Dehradun Murder Case: आर्मी ब्रिगेडियर की गोली मारकर हत्या, जानें कैसे हुआ हादसा?
Dehradun Murder Case: उत्तराखंड के देहरादून से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. दरअसल, रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई है. कहा जा रहा है कि ब्रिगेडियर 30 मार्च की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. इसी दौरान दो गाड़ी सवारों के बीच विवाद चल रहा था. विवाद इतना गहराया कि दोनों गाड़ियों से गोलीबारी शुरू हो गई. इसमें से एक गोली सीधे रिटायर्ड ब्रिगेडियर को लगी और अस्पताल में उनकी मौत हो गई. अधिक जानकारी के लिए देखिए पूरा वीडियो
लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी, दिवालियापन प्रक्रिया में आएगी तेजी
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रिया में गई कंपनियों के मामलों का तेजी से समाधान करना है।
इस विधेयक में कंपनी के डिफॉल्ट साबित हो जाने के बाद दिवालियापन के आवेदनों को स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं ताकि समाधान तंत्र को और मजबूत किया जा सके।
सीतारमण ने कहा कि आईबीसी समाधान में देरी का मुख्य कारण व्यापक मुकदमेबाजी है, और आईबीसी विधेयक में प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए दंड का प्रावधान है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए विधेयक पर लोकसभा में 27 मार्च को चर्चा हुई थी। यह विधेयक, जिसे पहले एक चयन समिति को भेजा गया था, कंपनी या व्यक्ति की दिवालियापन संबंधी मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को दूर करने के लिए लाया गया है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने सदन में कहा कि दिवालियापन संहिता (आईबीसी) ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कानून का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली तंत्र के रूप में कार्य करना नहीं था।
लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी ने बेहतर ऋण अनुशासन में योगदान दिया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार किया है।
मंत्री ने कहा कि दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से बाहर आने के बाद कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है और उनकी कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रथाओं में भी सुधार हुआ है।
वित्त मंत्री ने यह बयान चयन समिति द्वारा प्रस्तुत दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 के जवाब में दिया।
सीतारमण ने कहा, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, जो 2016 में लागू हुई, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक रही है। उन्होंने आगे कहा कि इस ढांचे ने कंपनियों को समय के साथ बेहतर क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करने में भी मदद की है।
साथ ही, उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्तियों का समाधान करना है, न कि केवल बकाया राशि की वसूली करना।
उन्होंने स्पष्ट किया, आईबीसी व्यवहार्य व्यवसायों को बचाने और उद्यम मूल्य को संरक्षित करते हुए वित्तीय संकट को दूर करने का एक ढांचा है। आईबीसी का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली का साधन बनना नहीं था।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation




















