Ground Report: मौत को मात देता है इजराइल का 'मैगन डेविड अडोम', पाताल में बना है हाईटेक कंट्रोल रूम और हॉस्पिटल ऑन व्हील्स
इजराइल और हमास-ईरान के बीच चल रही भीषण जंग के बीच पूरी दुनिया इस बात से हैरान है कि आखिर इजराइल अपने नागरिकों की जान इतनी मुस्तैदी से कैसे बचा पा रहा है. न्यूज नेशन की टीम ने इजराइल के उस 'नर्वस सिस्टम' तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की है, जिसे दुनिया मैगन डेविड अडोम (MDA) के नाम से जानती है यह इजराइल की वो आपातकालीन और रेस्क्यू सर्विस है, जिसकी तुलना भारत के NDMA या NDRF से की जा सकती है. इसी बेहतरीन मैनेजमेंट का नतीजा है कि बीते 33 दिनों से जारी जंग के बावजूद इजराइल में मौत का आंकड़ा केवल 20 तक सीमित रहा है. सेंट्रल इजराइल में जमीन से 50 मीटर यानी करीब 150 फुट नीचे बना यह हेडक्वार्टर किसी भी बड़े मिसाइल हमले को झेलने में सक्षम है.
तकनीक और संसाधनों का जबरदस्त नेटवर्क
MDA का नेटवर्क इतना विशाल है कि इनके पास दो हजार के आसपास एंबुलेंस, बारह सौ टू-व्हीलर फर्स्ट रेस्क्यू रिस्पाडर और दो स्पेशल बोट मौजूद हैं. इतना ही नहीं, मुश्किल रास्तों और दूर-दराज के इलाकों के लिए दस से ज्यादा हेलीकॉप्टर हर वक्त तैयार रहते हैं. इस सेंटर के अंदर कंट्रोल रूम, ऑपरेशनल सेंटर और दुनिया का सबसे आधुनिक ब्लड सेंटर मौजूद है. यह पूरी व्यवस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट नेविगेशन, रेडार और ऑप्टिकल तकनीक से लैस है. इसी वजह से इजराइल और जापान की आपातकालीन सेवाओं को पूरी दुनिया में सबसे बेस्ट माना जाता है.
कंट्रोल रूम का जादुई नर्वस सिस्टम
इस पूरे सिस्टम का दिमाग इसका कंट्रोल रूम है. यहां इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF), सैटेलाइट और रेडार का डेटा सेंटर एक साथ काम करता है. खास बात यह है कि बिना किसी के फोन किए भी सिस्टम को पता चल जाता है कि कहां हमला हुआ है या किसे मदद चाहिए. एआई की मदद से मिसाइल गिरने की लोकेशन और संभावित नुकसान का आकलन पहले ही कर लिया जाता है. इस तकनीक के कारण एंबुलेंस महज चार मिनट के अंदर ग्राउंड जीरो पर पहुंच जाती है. उत्तर में गोलान की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में निगेव के रेगिस्तान तक इनका जाल बिछा हुआ है. लाल सागर और भूमध्य सागर में इनकी एंबुलेंस बोट्स तैनात रहती हैं.
ऑपरेशनल कॉल सेंटर और स्मार्ट मॉनिटरिंग
ऑपरेशनल कॉल सेंटर में सैकड़ों रिस्पॉडर तैनात रहते हैं, जो कॉल की लोकेशन ट्रेस कर नजदीकी एंबुलेंस को रवाना करते हैं. यहां बड़ी स्क्रीन्स पर एंबुलेंस के लिए कलर कोड का इस्तेमाल होता है. नीला रंग उन कॉल्स के लिए है जिन्हें आंसर किया जा रहा है, लाल रंग ग्राउंड जीरो पर पहुंचने वालों के लिए और पीला रंग वहां के लिए है जहां रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. इजराइल की सभी गाड़ियों में खास सेंसर लगे हैं जो सीधे इस कंट्रोल रूम से लिंक हैं. अगर कहीं धमाका होता है, तो सेंसर तुरंत इसकी सूचना हेडक्वार्टर भेज देता है.
मिसाइल अटैक के दौरान सिचुएशन रूम
जब न्यूज नेशन की टीम वहां मौजूद थी, ठीक उसी समय सेंट्रल इजराइल में सायरन बजने लगे. ईरान की ओर से मिसाइल अटैक हुआ था. सिचुएशन रूम में लगे डिजिटल मैप पर तुरंत सायरन की लोकेशन और मिसाइल के टुकड़ों का संभावित डेटा दिखने लगा. अगर एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल को रोकने में नाकाम रहता है, तो एल्गोरिदम तुरंत बता देता है कि मिसाइल कहां गिरेगी. इससे पहले कि मिसाइल जमीन को छुए, रेस्क्यू टीम उस दिशा में रवाना हो जाती है.
जमीन के नीचे एंबुलेंस का शहर
जमीन से 150 फुट नीचे बने इस सेंटर में सैकड़ों एंबुलेंस और बाइक्स का काफिला हर वक्त तैयार रहता है. यहां सबसे खास है 'हॉस्पिटल ऑन व्हील'. यह एक ऐसी बस है जिसमें स्टेचर लिफ्ट, आईसीयू, ऑक्सीजन वेंटिलेटर और 10 बेड की सुविधा है. इसमें हार्ट अटैक से लेकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट तक की सर्जरी की जा सकती है. अगर दुश्मन किसी हॉस्पिटल को निशाना बनाता है, तो ये बसें चलती-फिरती अस्पताल बनकर मरीजों की जान बचाती हैं.
दुनिया का सबसे हाईटेक ब्लड बैंक
MDA के पास दुनिया का सबसे एडवांस्ड ब्लड टेस्टिंग और स्टोरेज सेंटर है. यहां एयरपोर्ट के कन्वेयर बेल्ट की तरह ऑटोमैटिक सिस्टम से ब्लड यूनिट्स की जांच होती है. रोबोटिक्स और एआई के जरिए खून को ग्रुप के आधार पर अलग किया जाता है. जमीन से चार मंजिल नीचे बने इस ब्लड बैंक में तापमान जीरो डिग्री से नीचे रखा जाता है. युद्ध के दौरान इजराइल पुलिस, फौज और आम नागरिकों के लिए यहीं से खून की सप्लाई होती है. इस सेंटर में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद, पुलिस और सेना मिलकर काम करती हैं.
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