लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी, दिवालियापन प्रक्रिया में आएगी तेजी
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रिया में गई कंपनियों के मामलों का तेजी से समाधान करना है।
इस विधेयक में कंपनी के डिफॉल्ट साबित हो जाने के बाद दिवालियापन के आवेदनों को स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं ताकि समाधान तंत्र को और मजबूत किया जा सके।
सीतारमण ने कहा कि आईबीसी समाधान में देरी का मुख्य कारण व्यापक मुकदमेबाजी है, और आईबीसी विधेयक में प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए दंड का प्रावधान है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए विधेयक पर लोकसभा में 27 मार्च को चर्चा हुई थी। यह विधेयक, जिसे पहले एक चयन समिति को भेजा गया था, कंपनी या व्यक्ति की दिवालियापन संबंधी मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को दूर करने के लिए लाया गया है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने सदन में कहा कि दिवालियापन संहिता (आईबीसी) ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कानून का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली तंत्र के रूप में कार्य करना नहीं था।
लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी ने बेहतर ऋण अनुशासन में योगदान दिया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार किया है।
मंत्री ने कहा कि दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से बाहर आने के बाद कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है और उनकी कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रथाओं में भी सुधार हुआ है।
वित्त मंत्री ने यह बयान चयन समिति द्वारा प्रस्तुत दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 के जवाब में दिया।
सीतारमण ने कहा, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, जो 2016 में लागू हुई, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक रही है। उन्होंने आगे कहा कि इस ढांचे ने कंपनियों को समय के साथ बेहतर क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करने में भी मदद की है।
साथ ही, उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्तियों का समाधान करना है, न कि केवल बकाया राशि की वसूली करना।
उन्होंने स्पष्ट किया, आईबीसी व्यवहार्य व्यवसायों को बचाने और उद्यम मूल्य को संरक्षित करते हुए वित्तीय संकट को दूर करने का एक ढांचा है। आईबीसी का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली का साधन बनना नहीं था।
--आईएएनएस
एबीएस/
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Ground Report: फिर लौट रहा केरोसिन का दौर! ग्राउंड रिपोर्ट में देखें और जानें कहां और कितना मिलेगा तेल?
Ground Report: ईरान-इजराइल संघर्ष को करीब एक महीना हो चुका है. शुरुआत में लोगों को डर था कि इस युद्ध का असर भारत में भी पड़ेगा, खासकर पेट्रोल और डीजल की सप्लाई और कीमतों पर. लेकिन अब स्थिति काफी सामान्य दिखाई दे रही है. दिल्ली-एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर हालात पूरी तरह से सामान्य हैं.
कैसे हैं ग्राउंड लेवल पर हालात?
न्यूजनेशन के रिपोर्टर सैय्यद आमिर हुसैन ने खुद ग्राउंड पर जाकर हालातों का जायजा लिया. उनकी रिपोर्ट के मुताबिक वहां न तो पेट्रोल-डीजल की कोई कमी है और न ही लोगों में घबराहट देखने को मिल रही है. लोग रोज की तरह अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा रहे हैं और अपने काम पर जा रहे हैं. कहीं भी लंबी लाइनों या स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं दिख रही है.
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
आमिर हुसैन ने बताया कि सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें. सोशल मीडिया या इधर-उधर से मिलने वाली गलत खबरों के कारण कई बार लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल खरीदने लगते हैं, जिससे पैनिक की स्थिति बन सकती है. लेकिन अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं है.
बिना रुकावट जारी है पेट्रोल और डीजल की सप्लाई
रिपोर्टर आमिर ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि देश में फ्यूल की सप्लाई चेन मजबूत बनी रहे. यानी रिफाइनरी से लेकर पेट्रोल पंप तक पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना रुकावट जारी है. इसी वजह से लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो रही है.
केरोसिन ऑयल की भी होगी बिक्री
आमिर ने बताया कि एक और महत्वपूर्ण फैसला सरकार ने लिया है. हर जिले के दो पेट्रोल पंपों पर 5000 लीटर तक केरोसिन ऑयल (मिट्टी का तेल) उपलब्ध कराया जाएगा. इसका मकसद यह है कि जिन लोगों को केरोसिन की जरूरत होती है, उन्हें भी आसानी से यह मिल सके और किसी तरह की कमी महसूस न हो.
एक्साइज ड्यूटी में भी की गई कटौती
कीमतों को लेकर आमिर ने बताया कि अभी पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. हाल ही में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली है. डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगभग शून्य कर दी गई है, जबकि पेट्रोल पर भी टैक्स कम किया गया है. इससे कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव कम हुआ है.
ग्राउंड पर लोगों से लिए रिएक्शन
ग्राउंड रिपोर्ट में जब लोगों से आमिर हुसैन ने बात की तो उन्होंने भी यही कहा कि अभी उन्हें पेट्रोल आसानी से मिल रहा है. किसी तरह की परेशानी या कमी का अनुभव नहीं हो रहा. लोग सामान्य मात्रा में ही पेट्रोल भरवा रहे हैं और अतिरिक्त स्टॉक करने की जरूरत महसूस नहीं कर रहे. हालांकि, कुछ लोग यह जरूर कह रहे हैं कि भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है. इसलिए वे खबरों पर नजर बनाए हुए हैं. लेकिन फिलहाल किसी तरह की घबराहट या पैनिक की स्थिति नहीं है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या हैं हाल?
अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बात करें तो कई देशों में इस युद्ध का असर देखने को मिला है. वहां पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतें बढ़ गई हैं. लेकिन भारत में अभी तक सरकार के प्रबंधन और नीतियों की वजह से स्थिति नियंत्रण में है. फिलहाल, भारत में इस समय पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है. सरकार लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
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