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गोल्ड-सिल्वर मार्च में 20% तक टूटे: बीते 45 साल में सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Silver-Gold Crash: मार्च 2026 में सोना और चांदी के दामों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। दोनों की कीमतों में 20% से ज्यादा की गिरावट के साथ ये धातुएं अब 'बेयर मार्केट' में पहुंच गई। यह गिरावट पिछले 45 साल में सबसे बड़ी मानी जा रही और 1980 के बाद पहली बार इतना तेज क्रैश देखने को मिला।
आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने सोना 20% से ज्यादा गिर चुका जबकि चांदी में करीब 33% की गिरावट आई। अपने हालिया उच्च स्तर से देखें तो सोना करीब 24% और चांदी 41% तक टूट चुकी है। आमतौर पर जब किसी एसेट में कम समय में 20% से ज्यादा गिरावट आती है, तो उसे बेयर मार्केट माना जाता है।
क्यों गिर रही गोल्ड-सिल्वर की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना-चांदी निवेश के लिए अन्य एसेट्स से मुकाबला करते हैं। इस समय ग्लोबल बॉन्ड मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन गया है। कारण है बढ़ती ब्याज दरें और बेहतर रिटर्न। सोना ब्याज नहीं देता जबकि बॉन्ड्स पर रिटर्न मिलता है, इसलिए निवेशक वहां शिफ्ट हो रहे हैं।
सरकारी बॉन्ड यील्ड्स में अच्छा रिटर्न मिल रहा
दुनियाभर में सरकारी बॉन्ड यील्ड्स तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और भारत जैसे देशों में 10 साल के बॉन्ड यील्ड्स ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और सेंट्रल बैंकों की सख्त नीति है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर जेरोम पॉवेल ने भी साफ किया है कि महंगाई पर काबू पाने तक ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है।
डबल दबाव में सोना
एक तरफ ब्याज दरें बढ़ रही हैं, दूसरी तरफ तेल और गैस की कीमतों में उछाल ने महंगाई को और बढ़ा दिया। इससे सेंट्रल बैंकों के लिए दरें कम करना मुश्किल हो गया है। इस दोहरे दबाव के कारण सोने की मांग कमजोर पड़ी है।
शेयर बाजार में बिकवाली से भी गोल्ड पर दबाव
इसके अलावा बाजार में बिकवाली का दबाव भी बड़ा कारण। शेयर बाजार में गिरावट के चलते कई निवेशकों को मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उन्होंने सोना-चांदी बेचकर कैश जुटाया। इससे कीमतों में गिरावट और तेज हो गई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल बैंक भी अब सोना खरीदने के बजाय तेल खरीद पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे मांग और कमजोर हुई है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
तकनीकी तौर पर सोने के लिए 4100 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह टूटता है, तो कीमतें 3800 डॉलर तक जा सकती।हालांकि मौजूदा स्तर पर बाजार 'ओवरसोल्ड' है, जिससे अल्पकालिक उछाल की संभावना भी बनी हुई है। चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही है और इसके लिए 57 डॉलर और 54 डॉलर के स्तर अहम सपोर्ट माने जा रहे हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को घबराकर बिक्री नहीं करनी चाहिए। यह गिरावट एक सुधार हो सकती है, न कि लंबी मंदी की शुरुआत। लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, सोना-चांदी बाजार फिलहाल भारी दबाव में है, लेकिन लंबी अवधि में इनकी भूमिका सुरक्षित निवेश के तौर पर बनी रह सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
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