जंगलों का 'आदिम वायरलेस': मोबाइल के दौर में भी गूंज रहा है पेप्रे, जिसकी दहाड़ से थर्राते हैं शिकारी जानवर!
Tribal Musical Instrument : डिजिटल क्रांति और स्मार्टफोन के इस युग में, जहां दुनिया एक क्लिक पर सिमट गई है, तेलंगाना के आदिलाबाद के घने जंगलों में आज भी एक 'कबीलाई रेडियो' की धूंध सुनाई देती है. यह है 'पेप्रे' - गोंड और कोलम जनजातियों की विरासत का वो सुरम्य दस्तावेज़, जो संगीत से कहीं बढ़कर है. जंगली भैंसे के सींग और पीतल से बना यह वाद्य यंत्र कभी जंगलों में संचार (Communication) का इकलौता जरिया हुआ करता था. इसकी मर्मभेदी आवाज़ न केवल मीलों दूर संदेश पहुंचाती थी, बल्कि खूंखार शिकारियों को भी इंसानी बस्तियों से दूर रखने का सुरक्षा कवच थी. आज आधुनिकता के शोर में अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद कर रहा 'पेप्रे', मनुष्य और प्रकृति के उस प्राचीन सामंजस्य की याद दिलाता है, जो अब लुप्त होने की कगार पर है.
पीएम मोदी ने कैसे देखा भगवान रामलला का सूर्य तिलक? रामनवमी के पावन मौके पर अद्भुत दृश्य
Ram Lala Surya Tilak: देशभर में आज रामनवमी का त्योहार पूरी श्रद्धा और उत्साह से मनाया जा रहा है. अयोध्या में भगवान रामलला के मंदिर में भी इस पावन मौके पर खास उत्साह देखा जा रहा है. इस मौके पर भगवान रामलला का सूर्य तिलक किया गया. इस अद्भुत दृश्य को पूरी दुनिया ने देखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने. पीएम मोदी ने टीवी पर लाइव भगवान रामलला के सूर्य तिलक को देखा.
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