स्क्वैट्स : कम समय में पाएं ज्यादा लाभ, घुटनों और हिप्स के लिए बेस्ट
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। स्क्वैट्स एक ऐसा व्यायाम है, जिसे कोई भी आसानी से घर पर कर सकता है और इसके फायदे कमाल के हैं। यह व्यायाम केवल फिटनेस के लिए ही नहीं, बल्कि जोड़ की सेहत और लचीलापन बढ़ाने के लिए भी बहुत जरूरी है।
अगर आप अपने घुटनों और कूल्हों को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो रोजाना कुछ मिनट स्क्वैट्स करने से बहुत फर्क पड़ सकता है। जब हम स्क्वैट्स करते हैं, तो हमारी जांघों की मांसपेशियां, कूल्हे और घुटने सक्रिय हो जाते हैं। इससे इन हिस्सों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और जोड़ मजबूत बनते हैं। साथ ही, यह आपके शरीर की स्थिरता और संतुलन को भी बढ़ाता है। इससे रोजमर्रा के काम, जैसे कि चलना, सीढ़ियां चढ़ना या बैठना और उठना, आसान हो जाते हैं।
स्क्वैट्स करने का तरीका भी बहुत आसान है। सीधे खड़े हो जाएं, पैरों को कंधे की चौड़ाई जितना फैलाएं और धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए नीचे बैठें जैसे आप कुर्सी पर बैठ रहे हों। कुछ सेकेंड्स होल्ड करें। फिर धीरे-धीरे वापस ऊपर उठें। इसे 10-15 बार करें और धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाते जाएं। अगर आप रोजाना 5-10 मिनट इसे करें, तो कुछ ही हफ्तों में फर्क महसूस होगा।
स्क्वैट्स के फायदे सिर्फ घुटनों और कूल्हों तक ही सीमित नहीं हैं। यह आपकी जांघों की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है, पेट और कमर को टोन करता है और कैलोरी बर्न करने में मदद करता है। इस वजह से वजन कंट्रोल में भी मदद मिलती है। स्क्वैट्स करने से आपके शरीर का लचीलापन बढ़ता है, जिससे रोजमर्रा के काम करते समय चोट लगने का खतरा कम होता है।
रोजाना थोड़ी सी मेहनत से स्क्वैट्स को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इसे टीवी देखते हुए, सुबह उठते ही या योगा के बाद किया जा सकता है। यह व्यायाम किसी भी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है और इसे घर पर बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है।
लेकिन ध्यान रहे, अगर आपको आर्थराइटिस जैसी समस्या है या घुटनों में तेज दर्द है, तो स्क्वैट्स करते समय सावधानी बरतें और पहले डॉक्टर से सलाह लें। दर्द या चोट होने पर इसे तुरंत बंद कर दें। इसके अलावा, हमेशा सही मुद्रा में व्यायाम करें। गलत तरीके से करने पर घुटनों पर दबाव पड़ सकता है और चोट लग सकती है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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सीएम धामी ने 1100 कन्याओं का किया पूजन, बोले- 'बेटियां हैं हमारी संस्कृति की असली वाहक'
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून के प्रेमनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर परिसर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया. मुख्यमंत्री ने सामूहिक कन्या पूजन के अवसर पर 1100 कन्याओं का पूजन कर उनसे आशीर्वाद लिया. इस मौके पर उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं दीं. सीएम धामी ने अपने संबोधन में कहा कि चैत्र नवरात्र केवल आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों के जरिए शक्ति की उपासना का एक महापर्व है. उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में कन्या पूजन के आयोजन को सौभाग्यपूर्ण बताते हुए आयोजन समिति की जमकर तारीफ की.
समाज में नारी सम्मान को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में नारी सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने का काम करते हैं. इससे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे जीवन मूल्यों को मजबूती मिलती है. उन्होंने भारतीय संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे यहां कन्या को साक्षात देवी का स्वरूप माना गया है. शास्त्रों में भी कन्याओं को बहुत सम्मानजनक स्थान दिया गया है. बेटियां अपने संस्कार, स्नेह और त्याग से न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को सशक्त और समृद्ध बनाती हैं. वे हमारी महान संस्कृति और परंपराओं की सबसे मजबूत वाहक हैं. उन्होंने जनता से आह्वान किया कि हर बेटी को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान दिलाने का संकल्प लेना चाहिए.
बेटियों के लिए सरकार चला रही कई योजनाएं
सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि सरकार ने बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति, कक्षा 9 में एडमिशन लेने पर साइकिल वितरण और 12वीं पास करने पर प्रोत्साहन राशि जैसी कई व्यवस्थाएं लागू की हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 परसेंट क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि हर बेटी अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़े और प्रदेश का नाम रोशन करे.
शादी और शिक्षा के लिए मिल रही आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिकों की बेटियों के सामूहिक विवाह के लिए 61 हजार रुपये की मदद दी जा रही है. वहीं, व्यक्तिगत तौर पर शादी करने पर 55 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी शादी सहायता के तौर पर 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है. सीएम ने नंदा गौरा योजना, गौरा देवी कन्याधन योजना और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक हर स्तर पर राज्य सरकार उसके साथ खड़ी है.
सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है नवरात्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्र के नौ दिन सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहने चाहिए. यह समय आत्मशुद्धि, सेवा और विनम्रता के साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का है. कन्या पूजन हमारी परंपरा के साथ-साथ करुणा और विनम्रता का प्रतीक है. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे हर बेटी की प्रगति के लिए काम करें, तभी कन्या पूजन का वास्तविक अर्थ सार्थक होगा. इस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेमनगर स्थित गुरुद्वारा में जाकर माथा टेका और प्रदेश की खुशहाली की दुआ मांगी. इस मौके पर विधायक सविता कपूर और भाजपा के कई बड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे.
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