जंग के बीच ईरान ने भारत को बहुत बड़ा धोखा दिया है। धोखा उन कश्मीरियों को भी दिया गया है जो ईरान के लिए पैसा सोना चांदी जमा कर रहे थे। ईरान के लिए जो कश्मीरी आंसू बहा रहे थे उनके साथ बहुत बड़ा खेल हो गया है। दरअसल ईरान ने पाकिस्तान के कहने पर एक बहुत घटिया हरकत की है। आपको याद होगा कि ईरान ने भारत के शिया मुस्लिमों के गुस्से का फायदा उठाकर उनसे मदद के नाम पर पैसा मांगा। भारत में ईरान के दूतावास ने बकायदा ऑनलाइन पेमेंट के लिए क्यूआर कोड तक जारी कर दिया। कश्मीरी लोगों ने भी ईरान को अपना सब कुछ मानते हुए ऑनलाइन पैसा भेजना शुरू कर दिया। घरों के बर्तन देने शुरू कर दिए। सोना चांदी, पैसा सब ईरान के लिए लुटा दिया। कश्मीरी लोगों की तरफ से भारत में ईरान के दूतावास से कहा गया कि हम आपके लिए इतना कुछ कर रहे हैं। हमारे लिए भी कुछ दो शब्द लिख दीजिए। इतना सुनते ही ईरान ने कश्मीरी लोगों का शुक्रिया अदा करने के लिए थैंक्यू इंडिया लिख दिया। लेकिन उसके बाद ईरान ने चुपचाप इन ट्वीट्स को डिलीट भी कर दिया। यह ट्वीट्स इसलिए हटाए गए हैं क्योंकि ईरान ने इसमें थैंक्यू इंडिया लिखा था।
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के कहने पर ईरान ने इन ट्वीट्स को डिलीट किया है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि ईरान कश्मीरी लोगों को भारत का माने। कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाए। जो मदद कश्मीर के मुस्लिम ईरान के लिए कर रहे हैं उसके लिए थैंक यू इंडिया ना लिखें। अब देखिए इससे घटिया हरकत क्या हो सकती है। इस कश्मीरी महिला ने पिछले 28 सालों से अपने पति की निशानी के तौर पर सोना बचा कर रखा था। वह सोना भी इस महिला ने ईरान के लिए दान कर दिया। ईरान ने बकायदा इस महिला का धन्यवाद करते हुए थैंक्यू इंडिया लिखा था। लेकिन पाकिस्तान के दबाव में यह ट्वीट भी ईरान ने डिलीट कर दिया। ईरान ने जिन-जिन ट्वीट्स में थैंक यू इंडिया लिखा था उसकी जगह पाकिस्तान ने ईरान से कश्मीर लिखवाया। बताइए कश्मीरी लोगों ने ईरान के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया। लेकिन ईरान इन सभी का पैसा लेकर भाग गया। ईरान के लिए आंसू बहा रहे इन कश्मीरियों को अब यह समझ लेना चाहिए कि ईरान उनका भी सगा नहीं हुआ। कश्मीरी लोगों ने ईरान के लिए अपना सब कुछ दे दिया।
लेकिन ईरान ने पाकिस्तान के कहने पर कश्मीरियों की मदद का अपमान कर दिया। भारत के मुस्लिम ईरान के लिए छाती पीटते रहे। लेकिन ईरान ने इन्हें धोखा दे दिया। बहरहाल ईरान को इसकी सजा जरूर मिलेगी। पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाले ईरान को सजा भारत तो देगा ही लेकिन सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देश भी उस समय का इंतजार कर रहे हैं जब यह जंग रुकेगी। ईरान ने अपने हमलों में इन खाड़ी देशों की गैस और तेल सप्लाई को 70% बंद करवा दिया है। लेकिन ईरान खुद रोजाना 2 लाख बैरल तेल बेचकर करोड़ों रुपए कमा रहा है। सऊदी अरब तो यहां तक बोल चुका है कि ईरान मुस्लिम देश ही नहीं है। अगर ईरान मुस्लिम देश होता तो वह खाड़ी के मुस्लिम देशों पर हमला नहीं करता।
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ईरान पर किए गए हवाई हमलों ने राजधानी तेहरान में भारी तबाही मचाई, लेकिन ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने भी इजराइल के तेल अवीव और पश्चिम एशिया के कई ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए इस्लामिक गणराज्य के साथ बातचीत कर रहा है। हजारों और अमेरिकी मरीन सैनिकों के खाड़ी क्षेत्र की ओर रवाना होने, दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर तीव्र हमला जारी रहने और ईरान द्वारा किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार करने के बीच युद्ध तेज होता दिखा। हालांकि, इसके एक दिन पहले ट्रंप ने ईरान को दी गई वह समयसीमा भी आगे बढ़ा दी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए नहीं खोलने पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को हवाई हमलों में निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी। इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तेहरान के नियंत्रण ने वैश्विक स्तर पर माल के परिवहन को बाधित कर दिया है, ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान ने राजनयिक वार्ता की मेजबानी की पेशकश की, लेकिन ईरान अपने रुख पर अड़ा रहा और ‘‘पूर्ण विजय प्राप्त होने तक’’ लड़ने की कसम खाई। अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वार्ता (जिसका मंगलवार को होना बेहद अनिश्चित दिखा) को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
इजराइल ने ईरान से आने वाली मिसाइलों की चेतावनी दी
इजराइल रक्षा बलों ने बुधवार को स्थानीय समयानुसार लगभग 2:50 बजे कहा कि कुछ देर पहले, आईडीएफ ने ईरान से इजराइल राज्य की ओर दागी गई मिसाइलों की पहचान की है। उन्होंने कहा कि खतरे को रोकने के लिए रक्षा प्रणालियां सक्रिय हैं। आईडीएफ ने स्थानीय समयानुसार सुबह 3 बजे के कुछ ही समय बाद कहा कि लोगों को आश्रय स्थलों से बाहर निकलने की अनुमति है, लेकिन उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। बुधवार की सुबह स्थानीय समयानुसार, आईडीएफ ने कहा कि वह तेहरान में बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों पर हमले कर रहा है।
इजरायली सरकार ने यरुशलम में स्थायी अमेरिकी दूतावास के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी दे दी
आज इजरायली अधिकारियों ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की मंजूरी की घोषणा की। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्री गिदोन सार और निर्माण एवं आवास मंत्री हैम काट्ज़ के साथ एक संयुक्त बयान में इस खबर की घोषणा की। तीनों नेताओं ने इस मंजूरी को एक "महत्वपूर्ण निर्णय" बताया, जो एक महत्वपूर्ण राजनयिक कदम की पूर्ति करता है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अपने पहले कार्यकाल के दौरान यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने और अमेरिकी दूतावास को वहां स्थानांतरित करने के साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय से शुरू हुआ था।
ट्रंप का 15 सूत्रीय प्लान
वाशिंगटन के बदलते उद्देश्यों को अब भी हासिल करना मुश्किल है खासकर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में। इस बीच, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान सरकार में किसके पास बातचीत करने का अधिकार होगा-या कौन बातचीत करने को तैयार होगा, विशेष रूप से तब, जब इजराइल ने ईरान के कई नेताओं को मारने के बाद उसके अन्य नेताओं को खत्म करना जारी रखने का संकल्प लिया है। ईरान में अमेरिका को लेकर अत्यधिक संशय है, जिसने ट्रंप प्रशासन के तहत दो बार उच्च स्तरीय राजनयिक वार्ता के दौरान हमले किए हैं, जिनमें 28 फरवरी के वे हमले भी शामिल हैं, जिससे मौजूदा युद्ध शुरू हुआ था। गहरे अविश्वास के बीच बातचीत को लेकर मिले-जुले संकेत रहे हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने अमेरिका के साथ बातचीत की खबर को ‘फर्जी खबर’ बताया, वहीं अराघची के कार्यालय ने स्वीकार किया कि विदेश मंत्री ने इस सप्ताह अजरबैजान, मिस्र, ओमान, पाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और तुर्कमेनिस्तान के अपने समकक्षों के साथ युद्ध के बारे में बातचीत की है। बातचीत की चर्चा से तेल की कीमतों में थोड़े समय के लिए गिरावट आई और बाजार में तेजी आई। लेकिन यह राहत अल्पकालिक रही, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत मंगलवार को 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 40 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। ईरान के नेता वाशिंगटन के इरादों को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि तेहरान मौजूदा युद्ध शुरू करने वाले अचानक किये गए हमले से पहले अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा था।
ईरान के लिए आंसू बहा रहे कश्मीरियों के साथ हो गया धोखा!
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