स्मार्ट हेलमेट खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये बातें, नहीं तो लग सकता है जुर्माना और हो सकता है नुकसान!
Smart Helmet Buying Guide: आज के समय में स्मार्ट हेलमेट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. ये हेलमेट सिर्फ सिर की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि कई एडवांस फीचर्स के साथ आते हैं. इनमें फोन कॉल करने, गाने सुनने, GPS इस्तेमाल करने और रास्ते की वीडियो रिकॉर्डिंग करने जैसी सुविधाएं मिलती हैं. हालांकि, सिर्फ फीचर्स देखकर हेलमेट खरीद लेना सही फैसला नहीं होता. अगर आपने सही जानकारी के बिना हेलमेट खरीदा, तो यह आपकी सुरक्षा के लिए खतरा भी बन सकता है और ट्रैफिक पुलिस का जुर्माना भी झेलना पड़ सकता है.
सुरक्षा सर्टिफिकेट का रखना होगा ध्यान
सबसे पहले, किसी भी स्मार्ट हेलमेट को खरीदते समय उसके सुरक्षा सर्टिफिकेट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. हेलमेट पर ISI, DOT या ECE जैसे प्रमाण जरूर होने चाहिए. ये सर्टिफिकेट बताते हैं कि हेलमेट सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है. अगर हेलमेट में ये प्रमाण नहीं हैं, तो वह दुर्घटना के समय पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाएगा.
वजन भी कर लें चेक
स्मार्ट हेलमेट में इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी लगी होती है, इसलिए ये सामान्य हेलमेट की तुलना में थोड़ा भारी होते हैं. लेकिन बहुत ज्यादा भारी हेलमेट पहनने से गर्दन में दर्द हो सकता है, खासकर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान. इसलिए कोशिश करें कि हेलमेट का वजन 1.2 से 1.6 किलोग्राम के बीच हो, ताकि सुरक्षा और आराम दोनों बना रहे.
कैमरे वाले स्मार्ट हेलमेट में क्या देखें?
अगर आप कैमरा वाला स्मार्ट हेलमेट लेना चाहते हैं, तो उसकी कैमरा क्वालिटी जरूर जांचें. बेहतर होगा कि हेलमेट कम से कम 1080p या 4K वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट करता हो. साथ ही, उसमें इमेज स्टेबलाइजेशन (EIS) फीचर होना चाहिए, जिससे खराब रास्तों पर भी वीडियो साफ और स्थिर रिकॉर्ड हो सके. स्टोरेज की बात करें तो यह देखना जरूरी है कि हेलमेट कितनी क्षमता का SD कार्ड सपोर्ट करता है और उसमें लूप रिकॉर्डिंग जैसी सुविधा है या नहीं.
ये फीचर वाला हेलमेट भी रहेगा बेहतर
आजकल स्मार्ट हेलमेट में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी भी एक जरूरी फीचर बन गया है. बेहतर कनेक्शन के लिए Bluetooth 5.3 या उससे ऊपर का वर्जन होना चाहिए. इसके अलावा, नॉइज कैंसिलेशन फीचर भी बहुत जरूरी है, जिससे तेज हवा और ट्रैफिक के शोर के बीच भी आपकी आवाज साफ सुनाई दे. अगर आप दोस्तों के साथ ग्रुप राइड करते हैं, तो मेश इंटरकॉम फीचर वाला हेलमेट आपके लिए बेहतर रहेगा. इससे आप बिना फोन मिलाए सीधे अपने साथियों से बात कर सकते हैं.
बैटरी बैकअप भी सबसे जरूरी
बैटरी बैकअप भी एक महत्वपूर्ण पहलू है. स्मार्ट हेलमेट में मौजूद सभी फीचर्स बैटरी पर निर्भर करते हैं, इसलिए ऐसा हेलमेट चुनें जो कम से कम 8 से 10 घंटे का बैकअप दे. साथ ही, हेलमेट की वाटरप्रूफ रेटिंग भी जांचना जरूरी है. IP67 या IP68 रेटिंग वाले हेलमेट बारिश और धूल से सुरक्षित रहते हैं और लंबे समय तक सही तरीके से काम करते हैं.
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ये बातें भी हैं काम की
अंत में, यह समझना जरूरी है कि स्मार्ट फीचर्स आपकी सुविधा के लिए हैं, लेकिन राइडिंग के दौरान आपकी एकाग्रता सड़क पर ही होनी चाहिए. ऐसे हेलमेट चुनें जिनके बटन आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें, खासकर जब आप दस्ताने पहने हों. वॉयस कमांड फीचर भी काफी मददगार साबित हो सकता है. कुल मिलाकर, स्मार्ट हेलमेट एक अच्छा निवेश है, लेकिन इसे सोच-समझकर खरीदना जरूरी है. सही हेलमेट आपकी सुरक्षा के साथ-साथ आपके सफर को और भी बेहतर और यादगार बना सकता है.
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होर्मुज को पार कर भारत की ओर रवाना हुए 92,600 टन एलपीजी ला रहे दो जहाज: सरकार
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने मंगलवार को बताया कि एलपीजी से भरे दो जहाज - पाइन गैस और जग वसंत - सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारत की ओर आ रहे हैं।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पाइन गैस जहाज 27 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पहुंचेगा, जिसमें 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी है।
जबकि, जग वसंत जहाज 26 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचेगा, जिसमें 47,600 मीट्रिक टन एलपीजी लोड है। इसके अलावा, 20 भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं।
इससे पहले, जहाज ट्रैकिंग डेटा में दिखाया गया था कि दोनों जहाजों को सुरक्षित रास्ते की मंजूरी मिलने के बाद वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में आमतौर पर करीब 14 घंटे का समय लगता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे यह अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है।
जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की थी, जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवैस से अपना कार्गो लिया था। तनाव के कारण ये जहाज पहले फंसे हुए थे, लेकिन अब इन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है।
इस महीने की शुरुआत में भी दो अन्य भारतीय जहाज इसी रास्ते से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सरकार वैश्विक तेल संकट से देश के लोगों को बचाने के लिए कई कदम उठा रही है और ऊर्जा सप्लाई के अंतरराष्ट्रीय रास्तों को सुचारू रखने की कोशिश कर रही है।
राज्यसभा में पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए उन्होंने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया, खासकर ईंधन परिवहन और समुद्री मार्गों में।
उन्होंने कहा कि देश और देशवासियों को वैश्विक झटकों से बचाने का एकमात्र उपाय आत्मनिर्भरता है। वर्तमान में भारत का करीब 90 प्रतिशत व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है, जिससे हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध के समय स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार मेक इन इंडिया के तहत करीब 70,000 करोड़ रुपए की लागत से भारतीय जहाजों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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