अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ शांति वार्ता करने के बावजूद, पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है। शनिवार को इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा कि उन्होंने ईरान के यज़्द में स्थित ईरानी शासन के मिसाइल और समुद्री खदान उत्पादन के मुख्य केंद्र पर हमला किया है। आईडीएफ ने दावा किया कि इस केंद्र का उपयोग क्रूज प्लेटफॉर्म, पनडुब्बियों और हेलीकॉप्टरों से गतिशील और स्थिर समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए उन्नत मिसाइलों की योजना, विकास, संयोजन और भंडारण के लिए किया जाता था।
आईडीएफ ने कहा कि तेहरान भर में किए गए हमलों में, वायु सेना ने शासन द्वारा हथियार उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले बुनियादी ढांचे और स्थलों को निशाना बनाया, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन स्थलों पर विशेष जोर दिया गया। आईडीएफ के अनुसार, पश्चिमी ईरान में, सैन्य खुफिया जानकारी के मार्गदर्शन में, वायु सेना ने पूरी रात ईरानी आतंकी शासन के गोलाबारी केंद्रों पर हमले किए। जिन लक्ष्यों पर हमला किया गया उनमें मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल भंडारण स्थल शामिल थे जो इजरायल राज्य के लिए खतरा पैदा करते हैं। आईडीएफ ने कहा कि वह इजरायल राज्य के नागरिकों की ओर होने वाली गोलाबारी को कम करने के उद्देश्य से शासन के बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क पर हमला करने के लिए लगातार बिना रुके अभियान चला रहा है।
पिछले एक दिन में, खुफिया जानकारी के आधार पर, इजरायली वायु सेना ने पश्चिमी ईरान में लगभग 20 लड़ाकू विमानों की उड़ानों में ईरानी आतंकी शासन के दर्जनों ठिकानों पर हमला किया। इन उड़ानों के तहत, वायु सेना ने करमानशाह और देज़फुल सहित कई अन्य ठिकानों पर हमला किया और बैलिस्टिक मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणालियों के भंडारण और प्रक्षेपण स्थलों पर लगभग 70 गोला-बारूद गिराए। इसके अलावा, इन ठिकानों से संचालित ईरानी आतंकी शासन के सैनिकों को मार गिराया गया। वायु सेना ने कहा कि वह इजरायल राज्य के नागरिकों पर होने वाले हमलों को कम करने के उद्देश्य से शासन के बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क पर लगातार हमले कर रही है।
आईडीएफ ने आगे कहा कि लगभग आठ घंटे के विराम के बाद, आईडीएफ ने ईरान से एक नए बैलिस्टिक मिसाइल हमले का पता लगाया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के 83वें चरण के क्रियान्वयन की घोषणा की, जिसमें मिसाइलों और ड्रोनों से पूरे क्षेत्र में प्रमुख अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के एक बयान के अनुसार, यह अभियान "सदाबहार फारसी खाड़ी के उत्तर में स्थित देश के दक्षिणी हिस्से के दयालु लोगों" को समर्पित था और इसे "या अबा अब्दुल्ला अल-हुसैन (एएस)" के पवित्र मंत्र के तहत संचालित किया गया था।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कभी शायद ही सोचा हो कि उनके सैनिकों पर ईरान के हमले इतने पहने हो जाएंगे कि सैनिकों को होटलों में पनाह लेनी पड़ेगी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट यही कह रही है। पूरे मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया जो इलाका है वहां पर अमेरिका के छोटे-बड़े मिलाके और ठिकाने एयरबेस नेवल बेस सब मिला के 13 बड़े-बड़े ऐसे बेस हैं जो अमेरिका के लिए स्ट्रेटेजिक रूप से बहुत अहम माने जाते हैं। ईरान ने इन पर इतना जबरदस्त हमले हमला किया चाहे वो ड्रोन से हो, चाहे बैलेस्टिक मिसाइल से हो, चाहे वो हाइपरसोनिक मिसाइल से हो कि अब वहां रहने लायक नहीं बचा है। या तो वह पूरी तरह तबाह हो चुके हैं वो बेसेस। या तो अगर वो बचे भी हैं तो उनमें जान का खतरा लेके कोई रहना नहीं चाहता। अब यही वजह है कि अमेरिकी सैनिकों को इधर-उधर शिफ्ट किया जा रहा है। अलग-अलग जगहों पे भेजा जा रहा है। लेकिन उन बेसिस पे नहीं रहना चाह रहा क्योंकि वो बेस लगातार ईरान जाने किस तरह से मॉनिटर कर रहा है। वो सेटेलाइट इमेजरी उसको मिल रही है या जो भी चीजें हैं लेकिन वो लगातार इन पे नजर बनाए हुए हैं। और जैसे ही वहां कोई एक्टिविटी हो रही है ईरान तुरंत हमले कर रहा है।
कतर में वहां पे सबसे बड़ा रडार था जो उस पूरे एरिया पे निगरानी रखता था वो रडार तबाह कर दिया। ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में जो अमेरिका के मिलिट्री बेससेस हैं वहां पर हमले हुए हैं। अमेरिका कई ठिकानों पे जो खासकर मिलिट्री ठिकाने हैं वहां हमले हो रहे हैं। इसमें दो ठिकाने सबसे अहम है। एक क़तर का अलदैद एयरवेज क़तर में ही जो है अमेरिका की जो सेंट्रल कमांड है सेंट कॉम उसका हेड क्वार्टर है और दूसरा है बहरीन में अमेरिकी नेवी की फिफ्थ फ्लीट जो एक मतलब वो नेवल हेड क्वार्टर है उनका। उस पूरी एरिया में जितनी भी नेवल एक्टिविटी होती है अमेरिका की जो अब्राहम लिंकन और जेरा फोल्ड सब वहीं से ऑपरेट हो रहे हैं। सब वहीं से कंट्रोल हो रहे हैं। उसके अलावा जो लैंड फोर्सेस हैं जो भी तमाम डिसीजन लिए जाते हैं वो सेंट्रल कमांड से लिए जाते हैं। ये दो तो सबसे अहम बेस हैं। इसके अलावा सऊदी का प्रिंस सुल्तान एयरबेस है। जावेद अली पोर्ट फैसिलिटी है।
नेवल फैसिलिटी से लेकर एयरबसेस जो ये दो मतलब मेन चीजें होती हैं किसी भी मिलिट्री में। दोनों को निशाना बनाया ईरान ने और इस तरीके से निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिका के बेसिस को निशाना बनाया है। उनका जो वहां पर मिलिट्री सिस्टम था उनको भी निशाना बनाया गया। तो अब जो खबरें आ रही हैं कि सैनिक कई अमेरिकी सैनिक छितर-बितर हो गए हैं और अलग-अलग होटलों में और दफ्तरों में पनाह लिए हुए हैं।
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