50 हजार के झगड़े से हुआ करोड़ों के किडनी रैकेट का खुलासा, कानपुर में 90 लाख तक बिक रही थी जिंदगी
Kanpur Kidney Racket Busted: कानपुर में एक मामूली से 50,000 के भुगतान विवाद ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है. यह मामला अब करोड़ों रुपये के अवैध अंग व्यापार से जुड़ा सामने आ रहा है, जिसमें कई अस्पतालों, दलालों और डॉक्टरों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है.
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक किडनी डोनर ने पुलिस से शिकायत की कि उसे तय रकम से 50,000 कम दिए गए और बाकी पैसे देने में लगातार टालमटोल की जा रही है. डोनर को किडनी देने के बदले 10 लाख रुपए का वादा किया गया था, लेकिन उसे पूरी रकम नहीं मिली. परेशान होकर उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा होने लगा.
कैसे लोग बने निशाना?
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया. उन्हें भावनात्मक रूप से बहलाकर या झूठे बहाने देकर किडनी दान के लिए तैयार किया जाता था. एक मामले में, उत्तराखंड के एक युवक को यह कहकर राजी किया गया कि किडनी किसी रिश्तेदार के लिए चाहिए. आर्थिक तंगी के कारण उसने हामी भर दी.
10 लाख में खरीदा और 90 लाख से ज्यादा में बेचा
इसके बाद कानपुर के रावतपुर स्थित एक निजी अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया और किडनी निकाल ली गई. चौंकाने वाली बात यह है कि जिस किडनी के बदले डोनर को 10 लाख रुपए देने का वादा किया गया था, उसी किडनी को मुजफ्फरनगर की एक महिला के परिवार को 90 लाख रुपए से ज्यादा में बेचा गया. डोनर को केवल 6 लाख रुपए नकद और 3.5 लाख रुपए चेक के जरिए दिए गए.
खुद को बचाने के लिए अपनाया ये फॉर्मूला
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस रैकेट ने पकड़े जाने से बचने के लिए ‘तीन अस्पताल मॉडल’ अपनाया था. किडनी निकालने के बाद डोनर और मरीज को एक दिन के लिए एक ही अस्पताल में रखा जाता था, फिर उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता था. इससे किसी एक अस्पताल के पास पूरी जानकारी नहीं रहती थी और जांच से बचना आसान हो जाता था.
डोनर को बाद में दूसरी पहचान के साथ दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि रिसीवर को कहीं और भेज दिया गया. यह तरीका इस पूरे नेटवर्क की सुनियोजित कार्यप्रणाली को दर्शाता है.
आर्थिक रूप से कमजोर युवा बनते थे शिकार
जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट के निशाने पर छात्र और आर्थिक रूप से कमजोर युवा थे. एक डोनर, जिसने खुद को MBA छात्र बताया, ने शुरुआत में 4 लाख रुपए में किडनी देने की बात स्वीकार की थी. वहीं, एक अन्य मामले में एक छात्रा से 4 लाख रुपए में किडनी ली गई, जिसे बाद में 45-50 लाख रुपए में बेचे जाने की आशंका है.
क्या संगठित गिरोह का है काम?
पुलिस का मानना है कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह है जिसमें दलाल, अस्पताल संचालक और डॉक्टर शामिल हैं. दलाल डोनर तलाशते थे, अस्पताल ऑपरेशन की सुविधा देते थे और डॉक्टर ट्रांसप्लांट करते थे.
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
इस मामले में शिवम अग्रवाल और अस्पताल संचालक सुरजीत सिंह आहूजा को हिरासत में लिया गया है. इसके अलावा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने कई अस्पतालों पर छापेमारी की, जिनमें प्रिया हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं. ट्रांसप्लांट से जुड़े रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है.
डॉक्टर दंपति भी हिरासत में
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में एक डॉक्टर दंपति समेत कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और अलग-अलग जगहों से डोनर और मरीजों को जोड़कर यह अवैध कारोबार किया जा रहा था. फिलहाल, जांच जारी है और अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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वैभव सूर्यवंशी नहीं, 24 साल के इस खिलाड़ी ने IPL इतिहास में लगाई है फास्टेस्ट फिफ्टी
Vaibhav Suryavanshi ने सोमवार की रात चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ जिस तरह की बल्लेबाजी की, उसके बाद से हर तरफ उन्हीं की चर्चा है. वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए एक और धमाकेदार पारी खेली, जिसमें उन्होंने महज 15 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. वह 15 साल की उम्र में इतनी तेज अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज तो बन गए. मगर, क्या आपको मालूम है कि आईपीएल इतिहास में फास्टेस्ट फिफ्टी बनाने का रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज है. अगर नहीं, तो कोई बात नहीं, क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको उस बल्लेबाज के बारे में बताने वाले हैं.
वैभव सूर्यवंशी ने 15 गेंदों में लगाई फिफ्टी
1⃣5⃣-ball FIFTY????
— IndianPremierLeague (@IPL) March 30, 2026
That's the 3⃣rd joint-fastest half-century in #TATAIPL ????????
Vaibhav Sooryavanshi goes back for an entertaining 52(17) ????
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RR VS CSK के बीच खेले गए IPL 2026 के तीसरे मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने तूफानी बल्लेबाजी की. उन्होंने सीएसके के दिए 128 रनों को चेज करते हुए उन्होंने महज 15 गेंदों में अर्धशतक लगाया. उन्होंने अपनी पारी में 5 छक्के और 4 चौके लगाए. हालांकि, वह फिफ्टी को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके और 17 गेंदों पर 52 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. उनका स्ट्राइक रेट 305.88 का रहा. इसी के साथ वैभव आईपीएल इतिहास में फास्टेस्ट फिफ्टी लगाने वाले तीसरे नंबर के खिलाड़ी बन गए.
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— IndianPremierLeague (@IPL) March 30, 2026
Vaibhav Sooryavanshi was in his element tonight ????
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किसके नाम है IPL इतिहास की फास्टेस्ट फिफ्टी?
IPL इतिहास में फास्टेस्ट फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड राजस्थान रॉयल्स के स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल के नाम पर दर्ज है. वैभव ने आईपीएल 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ महज 13 गेंदों में फिफ्टी लगाकर ये रिकॉर्ड अपने नाम किया था.
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नंबर-2 पर संयुक्त रूप से हैं 3 बल्लेबाज
यशस्वी जायसवाल के बाद दूसरे नंबर पर केएल राहुल पैट कमिंस और रोमानियो शेफर्ट संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर मौजूद हैं. तीनों ही खिलाड़ियों ने 14 गेंदों में अर्धशतक लगाए हैं. केएल राहुल ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 2018 में, पैट कमिंस ने 2022 में मुंबई इंडियंस के खिलाफ, रोमानियो शेफर्ट ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 2025 ये कारनामा किया था.
वैभव सूर्यवंशी सहित 6 बल्लेबाजों ने किया है ऐसा
The leftie connection at the top of the charts! ????
— IndianPremierLeague (@IPL) March 30, 2026
Yashasvi Jaiswal ???? Vaibhav Sooryavanshi ????#TATAIPL | #KhelBindaas | #RRvCSK | @rajasthanroyals pic.twitter.com/ULYWW8sClJ
वैभव सूर्यवंशी ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ महज 15 गेंदों पर अर्धशतक लगाया. इसी के साथ वैभव आईपीएल में 15 गेंदों में फिफ्टी लगाने वाले 6वें खिलाड़ी बन गए. वैभव से पहले 5 खिलाड़ी ये कारनामा कर चुके हैं. इसमें युसुफ पठान ने 2014 में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ, सुनील नरेन ने 2017 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ, निकोलस पूरन ने 2023 में RCB के खिलाफ, जेक फ्रेजर गर्क ने 2024 में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ, तो वहीं 2024 में ही मुंबई इंडियंस के खिलाफ ये कारनामा किया था.
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