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एक्ट्रेस मीनाक्षी थापा की किडनैपिंग हुई:15 लाख मांगे, अश्लील वीडियो बनाने की धमकी दी, फिर दोस्त बोले- हमने गला काटकर मार डाला

बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के 10वें और आखिरी केस में जानिए एक्ट्रेस मीनाक्षी थापा हत्याकांड की निर्मम कहानी। साल 2012 में मीनाक्षी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में काम कर रही थीं। फिल्म की लीड एक्ट्रेस करीना कपूर थीं। तभी अचानक उनकी किडनैपिंग हुई। एक्ट्रेस की तलाश पुलिस को इलाहाबाद तक ले पहुंची, जहां एक्ट्रेस नहीं बल्कि उनका सड़ता हुआ कंकाल मिला और सिर कहां गया, ये आज भी सामने नहीं आ सका। मार्च 2012 की बात है, देहरादून की रहनेवालीं मीनाक्षी थापा हीरोइन बनने का सपने लिए सपनों की नगरीं मुंबई पहुंचीं। शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें पहले छोटे-मोटे एड में काम मिला और फिर बॉलीवुड फिल्मों में बतौर साइड एक्ट्रेस या जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम मिलने लगा। 2011 में उन्हें टिस्का चोपड़ा, सतीश कौशिक, निशिकांत कामत स्टारर फिल्म 404 में काम मिला। मीनाक्षी इंडस्ट्री में अच्छी पकड़ बनाने लगी थीं। उनका सालों पुराना ख्वाब धीरे-धीरे ही सही लेकिन पूरा हो रहा था। फिल्म पकाई में छोटा सा रोल करने के बाद उन्हें मधुर भंडारकर स्टारर फिल्म हीरोइन में एक छोटा सा रोल मिला। ये फिल्म पहले ही चर्चा में थी। पहले इसमें ऐश्वर्या राय लीड रोल निभाने वाली थीं। कांस फिल्म फेस्विटल में मधुर भंडारकर ने इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन प्रेग्नेंट होने के बाद ऐश्वर्या ने फिल्म छोड़ दी। कास्टिंग में बदलाव से फिल्म की शूटिंग टालनी पड़ी और फिर करीना कपूर को साइन किया गया। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। मीनाक्षी रोज काम पर निकलने से पहले मां से बात करती थीं। मीनाक्षी की मां कमला थापा, देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। उनका एक भाई नवराज आर्मी में था और उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। छोटे भाई का नाम विक्की था। एक बड़ी बहन हेमू भी थी, जिसकी शादी अजय थापा से हो चुकी थी। 14 मार्च 2012 तक सब ठीक था। 15 मार्च को मीनाक्षी ने मां को कॉल नहीं किया। कुछ देर बाद जब मां ने उन्हें कॉल किया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। मां को लगा कि वो व्यस्त होंगी, तो उन्होंने भी ये बात नजरअंदाज कर दी। 16 मार्च की तारीख लग गई, लेकिन मीनाक्षी का कॉल अब भी नहीं आया। कॉल करने पर अब भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। अब मां की घबराहट बढ़ने लगी। उन्होंने तुरंत बेटे नवराज को इसकी जानकारी दी। भाई ने भी मीनाक्षी से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। घर वाले परेशान थे कि 17 मार्च की दोपहर को मां के मोबाइल नंबर पर मीनाक्षी के नंबर से एक मैसेज आया। उसमें लिखा था- अपनी बेटी को जिंदा देखना है तो 15 लाख रुपए देने पड़ेंगे। कुछ देर बार एक और मैसेज मिला- अगर इस बात की खबर पुलिस को दी तो तुम्हारी बेटी की अश्लील फिल्में बनाकर इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी और पूरे देहरादून में भी सर्कुलेट की जाएंगी। कुछ देर बाद ही उसी मोबाइल नंबर से मीनाक्षी का अकाउंट नंबर भी आया, किडनैपर्स ने उसी अकाउंट में पैसे डालने को कहा था। मीनाक्षी, देहरादून के एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती थीं। घर में इतनी कमाई नहीं थी कि वो 15 लाख जितनी बड़ी रकम दे सकें। मीनाक्षी के भाई के पास 60 हजार ही थे, उन्होंने पहले 30 हजार रुपए दिए हुए अकाउंट नंबर पर भेजे और फिर शाम तक 30 हजार और ट्रांसफर कर दिए। पैसे दिए जाने के बाद उस नंबर से लगातार चेतावनी दी जाने लगी कि 15 लाख रुपए मिलने के बाद ही वो मीनाक्षी को छोड़ेंगे। अगर रकम नहीं दी, तो अंजाम बुरा होगा। भाई और मां किसी भी हालत में मीनाक्षी को सुरक्षित देखना चाहते थे। लगातार आ रहीं चेतावनी को देखते हुए उन्होंने फैसला किया कि वो अपना घर बेचकर फिरौती की रकम चुका देंगे। उससे पहले भाई नवराज ने किडनैपर्स को मैसेज किया कि वो रकम दे देंगे, लेकिन उससे पहले वो मीनाक्षी से बात करना चाहते हैं। इस पर किडनैपर्स ने रिस्पॉन्स देना बंद कर दिया। भाई नवराज को शक हुआ, उन्होंने बहन के नंबर पर कई कॉल किए, लेकिन रिस्पॉन्स तब भी नहीं मिला। नवराज की चिंता और बढ़ने लगी। वो छुट्टी लेकर सीधे मुंबई पहुंचे। उन्होंने अंबोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। लेकिन पुलिस ने केस को सीरियसली नहीं लिया। मीनाक्षी के परिवार ने बाल ठाकरे से मांगी मदद जांच में तेजी लाने के लिए मीनाक्षी के भाई नवराज, बाल ठाकरे से मदद मांगने उनके दफ्तर पहुंचे। उनकी बाल ठाकरे से तो मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन ऑफिस पर्सन ने उन्हें कमिश्नर के पास भेजा। कमिश्नर अरुप पटनायक को पूरी कहानी सुनाई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस सीबीआई को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने मीनाक्षी के करीबी दोस्त आलोक शर्मा से पूछताछ की। आलोक ने उन्हें बताया कि 13 मार्च को ही मीनाक्षी से मिले थे। मीनाक्षी को किसी फिल्म की शूटिंग के लिए शहर से बाहर जाना था। उनके कहने पर आलोक उन्हें मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक ड्रॉप करने गए थे। मीनाक्षी स्टेशन में दो दोस्तों से मिलीं और उनके साथ रवाना हो गईं। वो दो लोग कौन थे और वो सभी कहां जा रहे थे, इसकी आलोक को कोई जानकारी नहीं थी। आलोक के अलावा क्राइम ब्रांच ने मीनाक्षी के सभी दोस्तों और उनके लोखंडवाला के सुरेश नगर स्थित घर के पड़ोसियों से भी पूछताछ की। मीनाक्षी के साथ दो और दोस्त थे लापता जांच के अनुसार, आलोक ने जिन दो दोस्तों के साथ मीनाक्षी को स्टेशन में देखा था, वो अमित कुमार जयसवाल (36 साल) और प्रीति एल्विन सुरीन (26 साल) थीं। मीनाक्षी दो दोस्तों अमित कुमार जयसवाल और प्रीति सुरीन से बेहद करीब थीं। अमित और प्रीति भी स्ट्रगलिंग एक्टर्स थे। वो दोनों भी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम कर रहे थे। सेट पर तीनों साथ समय बिताते थे। जांच में ये भी सामने आया कि सिर्फ मीनाक्षी ही नहीं बल्कि प्रीति और अमित भी कुछ दिनों से शूटिंग में नहीं आए हैं। पुलिस ने दोनों के लोकल पते पर भी जांच की, लेकिन वो वहां भी नहीं थे। उनके नंबर पर कॉल किया गया, तो दोनों के ही मीनाक्षी की तरह नंबर बंद थे। मुंबई में जब तीनों की कोई खबर नहीं मिली तो पुलिस ने आसपास के राज्यों में भी अपना खबरी नेटवर्क एक्टिव कर दिया। जांच के अनुसार, अमित कुमार जयसवाल इलाहाबाद (प्रयागराज) के फाफामाऊ और प्रीति सुरीन दरभंगा कॉलोनी में रहती थीं। 30 मार्च को मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम मीनाक्षी के भाई नवराज के साथ इलाहाबाद पहुंची। इस केस में फाफामाऊ पुलिस की भी मदद ली गई। जांच टीम अमित जयसवाल के पते पर भी पहुंची। वहां उन्हें पता चला कि अमित के पिता सुरेंद्र जयसवाल हाईकोर्ट के वकील हैं। अमित भी वकालत करता था, लेकिन उसे इमें रुचि नहीं थी। उसने मम्फोर्डगंज में एक कोचिंग सेंटर खोला। उसकी शादी इलाहाबाद में ही प्रीति नाम की लड़की से हुई थी, जिससे उसे 2 बच्चे भी थे। उसे जिम का शौक था और वो खुद को काफी मैंटेन रखता था। लुक्स के चलते उसे भोजपुरी फिल्मों में काम मिलने लगा था। प्रीति सुरीन भी अमित के कोचिंग सेंटर में पढ़ाने आती थीं। साथ काम करते हुए अमित और प्रीति सुरीन की दोस्ती बढ़ने लगी और फिर दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। जब इस अफेयर की भनक उसकी पत्नी को लगी, तो काफी झगड़े हुए। प्रीति सुरीन तब दरभंगा के एक किराए के कमरे में रहती थीं। अमित ज्यादातर समय वहीं बिताता था। घरवालों ने अमित से अफेयर खत्म करने को भी कहा, लेकिन वो प्रीति सुरीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। यही वजह रही कि उनकी पत्नी प्रीति जयसवाल बच्चों के साथ घर छोड़कर चली गईं। पत्नी के जाने के बाद अमित ने घर छोड़ दिया और प्रीति सुरीन के साथ मुंबई जाकर बस गया। अमित के परिजनों ने पुलिस को ये भी बताया कि नवंबर 2011 में पेरेंट्स की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलने पर आखिरी बार मिलने आया था। परिवारवालों ने पूछा कि वो मुंबई में क्या करता है, तो जवाब मिला की सिंडीकैट बैंक में नौकरी लगी है। 16 हजार तनख्वाह है। पुलिस पूछताछ में अमित के परिजनों ने उन्हें कोचिंग सेंटर के मैनेजर का नंबर दिया। मैनेजर उन्हें प्रीति सुरीन के दरभंगा स्थित घर का पता दिया। दरअसल, प्रीति के पिता नवीन सुरीन दरभंगा के एक बंगले के केयरटेकर थे। उस बंगले के पीछे की तरफ ही एक सर्वेंट क्वार्टर था, जहां प्रीति रहती थीं। पते पर पहुंचकर जांच टीम ने प्रीति सुरीन के पिता नवीन सुरीन से पूछताछ की तो सामने आया कि मुंबई जाने के बाद से ही प्रीति परिवार से टच में नहीं थीं। फिर अचानक वो 14 मार्च को घर आईं। उनके साथ अमित जयसवाल और एक लड़की भी थी। जब पिता ने प्रीति से पूछा कि वो लड़की कौन हैं, तो जवाब मिला कि वो दोस्त हैं। उन्हें गोरखपुर जाना है, तो कुछ देर आराम कर निकल जाएंगी। ये सुनकर पिता अपने काम पर निकल गए, तब वो कमरे में ही बैठी थीं। शाम को जब वो लौटे तो वो लड़की नहीं थी। प्रीति सुरीन के पिता के बयान से जांच टीम समझ चुकी थी कि मीनाक्षी को ढूंढने के लिए प्रीति तक पहुंचना जरूरी है। टीम अगले दिन ही मुंबई लौट आई, लेकिन कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला। मीनाक्षी की गुमशुदगी के 4 हफ्ते बीत गए, लेकिन उनकी कोई खबर नहीं थी। 2 अप्रैल को मीनाक्षी का वो नंबर भी बंद था, जिससे फिरौती के लिए कॉल आए थे। लंबे इंतजार के बाद 13 अप्रैल को फिर मीनाक्षी का नंबर चालू हुआ। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड्स की मदद से नंबर की लोकेशन ट्रेस कर ली। उस दौर में इस केस को कवर करने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट इकबाल ममदानी कहते हैं, ‘मामले में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट वह सिम कार्ड बना, जिससे आरोपी फिरौती की मांग कर रहे थे। पुलिस ने इसे सर्विलांस पर लेकर कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन ट्रैक की, जिससे आरोपियों की पहचान और मूवमेंट सामने आ गई। इसके बाद बांद्रा में एटीएम के पास दोनों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने पूरा सच कबूल किया और पुलिस को सबूत जुटाने में मदद की।’ 6 अप्रैल को लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने प्रीति सुरीन और अमित जयसवाल को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद दोनों कई तरह की कहानियां सुनाते रहे, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की, तो दोनों टूट गए। फिर जो कहानी उन्होंने पुलिस को सुनाई, वो सुनकर हर कोई हैरान रह गया। अमित कुमार जयसवाल ने पुलिस बयान में कहा कि मीनाक्षी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी एक महीने पहले ही उसकी गला काटकर हत्या की जा चुकी है। क्राइम ब्रांच को अब भी कई सवालों के जवाब ढंढने थे। पहला सवाल कि क्या वाकई मीनाक्षी की हत्या हुई है या प्रीति-अमित उन्हें गुमराह कर रहे हैं। दूसरा सवाल, अगर मीनाक्षी की हत्या हुई तो फिरौती की मांग क्यों की गई। और आखिरी सवाल कि अगर मीनाक्षी इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनकी लाश कहां हैं, उन्हें क्यों, किसने और कैसे मारा। जानिए इन सभी सवालों के जवाब कल, मीनाक्षी थापा हत्याकांड के पार्ट- 2 में, सिर्फ दैनिक भास्कर एप पर। …………………………………………………. पार्ट- 2, सैप्टकि टैंक में मिला एक्ट्रेस मीनाक्षी का धड़, सिर बैग में रखकर बस-ट्रेन से दो दिन सफर करते रहे कातिल, एक झूठ से रची गई साजिश क्राइम ब्रांच की पूछताछ में अमित जयसवाल और प्रीति सुरीन ने कबूल कर लिया कि उन दोनों ने ही मीनाक्षी की हत्या की। दोनों ने उनका सिर धड़ से अलग किया और फिर लाश के कई टुकड़े कर ठिकाने लगाया। मीनाक्षी का सिर जंगलों में फेंका गया। मीनाक्षी की हत्या उनकी गुमशुदगी की शिकायत होने और फिरौती मांगे जाने से पहले ही 14 मार्च को की जा चुकी थी। 18 अप्रैल 2012 क्राइम ब्रांच की टीम प्रीति सुरीन और अमित जयसवाल को लेकर इलाहाबाद पहुंची। दोनों टीम को प्रीति सुरीन के दरभंगा कॉलोनी के बंगले ले गए। प्रीति सुरीन के पिता नवीन सुरीन उस बंगले के केयरटेकर थे और उसके पीछे स्थित सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे। प्रीति और अमित की निशानदेही पर पुलिस क्वार्टर के पीछे पहुंची। पूरी खबर पढ़िए कल, पार्ट-2 में। (नोट- ये खबर मीनाक्षी थापा की दोस्त एक्ट्रेस कामना सिंह, सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट इकबाल ममदानी और रिसर्च के आधार पर क्रिएटिव लिबर्टी लेते हुए लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय और वीरेंद्र मिश्र ……………………………………………………………. भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स की ये कहानियां भी पढ़िए- पार्ट-1, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड बोली- कमरे में बंद किया; सीमन सैंपल हुए मैच, एक्टर बोले- संबंध रजामंदी से बने 14 जून 2009 शाम का समय था। एक लड़की रोती-बिलखती हालत में ओशिवारा पुलिस स्टेशन में दाखिल हुई। उसके साथ कुछ और लोग भी थे। लड़की को पुलिस स्टेशन में बैठाया गया। साथ मौजूद लोगों ने जोर देकर बोला- इसका रेप हुआ है। लड़की लगातार रोए जा रही थी। पुलिस ने पूछा किसने किया, जवाब मिला- शाइनी आहूजा, बॉलीवुड एक्टर। वहां मौजूद हर शख्स हैरान था। मामला हाई प्रोफाइल था, तो पुलिस ने भी बिना देरी किए शिकायत लिखना शुरू किया। आसपास के लोगों ने लड़की का हौसला बढ़ाया और फिर उसने स्टेटमेंट देना शुरू किया, मेरा नाम माधुरी जोशी है, मैं 20 साल की हूं। शाइनी आहूजा के घर में मई से काम कर रही थी। मैं सुबह से शाम वहीं रहती थी। घर में दो मेड और थीं। उस दिन घर में कोई नहीं था। अचानक उन्होंने मुझे पकड़ लिया। मैंने बचने की कोशिश की तो मारा। पूरी कहानी पढ़िए… …………………………. पार्ट-2, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड ने बयान बदला, कहा- रेप नहीं हुआ, 7 साल की सजा हुई; ₹15 लाख की हुई मांग केस चर्चा में था तभी एक अखबार में दावा किया गया कि शाइनी के खिलाफ पुलिस को कई सबूत मिले हैं। दावा था कि शाइनी की पड़ोसी ने उस रोज मेड की चीखों की आवाजें सुनी थीं। इन दावों के बीच शाइनी आहूजा की पत्नी अनुपम आहूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि उनके पति निर्दोष हैं, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………. पार्ट-1, बालिका वधु एक्ट्रेस प्रत्युषा बोलीं- मैं बिकने नहीं आई:आखिरी कॉल में मां-बाप को गालियां दीं, फिर फंदे पर लटकी मिलीं 1 अप्रैल 2016, दोपहर करीब 12 बजे… प्रत्युषा बनर्जी, बॉयफ्रेंड एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज के साथ मुंबई के गोरेगांव की हार्मनी बिल्डिंग की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 703 में रहती थीं। दोपहर में राहुल अपने काम से लोखंडवाला गए थे। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रत्युषा को कॉल किया तो वो जोर-जोर से रो रही थीं। थोड़ी कहासुनी होने के बाद प्रत्युषा ने कहा- वोह, राहुल राज, इगो अपने पास रखो, क्योंकि कुछ ही घंटों में, शायद मिनटों में, किसी को इगो दिखाने के लिए नहीं बचेगा। राहुल ने जवाब दिया- देखो, मैं तुमसे बस इतना बोल रहा हूं, खाली सुनो। प्रत्युषा ने बात काटते हुए कहा- मैं तुमसे इतना बोल रही हूं…. मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। पूरी कहानी पढ़िए… पार्ट-2, मौत से पहले प्रत्युषा बनर्जी ने करवाया अबॉर्शन:बॉयफ्रेंड की एक्स ने की थी मारपीट, पोस्टमॉर्टम में शरीर में मिली 100ml शराब प्रत्युषा बनर्जी के दोस्तों ने जिस सलोनी शर्मा पर उनसे मारपीट के आरोप लगाए थे, उन्होंने पुलिस बयान में कबूला कि उन्होंने एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा था, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वो और राहुल राज एक समय में रिलेशनशिप में थे, लेकिन प्रत्युषा की वजह से राहुल ने उन्हें छोड़ दिया। पूरी कहानी पढ़िए ………………………………………………………………………. पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, उस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। विवेक की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि विवेक की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने विवेक का कत्ल किया, फिर उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………………………………. पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। पूरी खबर पढ़िए…

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2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इन बिलों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। इससे लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। वहीं महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर सहमति बनाने के लिए सोमवार को एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं। दरअसल, 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है। अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस में तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा। दो बिल लाए जाएंगे, संविधान संशोधन भी शामिल इस बदलाव के लिए सरकार दो बिल लाएगी। एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई है, जबकि कांग्रेस से चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जा सकते हैं। लोकसभा में 816 सीटों की हो सकती है, 273 महिलाओं के लिए आरक्षण प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इसके बाद करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे। 2023 में पास हुआ था कानून, अभी लागू नहीं महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी और जरूरत पड़ने पर संसद इसमें संशोधन कर सकती है। महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण की मांग की टाइम लाइन 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। संविधान सभा की बहसों में भी महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। तब इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि लोकतंत्र में खुद-ब-खुद सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिलेगा। 1947: फ्रीडम फाइटर रेणुका रे ने उम्मीद जताई कि भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों के सत्ता में आने के बाद महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की गारंटी दी जाएगी। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हुई और महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सीमित ही रहा। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया, जिसमें महिलाओं की घटती राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला गया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी। 1988: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perpective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। 1996: एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद, उनकी सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा भंग हो गई 1998: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में विधेयक को फिर से पेश किया। इसके विरोध में एक राजद सांसद ने विधेयक को फाड़ दिया। विधेयक फिर से लैप्स हो गया, क्योंकि वाजपेयी सरकार के अल्पमत में आने के साथ 12वीं लोकसभा भंग हो गई थी। 1999: NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में एक बार फिर विधेयक पेश किया, लेकिन सरकार फिर से इस मुद्दे पर आम सहमति जुटाने में नाकाम रही। NDA सरकार ने 2002 और 2003 में दो बार लोकसभा में विधेयक लाया, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों ने समर्थन का आश्वासन दिए जाने के बाद भी इसे पारित नहीं कराया जा सका। 2004: सत्ता में आने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) में अपने वादे के तहत बिल पारित करने की अपनी मंशा की घोषणा की। 2008: मनमोहन सिंह सरकार ने विधेयक राज्यसभा में पेश किया और 9 मई, 2008 को इसे कानून और न्याय पर स्थायी समिति को भेजा गया। 2009: स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और विधेयक को समाजवादी पार्टी, जेडीयू और राजद के विरोध के बीच संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया। 2010: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दी। विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया, लेकिन सपा और राजद के UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकियों के बाद मतदान स्थगित कर दिया गया। 9 मार्च को राज्यसभा से महिला आरक्षण विधेयक को 1 के मुकाबले 186 मतों से पारित कर दिया गया। हालांकि, लोकसभा में 262 सीटें होने के बावजूद मनमोहन सिंह सरकार विधेयक को पारित नहीं करा पाई। 2014 और 2019: भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का वादा किया, लेकिन इस मोर्चे पर कोई ठोस प्रगति नहीं की।

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साउथ अफ्रीका से मुकाबले के लिए न्यूजीलैंड की महिला वनडे टीम का ऐलान, केली नाइट को मिला मौका

नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया गया है। तेज गेंदबाज केली नाइट को पहली बार एकदिवसीय टीम में जगह दी गई है। वनडे सीरीज का आगाज 29 मार्च से होना है। Tue, 24 Mar 2026 09:24:29 +0530

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