हलचल भरे वैश्विक माहौल के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और निवेशकों की नजर अब भू-राजनीतिक घटनाओं पर टिकी हुई है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज करने के बाद सोने के दामों ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की, जिसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर आई नई जानकारी मानी जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना करीब एक प्रतिशत तक गिरकर निचले स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी देखने को मिली है। गौरतलब है कि इससे पहले सोना पिछले साल दिसंबर के बाद अपने सबसे कमजोर स्तर तक फिसल गया था, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी।
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि ईरान के साथ बातचीत “सकारात्मक और उपयोगी” रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हालात को देखते हुए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। इस बयान के बाद बाजार में तनाव कुछ कम हुआ और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर दबाव कम पड़ा।
बीते कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर रहा है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। यह वही रणनीतिक मार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक बाजारों को सीधे प्रभावित करता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि जलमार्ग नहीं खोला गया तो ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जा सकता है, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि अब बातचीत की खबरों ने फिलहाल तनाव को थोड़ा कम किया।
इसी बीच चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है, जो बताता है कि निवेशक अभी भी सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक सोने-चांदी जैसे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
गौरतलब है कि निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, क्योंकि भू-राजनीतिक घटनाएं और केंद्रीय बैंकों की नीतियां मिलकर बाजार की दिशा तय कर रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने की कीमतें बातचीत के नतीजों और क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेंगी।
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