पाकिस्तान: केपी में अफगान शरणार्थियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज करने की तैयारी में सरकार
इस्लामाबाद, 24 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अफगान शरणार्थियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की आशंका है। भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को बताया कि ईद की छुट्टियों की वजह से इस पर विराम लगा था अब बगैर दस्तावेज रह रहे अफगानियों पर एक्शन लिया जाएगा।
इस्लामाबाद, 24 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अफगान शरणार्थियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की आशंका है। भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को बताया कि ईद की छुट्टियों की वजह से इस पर विराम लगा था; अब बगैर दस्तावेज रह रहे अफगानियों पर एक्शन लिया जाएगा।
अधिकारियों ने ईद के समय गिरफ्तारी पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी ताकि परिवार शांति से त्योहार मना सकें। पाकिस्तान के जाने-माने अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद का जश्न खत्म होते ही, कानून का शिकंजा अफगान नागरिकों पर कसने की तैयारी कर ली गई है।
ईद की छुट्टियों के दौरान नौ अफगान शरणार्थी कैंप बंद करने की प्रक्रिया रोक दी गई थी, जो ब्रेक खत्म होने के तुरंत बाद शुरू की जा रही है।
सिटीजन कार्ड वाले अफगान शरणार्थियों का भविष्य तय करने के लिए नीति आधारित उपाय किए गए हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पेशावर में शरणार्थी डेटा को अपडेट करने के लिए एक नए सर्वे का सुझाव दिया गया है। खास तौर पर वो शरणार्थी जिनके पास अपना व्यवसाय है, जिन्होंने गैर-कानूनी तरीके से पाकिस्तानी डॉक्यूमेंट हासिल किए हैं, पाकिस्तानी पुरुषों से शादी करने वाली अफगान महिलाओं और दूसरे मिक्स्ड-स्टेटस वाले मामलों पर ध्यान दिया जाएगा।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि 15 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस ने छापेमारी के दौरान 300 से ज्यादा गैर-कानूनी अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लिया।
डेली डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के गैर-कानूनी तरीके से रह रहे अफगानों को डिपोर्ट करने के फैसले के बाद कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को अपने पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में सभी गैर-कानूनी अफगानों का डेटा रखने का आदेश दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, 15 मार्च को टोपी, रजार, छोटा लाहौर तहसील और स्वाबी के दूसरे हिस्सों में की गई छापेमारी के दौरान 341 अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि छापेमारी जारी रहेगी और स्वाबी में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे सभी अफगान शरणार्थियों को हिरासत में लेकर अफगानिस्तान डिपोर्ट कर दिया जाएगा।
लगभग 30,000 अफगान शरणार्थी अभी भी स्वाबी के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर के पास सही डॉक्यूमेंट हैं, जबकि बाकी गैर-कानूनी तरीके से रह रहे हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से पता चला है कि ये अफगान शरणार्थी गंडाफ रिफ्यूजी कैंप और गोहाटी रिफ्यूजी कैंप में रह रहे थे, और उनमें से बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग खेतों और शहरों में रह रहे थे।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेंगे 3 लाख करोड़ के ओएंडएम अवसर: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस (ओएंडएम) से जुड़े करीब 3 लाख करोड़ रुपए के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब यह योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पानी की सप्लाई को लंबे समय तक सही तरीके से चलाने और बनाए रखने पर फोकस करेगी।
आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। साथ ही, अब इसे सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) सेक्टर को फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ने और बजट बढ़ने से कंपनियों को भुगतान मिलने में सुधार होगा। फिलहाल कई राज्यों में भुगतान में 6 महीने से ज्यादा की देरी हो रही है, लेकिन सितंबर 2026 तक इसे घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य है।
सरकार ने 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन पहुंचाने की समयसीमा 2024 से बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली बड़ी और संगठित कंपनियों को इसका खास फायदा मिलेगा, क्योंकि अब गुणवत्ता, निरंतर सप्लाई और ऊर्जा दक्षता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक और सर्विस नेटवर्क है, उन्हें इस बदलाव का ज्यादा लाभ मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2025-26 के बाद बजट और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह साफ होता है कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं और अब सरकार टिकाऊ और बेहतर सेवा देने पर ज्यादा जोर दे रही है।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पानी पहुंचाना है।
इस योजना के तहत अब तक नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या लगभग 5 गुना बढ़कर 323.6 लाख से 1,582.3 लाख हो गई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है।
हालांकि, इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता और सप्लाई में कमी देखने को मिली, जिसके चलते अब सरकार ने इसे बेहतर सेवा देने वाले मॉडल में बदलने का फैसला किया है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अब पानी की नियमित सप्लाई, गुणवत्ता की निगरानी और डिजिटल सिस्टम (जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म) के जरिए निगरानी पर खास जोर दिया जाएगा।
साथ ही, इस योजना में ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति को एक स्थायी सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके, न कि केवल एक बार बनने वाला प्रोजेक्ट।
--आईएएनएस
डीबीपी
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