Swami Ramdev Health Tips: बालों से लेकर स्किन तक की समस्या दूर करेगा ये आसन, स्वामी रामदेव ने बताए इसके फायदे
Swami Ramdev Health Tips: योग की दुनिया में शीर्षासन को आसनों का राजा कहा जाता है क्योंकि इसका नियमित अभ्यास आपको सिर से लेकर पैर तक फायदा पहुंचाता है. इस आसन को करते समय सिर नीचे और पैर ऊपर की तरफ होता है. जिससे ब्लड का सर्कुलेशन पैर से सिर की ओर होता है जिस वजह से पैर, पेट, बाल और स्किन से जुड़ी कई समस्याएं दूर होती हैं. इतना ही नहीं सिर की तरफ खून के बेहतर प्रवाह से सिरदर्द और तनाव के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है. हाल ही में स्वामी रामदेव ने अपने फेसबुक लाइव के जरिए शीर्षासन के फायदों के बारे में विस्तार से बताया है. चलिए जानते हैं इसके बारे में.
यहां देखें लाइव वीडियो
कैसे फायदेमंद है शीर्षासन?
स्वामी रामदेव ने अपने फेसबुक लाइव के जरिए बताया कि योग में शीर्षासन को सबसे महत्वपूर्ण आसनों में गिना जाता है. इसे “आसनों का राजा” भी कहा जाता है. इस आसन में शरीर उल्टा रहता है और सिर जमीन पर टिकता है. इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है. खासकर दिमाग, स्किन और बालों को इसका सीधा लाभ मिलता है.
स्वामी रामदेव से जानें शीर्षासन के फायदे
बालों की समस्या में राहत
आजकल बाल झड़ना, डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होना आम हो गया है. स्वामी रामदेव वीडियो के जरिए बताते हैं कि शीर्षासन करने से सिर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. इससे बालों की जड़ों को पोषण मिलता है. नियमित अभ्यास से बाल मजबूत बनते हैं और झड़ना कम होता है.
त्वचा को बनाता है ग्लोइंग
अगर आपकी त्वचा बेजान दिखती है तो शीर्षासन मदद कर सकता है. इस आसन से चेहरे पर खून का प्रवाह बढ़ता है. इससे स्किन में नैचुरल ग्लो आता है. साथ ही झुर्रियां और पिंपल्स की समस्या भी धीरे-धीरे कम हो सकती है.
दिमाग को करता है शांत
तेज भागती जिंदगी में तनाव आम हो गया है. शीर्षासन करने से दिमाग को शांति मिलती है. यह आसन मानसिक तनाव को कम करता है. इससे फोकस और एकाग्रता भी बेहतर होती है.
पाचन तंत्र को करता है मजबूत
यह आसन पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है. शरीर के अंदरूनी अंग सक्रिय होते हैं. इससे गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है.
हार्मोन बैलेंस में सहायक
शीर्षासन करने से शरीर के हार्मोन संतुलित रहते हैं. यह खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है. इससे शरीर की कई आंतरिक समस्याएं दूर हो सकती हैं.
इन बातों का रखें ध्यान
स्वामी रामदेव कहते हैं कि शुरुआत में इसे किसी विशेषज्ञ की निगरानी में करें खाली पेट ही अभ्यास करें गर्दन या पीठ की समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें.
दीवार के सहारे शुरुआत करना बेहतर है. स्वामी रामदेव के अनुसार, शीर्षासन एक ऐसा योगासन है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. बाल, त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह बेहद फायदेमंद है. लेकिन इसे सही तरीके से करना जरूरी है. धीरे-धीरे अभ्यास करें और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
वर्क प्रेशर और बढ़ते स्क्रीन टाइम से हैं परेशान? महामुद्रा के अभ्यास से शरीर को करें रिचार्ज
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता वर्क लोड, लंबे समय तक स्क्रीन पर काम और अनियमित दिनचर्या के कारण मानसिक तनाव और शारीरिक थकान आम हो गई है। ऐसे में प्राचीन योग तकनीक महामुद्रा एक असरदार अभ्यास के रूप में सामने आती है, जो शरीर को मजबूती देने के साथ-साथ स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
योग ग्रंथों में महामुद्रा को अमृत का सोपान कहा गया है, जिसका अर्थ है कि यह अभ्यास शरीर के विषैले तत्वों को निकालकर नई ऊर्जा से भर देता है। महामुद्रा एक संस्कृत शब्द से बना है। महा का अर्थ है महान और मुद्रा का अर्थ है वह स्थिति जो आनंद दे।
आयुष मंत्रालय और योगिक परंपराओं के अनुसार, महामुद्रा एक उन्नत हठयोग अभ्यास है, जो मानसिक शांति, शारीरिक ऊर्जा के संतुलन और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। यह तनाव कम करने, रक्त परिसंचरण में सुधार में सहायक मानी जाती है।
यह मुद्रा स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करती है, जिससे शरीर और मन की थकान दूर होती है। इसके अभ्यास से अपान वायु (पांच मुख्य प्राणों में से एक है, जो नाभि के नीचे पेल्विक क्षेत्र में स्थित होती है) नियंत्रित रहती है, जो शरीर में सुप्त कुंडलिनी को जागृत करने में मदद करती है।
इसे करना बेहद आसान है, हालांकि शुरुआती साधक के लिए थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन नियमित करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में आराम से बैठ जाएं। अब दोनों पैर आगे की ओर फैलाएं। दाएं को मोड़कर एड़ी को पेरिनियम (गुदा और जननेंद्रिय के बीच) के पास रखें। बाएं पैर को सीधा रखें। गहरी सांस लें और सांस रोककर (कुंभक) आगे झुकें।
दोनों हाथों से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें। सिर को घुटने की ओर लाएं। मूलबंध (पेल्विक फ्लोर को सिकोड़ना) और जालंधर बंध (ठोड़ी को छाती से लगाना) लगाएं। कुछ सेकंड रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य हो जाएं। दूसरे पैर से भी दोहराएं। शुरुआत में 3-5 बार करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं।
पीठ या रीढ़ की समस्या हो तो इस आसन को करने से पहले डॉक्टर या योग गुरु की सलाह लें। गर्भवती महिलाएं और उच्च रक्तचाप वाले लोग बिना विशेषज्ञ के परामर्श के न करें।
--आईएएनएस
एनएस/वीसी
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