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Chaitra Navratri 2026: मां कालरात्रि कौन हैं? जानें देवी के सातवें स्वरूप की कथा और महत्व

Chaitra Navratri 2026 7th Day: आज यानी 25 मार्च 2026, बुधवार को नवरात्रि का सातवां दिन है. आज के दिन मां के सातवें यानी कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है. मां कालरात्रि अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. साथ ही दुष्टों को और असुरों को मारने वाली हैं. मां स्वशक्ति संधान करने वाली हैं. मां का शरीर घने अंधकार की तरह है. ऐसे में चलिए जानते हैं आखिर कौन हैं मां कालरात्रि और उनके सातवें स्वरूप की कथा के बारे में. 

मां कालरात्रि कौन हैं?

मां कालरात्रि, देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. उनका नाम ही उनके स्वरूप को दर्शाता है. “काल” यानी समय या मृत्यु और “रात्रि” यानी अंधकार. मां कालरात्रि अंधकार और बुराई का नाश करने वाली देवी हैं. उनका रूप बहुत ही भयंकर माना जाता है. उनका शरीर काला है. बाल बिखरे हुए हैं. गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला होती है. उनकी तीन आंखें हैं, जो ब्रह्मांड की हर चीज को देख सकती हैं.

मां कालरात्रि की कथा (Maa Kaalratri Ki Katha) 

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार शुंभ और निशुंभ नाम के दो राक्षसों ने देवताओं को परेशान कर दिया था. उनके अत्याचार बढ़ते जा रहे थे. तब देवी दुर्गा ने उनका अंत करने के लिए अपने सातवें स्वरूप, मां कालरात्रि को प्रकट किया. मां कालरात्रि ने अपने उग्र रूप से राक्षसों का संहार किया. उनके इस रूप से दुष्ट शक्तियां भयभीत हो गईं. अंत में देवी ने सभी राक्षसों का नाश कर दिया और संसार को भय से मुक्त किया.

मां कालरात्रि का स्वरूप और विशेषताएं

मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में भले ही डरावना लगे, लेकिन वह अपने भक्तों के लिए बेहद दयालु हैं. उनका वाहन गधा है. उनके चार हाथ होते हैं. एक हाथ में खड्ग (तलवार) और दूसरे में लोहे का कांटा होता है. बाकी दो हाथ वरदान और अभय मुद्रा में होते हैं. उनके श्वास से अग्नि की ज्वालाएं निकलती हैं. यह स्वरूप हमें यह सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में अच्छाई की जीत होती है.

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. जो लोग किसी डर या परेशानी से जूझ रहे हैं, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए. मान्यता है कि मां कालरात्रि की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. शत्रुओं पर विजय मिलती है. आत्मविश्वास बढ़ता है. घर में सुख-शांति आती है. 

मां कालरात्रि की पूजा विधि

मां कालरात्रि की पूजा सरल तरीके से की जा सकती है. सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें. मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. गुड़ या जगर (गुड़ से बनी मिठाई) का भोग लगाएं. मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें. पूजा के समय मन शांत रखें और पूरी श्रद्धा से मां का ध्यान करें. मां कालरात्रि का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में डर से नहीं, साहस से आगे बढ़ना चाहिए. उनकी पूजा करने से नकारात्मकता खत्म होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. चैत्र नवरात्रि 2026 के इस पावन अवसर पर मां कालरात्रि की आराधना जरूर करें. इससे जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग खुलता है.

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: मां कूष्मांडा कौन हैं? जानें देवी के चौथे स्वरूप की कथा और महत्व

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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25 March 2026 Ka Panchang: यहां जानें आज का पंचांग, तिथि, शुभ मुहूर्त, योग; नक्षत्र और राहुकाल

25 March 2026 Ka Panchang: यहां जानें आज का पंचांग, तिथि, शुभ मुहूर्त, योग; नक्षत्र और राहुकाल25 March 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 25 मार्च 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।

चैत्र नवरात्रि के सप्तमी के दिन देवी के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना करने से जीवन के सभी प्रकार के भय, नकारात्मकता और अज्ञान का नाश होता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और सुरक्षा की कामना करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता पार्वती ने असुर शुंभ और निशुंभ के वध के लिए अपने गौर वर्ण को त्याग दिया था, तब उनका स्वरूप अत्यंत भयावह और तेजस्वी हो गया। इसी स्वरूप को कालरात्रि के नाम से जाना गया। यह रूप न केवल दुष्टों के विनाश का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अंधकार के बाद ही प्रकाश का उदय होता है।

आज का पंचांग
इस दिन का पंचांग भी विशेष योगों से युक्त है, जो इसे और अधिक शुभ बनाता है। 25 मार्च को सप्तमी तिथि दोपहर 01:50 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। मृगशिरा नक्षत्र शाम 05:33 बजे तक रहेगा, फिर आर्द्रा नक्षत्र शुरू होगा। साथ ही सौभाग्य योग का संयोग भी बना रहेगा, जो 26 मार्च की तड़के 03:09 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह योग शुभ कार्यों और नई शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय सुबह 06:20 बजे और सूर्यास्त शाम 06:35 बजे होगा। वहीं चंद्रमा का उदय सुबह 10:53 बजे और अस्त अगले दिन यानी 26 मार्च को तड़के 01:35 बजे होगा। दिनभर में कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं, जिनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:45 से 05:33 बजे तक रहेगा। यह समय ध्यान, साधना और पूजा के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त
सुबह शुभ मूहूर्त का समय 05:09 से 06:20 बजे तक रहेगा। दोपहर में अभिजित मुहूर्त नहीं है, लेकिन विजय मुहूर्त 02:30 से 03:19 बजे तक रहेगा, जो महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है। शाम को गोधूलि मुहूर्त 06:34 से 06:57 बजे तक और सायाह्न संध्या 06:35 से 07:45 बजे तक रहेगी। इसके अलावा अमृत काल सुबह 09:19 से 10:48 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। रात्रि में निशिता मुहूर्त 26 मार्च को 12:03 AM से 12:50 AM तक रहेगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:20 से शाम 05:33 बजे तक रहेगा, जो सभी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

आज का राहुकाल
राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। 25 मार्च को अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय इस प्रकार रहेगा:
दिल्ली में दोपहर 12:27 से 01:59 तक, मुंबई में 12:45 से 02:16 तक, चंडीगढ़ में 12:29 से 02:01 तक, लखनऊ में 12:13 से 01:44 तक, भोपाल में 12:26 से 01:58 तक, कोलकाता में 11:43 से 01:14 तक, अहमदाबाद में 12:46 से 02:17 तक और चेन्नई में 12:15 से 01:46 तक।

इस प्रकार 25 मार्च 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मां कालरात्रि की पूजा, शुभ योगों का संयोग और साधना के लिए अनुकूल समय इसे खास बनाते हैं। श्रद्धालु इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार कर सकते हैं।

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