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ईंधन की बढ़ती कीमतों पर न्यूजीलैंड सरकार ने जरूरतमंदों को दी राहत, 1.43 लाख परिवारों को हर हफ्ते 50 डॉलर की अतिरिक्त मदद

वेलिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अपनी सरकार द्वारा दी जा रही लक्षित महंगाई राहत का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नियंत्रित नहीं कर सकता, लेकिन जिन लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, उनकी मदद करना जरूरी है।

पीएम लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से न्यूजीलैंड में पेट्रोल पंप पर कीमतें सीधे तौर पर बढ़ रही हैं। इससे पूरे देश में घरों और बिजनेस पर असर पड़ रहा है, लेकिन सरकार सभी के लिए दबाव कम करने का जोखिम नहीं उठा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार को कोविड की गलतियों को दोहराने से बचना चाहिए, जहां ज्यादा खर्च से महंगाई और ज्यादा कर्ज हुआ था।

लक्सन ने कहा कि जिन लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत है, उन्हें समय पर सीमित अवधि के लिए और लक्षित सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सभी के लिए एक जैसे उपाय अपनाने से महंगाई बढ़ने का खतरा हो सकता है।

लक्सन सरकार ने इन-वर्क टैक्स क्रेडिट को कुछ समय के लिए बढ़ाने का ऐलान किया है। इससे अप्रैल की शुरुआत से लगभग 143,000 कम और मिडिल-इनकम वाले काम करने वाले परिवारों को हर हफ्ते एक्स्ट्रा 50 डॉलर मिलेंगे, ताकि वे बढ़ते फ्यूल के खर्चों में मदद कर सकें।

यह मदद एक साल तक या पेट्रोल की कीमतें कम होने तक चलेगी और इससे लगभग 14,000 और परिवारों को कम रेट पर उपलब्धता मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि इन-वर्क टैक्स क्रेडिट में बढ़ोतरी का मकसद महंगाई या कर्ज बढ़ाए बिना ज्यादा खर्चों के असर को कम करना है।

इस बड़े पैकेज के तहत, न्यूजीलैंड के दस लाख से ज्यादा लोगों को मौजूदा सरकारी मदद पेमेंट में बढ़ोतरी मिलेगी। लगभग 10 लाख पेंशनभोगी को बढ़ा हुआ न्यूजीलैंड पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। इसमें शादीशुदा जोड़े का हर दो हफ्ते का पेमेंट 50 डॉलर से ज्यादा बढ़ जाएगा।

करीब 2.8 लाख परिवारों को बढ़े हुए फैमिली टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा, जिससे उन्हें सालाना 1,050 डॉलर तक अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। वहीं, छात्रों और लाभार्थियों को हर दो हफ्ते में लगभग 20 डॉलर ज्यादा दिए जाएंगे।

सरकार ने ‘वर्किंग फॉर फैमिलीज’ योजना में बदलाव कर लगभग 1.4 लाख और परिवारों को समर्थन देने का कदम उठाया है। इसके साथ ही, लोगों को पहला घर खरीदने या रिटायरमेंट के लिए तेजी से बचत करने में मदद देने के लिए कीवीसेवर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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दलाई लामा की अपील, 'मिडिल ईस्ट, रूस और यूक्रेन में खत्म हो संघर्ष'

धर्मशाला, 31 मार्च (आईएएनएस)। बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने मिडिल ईस्ट के साथ-साथ रूस और यूक्रेन में भी शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि हिंसा से समस्या का समाधान नहीं निकलता संवाद से मामले सुलझाए जा सकते हैं।

दलाई लामा के आधिकारिक एक्स अकाउंट से ये खत साझा किया गया है, जिसमें 90 साल के धार्मिक गुरु ने पोप लियो चौदहवें की शांति अपील का समर्थन किया है।

सर्वोच्च तिब्बती धर्म गुरु ने कहा, मैं दिल से होली फादर पोप लियो की पाम संडे के दिन की गई शांति अपील का समर्थन करता हूं। हथियार डालने और हिंसा छोड़ने की उनकी गुजारिश मेरे दिल को छू गई, क्योंकि यह सभी बड़े धर्मों की शिक्षाओं का सार बताती है।

सभी धर्म के सार को आगे समझाते हुए उन्होंने कहा कि असल में, चाहे हम ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म, इस्लाम, हिंदू धर्म, यहूदी धर्म या दुनिया की किसी भी महान आध्यात्मिक परंपरा को देखें, संदेश असल में एक ही है: प्यार, दया, सहनशीलता और आत्म-संयम। इनमें से किसी में भी हिंसा को कोई जगह नहीं दी गई है। इतिहास ने हमें बार-बार दिखाया है कि हिंसा से सिर्फ और ज्यादा हिंसा ही पैदा होती है और यह कभी भी शांति की पक्की नींव नहीं होती।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने आगे कहा, मिडिल ईस्ट या रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का समाधान संवाद, कूटनीति और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए—इस समझ के साथ कि, हम सब भाई-बहन हैं (मानव परिवार का हिस्सा हैं)।

शांति अपील करते हुए उन्होंने अंत में कहा, मैं अनुरोध करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि हिंसा और संघर्ष पर जल्द ही विराम लगाया जाए।

बता दें कि वेटिकन में पाम संडे मास के दौरान पोप लियो चौदहवें ने ईरान संघर्ष तुरंत खत्म करने की अपील करते हुए बाइबल को कोट किया था। उन्होंने बाइबल के एक अंश का हवाला देते हुए कहा, यीशु उन लोगों की प्रार्थनाएं नहीं सुनते जो युद्ध छेड़ते हैं, बल्कि उन्हें अस्वीकार कर देते हैं, यह कहते हुए कि भले ही तुम कितनी भी प्रार्थनाएं करो, मैं नहीं सुनूंगा: तुम्हारे हाथ खून से सने हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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