐतिहासिक वृद्धि का ऐलान किया था. दिल्ली में एटीएफ की कीमते 96,638.14 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 2,07,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई थीं. इस फैसले से एक महीने में 114.55% की भारी बढ़ोतरी होने वाली थी, जिस वजह से आम यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया था.
अब कीमतों में 8.5 प्रतिशत का इजाफा
हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय ने समय रहते हस्तक्षेप किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में तेल कंपनियों ने अपने बढ़ोतरी वाले इस फैसले को वापस ले लिया. नई दरों के अनुसार, दिल्ली में एटीएफ की कीमतों में सिर्फ 1,04,927 रुपये प्रति लीटर होगी, यानी कीमतों में महज 8.5% का इजाफा हुआ है.
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