Arjun Tendulkar: 'कोई बेंच पर नहीं बैठना चाहता...' आईपीएल में कम मौके मिलने पर फूटा अर्जुन तेंदुलकर का दर्द
Arjun Tendulkar: आईपीएल 2026 से पहले युवा ऑलराउंडर अर्जुन तेंदुलकर ने अपनी पुरानी टीम मुंबई इंडियंस में कम मौके मिलने को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी खिलाड़ी बेंच पर बैठना नहीं चाहता, लेकिन जब मौका मिले तो बेहतर प्रदर्शन करना ही सबसे जरूरी है।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन अब इस सीजन में नई टीम लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते नजर आएंगे। उन्हें पिछले साल नवंबर में 30 लाख रुपये में लखनऊ टीम ने ट्रेड के जरिए अपने साथ जोड़ा था।
अर्जुन को मुंबई इंडियंस ने 2021 के आईपीएल ऑक्शन में 20 लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीदा था। हालांकि चोट के कारण वह उस सीजन में नहीं खेल पाए थे। इसके बाद 2022 में भी उन्हें मौका नहीं मिला और उन्हें अपने डेब्यू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था।
आखिरकार उन्होंने 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ आईपीएल डेब्यू किया। उस सीजन में उन्होंने कुल चार मैच खेले और 3 विकेट लिए। नई गेंद से स्विंग कराने की उनकी क्षमता ने सबका ध्यान खींचा।
2024 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें रिटेन तो किया, लेकिन उन्हें सिर्फ एक ही मैच खेलने का मौका मिला। उस मैच में उन्होंने दो ओवर में 22 रन दिए और कोई विकेट नहीं ले सके। लगातार कम मौके मिलने के कारण उनके प्रदर्शन पर भी असर पड़ा।
एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे मुंबई इंडियंस में सीमित अवसरों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने ईमानदारी से जवाब दिया। अर्जुन ने कहा, 'कौन ऐसा होगा जिसे बेंच पर बैठना अच्छा लगे? लेकिन हमें मेहनत करनी है और जब मौका मिले, तो खुद को साबित करना है।'
अब अर्जुन की नजरें नई टीम के साथ बेहतर प्रदर्शन पर हैं। लखनऊ का पहला मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां उन्हें खुद को साबित करने का मौका मिल सकता है।
अर्जुन ने इस दौरान आईपीएल के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह इस नियम के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि टीम को 11 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय टी20 और अन्य लीग्स में यह नियम लागू नहीं होता।
कुल मिलाकर, अर्जुन तेंदुलकर इस बार नए जोश और उम्मीद के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ सुपर जायंट्स उन्हें कितने मौके देती है और वह उन मौकों का कितना फायदा उठा पाते हैं।
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