UNCOVERED With Manoj Gairola: कैसे ईरान के सामने उखड़ रहे हैं अमेरिका के पैर? वर्क फ्रॉम होम की तरह युद्ध लड़ रहे सैनिक
UNCOVERED With Manoj Gairola: ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध जारी है. आज युद्ध का 28वां दिन है. ईरान भी इस्राइल और अमेरिका के ठिकानों को निशाना बना रहा है. युद्ध की आग अब खाड़ी के अधिकांश देशों तक भी पहुंच गई है. इसी युद्ध पर न्यूज नेशन आपके लिए लाया है खास शो- UNCOVERED With Manoj Gairola.
UNCOVERED With Manoj Gairola के नए एपिसोड में न्यूज नेशन के एडिटर-इन-चीफ, मनोज गैरोला ने बताया कि मध्य पूर्व की इस जंग में ईरान ने वो कर दिखाया, जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था. तेल और गैस से भरपूर इस इलाके को कंट्रोल करने के लिए या फिर Power Projection के लिए अमेरिका ने जो फौजी अड्डे बनाए थे उन्हें ईरान ने बर्बाद कर दिया है.
ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर इतनी भीषण बमबारी की कि अमेरिकी सेना को वहां से भागना पड़ गया. उन्हें होटल्स और कमर्शियल ऑफिसेज में शिफ्ट कर दिया गया. अमेरिकी सेना अब वहां से रिमोट वर्किंग कर रही है. रिमोट वर्क कुछ वैसा ही जैसा हम में से कुछ लोग वर्क फ्रॉम होम करते हैं.
13 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान का हमला
एडिटर-इन-चीफ ने आगे बताया कि अमेरिका के सबसे बड़े अखबार New York Times ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया तो ईरान ने पलटवार करते हुए क्षेत्र के सभी 13 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन्स और मिसाइल्स की बौछार कर दी थी, जिससे अमेरिका के अधिकांश अड्डे नष्ट हो गए और वहां मौजूद सेना को शिफ्ट करना पड़ गया. सैनिकों की संख्या हजारों में है. अमेरिका की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसे अपने काफी सैनिकों और मिलिट्री साजो-सामान को यूरोप के देशों में भेजना पड़ गया.
फ्रंटलाइन पर कम ही बचे अमेरिकी सैनिक
इस रिपोर्ट से पता चलता है कि युद्ध शुरू होने से पहले मध्य पूर्व में जहां अमेरिका के जो 40 हजार फौजी तैनात थे, अब बहुत कम ही फ्रंटलाइन पर मौजूद है. होटल्स और ऑफिस से काम कर रहे हैं वो भी Safe नहीं है. ईरान की सेना ने इन इलाकों में आम लोगों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया कि ये उनकी Islamic Duty है कि अमेरिकी सैनिकों के छिपने की सारी जानकारी टेलीग्राम ऐप के जरिए उन्हें भेजी जाए. ईरानी सेना ने साफ कहा है कि सैनिकों को रिहायशी इलाकों में ना छिपाया जाए और वे इनसे दूर रहें.
ईरानी सेना ने लगाए ये आरोप
एडिटर-इन-चीफ गैरोला ने बताया कि अमेरिका की सेना पर ईरान ने आरोप लगाया कि वह नागरिकों को ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल कर रही है. ऐसा आरोप अमेरिकी फौज वियतनाम और अफगानिस्तान युद्ध में अपने विरोधियों पर लगाती आई है. लेकिन पहली बार अमेरिकी सेना पर ऐसे आरोप लगे हैं.
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ईरान की ताकत का सही से आंकलन नहीं कर पाई अमेरिकी सेना
युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरानी प्रॉक्सी मिलिशिया ग्रुप ने इराक के इरबिल शहर में एक फाइव स्टार होटल पर ड्रोन से हमला कर दिया था. क्योंकि वहां अमेरिकी फौजियों के छिपे होने का शक था. जाहिर सी बात है कि अमेरिकी सेना इस बार ईरान की ताकत का ढंग से आकलन नहीं कर पाई.
दिग्गज ब्रोकरेज जेफरीज ने एचडीएफसी बैंक को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयरों में 3 प्रतिशत तक की गिरावट
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच दी है और अपने कई अहम पोर्टफोलियो में भारत का एक्सपोजर भी कम कर दिया है। यह फैसला बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद लिया गया है।
जेफरीज के स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस वुड्स ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ग्रीड एंड फियर (लालच और डर) में कहा है कि कंपनी ने एचडीएफसी बैंक को एशिया (जापान को छोड़कर), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली इक्विटी पोर्टफोलियो से हटा दिया गया है। हालांकि, इस फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई गई है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने एचडीएफसी बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ शामिल किया है। इस बदलाव से भारत के कुल वेटेज में मामूली कमी आई है।
जेफरीज ने अपने एशिया प्रशांत क्षेत्र (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेटेज 2-2 प्रतिशत घटाया गया है, जबकि ताइवान का वेटेज 4 प्रतिशत बढ़ाया गया है। फिलहाल इस पोर्टफोलियो में भारत का हिस्सा 13 प्रतिशत है, जो एमएससीआई बेंचमार्क से थोड़ा ज्यादा है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब एचडीएफसी बैंक ने 18 मार्च को जानकारी दी थी कि उसके अंशकालिक चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने मूल्यों और नैतिकता को लेकर मतभेद के कारण इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है।
बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्म्स भी नियुक्त की हैं। अपने इस्तीफे में चक्रवर्ती ने बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों पर सवाल उठाए, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों के अनुरूप नहीं थीं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। जेपी मॉर्गन के अनुज सिंघल के मुताबिक, भले ही कोई गलत काम साबित नहीं हुआ है, लेकिन इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है और शेयर पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी इस इस्तीफे से जुड़े मामलों की जांच कर सकता है।
इस बीच, बीएसई पर एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत गिरकर 758 रुपए तक आ गया। पिछले एक महीने में बैंक का शेयर 14.3 प्रतिशत और पिछले 6 महीने में 20 प्रतिशत तक गिर चुका है। बैंक के 52 हफ्तों का लो 741.05 रुपए, तो हाई 1,020.50 रुपए है। वहीं बैंक का मार्केट कैप 5.82 लाख करोड़ रुपए है।
--आईएएनएस
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