बांग्लादेश: फरवरी चुनाव में गड़बड़ी के आरोप, जमात ने कानूनी रास्ता अपनाया
ढाका, 25 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनावों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि उसके गठबंधन के कई उम्मीदवार मामूली अंतर से हारे, जिसकी वजह चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हैं।
जमात ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर मतगणना में देरी हुई, पोलिंग एजेंट्स के हस्ताक्षर गायब थे, फर्जी समर्थन दर्ज किए गए और कुछ मामलों में पेंसिल से अंकित परिणाम पाए गए। पार्टी ने कहा कि वह इन आरोपों को लेकर कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ रही है, लेकिन फिलहाल बड़े स्तर पर जन आंदोलन से बच रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, 11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात ने 32 निर्वाचन क्षेत्रों में पुनर्मतगणना (रीकाउंट) की मांग को लेकर चुनाव आयोग में याचिका दायर की है। इसके साथ ही कम से कम 13 सीटों पर अदालत में भी चुनाव परिणामों को चुनौती दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जमात ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के दो पूर्व सलाहकारों सैयदा रिज़वाना हसन और खलीलुर रहमान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और उनसे पूछताछ व कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को स्पष्ट बहुमत मिला। पार्टी ने अपने दम पर 209 सीटें जीतीं, जबकि गठबंधन के साथ उसकी कुल सीटें 212 तक पहुंचीं। वहीं, जमात ने 68 सीटें अकेले और 77 सीटें गठबंधन के साथ हासिल कीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव के दो दिन बाद 15 फरवरी को गठबंधन ने 32 सीटों पर पुनर्मतगणना के लिए आवेदन किया था, जहां जीत-हार का अंतर 1,026 से 13,632 वोटों के बीच था। इनमें से 25 सीटों पर जमात के उम्मीदवार, तीन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी), दो खेलाफत मजलिस, और एक-एक सीट बांग्लादेश खेलाफत मजलिस व लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के उम्मीदवारों की थी।
चुनाव आयोग में शिकायत के बाद अब तक 12 उम्मीदवार अदालत का रुख कर चुके हैं, जिनमें जमात के महासचिव मिया गुलाम परवर भी शामिल हैं, जिन्होंने खुलना-5 सीट से याचिका दायर की है।
5 मार्च को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात ने “इलेक्शन इंजीनियरिंग” के आरोपों की न्यायिक जांच की मांग दोहराई थी। मिया गोलाम परवार ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता दोनों पूर्व सलाहकारों की भूमिका की जांच कराना है, जबकि अन्य मुद्दों को बाद में उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हम निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। यह तय करना सरकार का काम है कि जांच सीधे कराई जाए या न्यायिक प्रक्रिया के तहत, लेकिन हम अपनी मांग पर कायम हैं।”
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नेपाल जेनजी आंदोलन : केपी शर्मा ओली सहित तीन शीर्ष अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे की सिफारिश
काठमांडू, 25 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में पिछले वर्ष हुए जेनजी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय जांच आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ आपराधिक जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की है।
गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने 8 सितंबर को प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में ओली और लेखक की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की ओर इशारा किया और उनके खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की।
आयोग ने पूर्व पुलिस प्रमुख को भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश देने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
यदि आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुकदमा चलता है, तो इन तीनों को तीन से दस साल तक की सजा और अधिकतम 30 हजार नेपाली रुपए का जुर्माना हो सकता है। आयोग की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसकी एक लीक कॉपी व्यापक रूप से फैल चुकी है। आयोग के सामने अपने बयान में ओली ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को जान-माल के नुकसान को कम करने और प्रदर्शन में अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए गए थे।
एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, ओली सरकार को गिराने वाले जेनजी आंदोलन के दौरान कुल 77 लोगों की मौत हुई और 85 अरब नेपाली रुपए से अधिक की संपत्ति नष्ट हुई।
ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पतन के बाद, सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक गैर-राजनीतिक प्रशासन का गठन किया गया, जिसने पांच मार्च को प्रतिनिधि सभा के चुनाव करवाए।
चुनाव के बाद, बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी संसद में लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी जैसी पारंपरिक पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा।
नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक दो दिन पहले यह रिपोर्ट लीक हुई, जिससे आने वाली सरकार पर आंदोलन के दौरान जिम्मेदार पाए गए पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ सकता है।
आयोग ने तत्कालीन गृह सचिव गोकरण मणि दुवाडी, सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजु अर्याल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छवि राज रिजाल के खिलाफ भी मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी के आरोप में जांच और मुकदमे की सिफारिश की है।
यदि इन पर मुकदमा चलता है, तो उन्हें अधिकतम तीन साल की सजा और 30 हजार नेपाली रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
आयोग ने नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और राष्ट्रीय जांच विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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