Jaypee अधिग्रहण पर Adani-Vedanta में टकराव, NCLAT बोला- पहले अदाणी को पार्टी बनाएं
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने सोमवार को वेदांता समूह को आदेश दिया कि वह जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश को चुनौती देने वाली अपनी अपीलों में अदाणी समूह को भी पक्षकार बनाए। एनसीएलएटी की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा वाली दो सदस्यीय पीठ ने वेदांता समूह को निर्देश दिया कि वह सफल समाधान आवेदक अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिन के अंत तक याचिका की प्रति उपलब्ध कराए और उसे मामले में पक्षकार बनाए।
पीठ ने मामले की सुनवाईमंगलवार के लिए निर्धारित करते हुए कहा कि इस मामले में वह एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकती। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस मामले में एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकते… आपने उन्हें पक्षकार नहीं बनाया है।’’ इस मामले में अदाणी एंटरप्राइजेज एनसीएलएटी के समक्ष पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुकी है।
पहली अपील में समाधान योजना की वैधता को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी अपील में ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण(एनसीएलटी) द्वारा योजना को दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता समूह दिवाला प्रक्रिया के तहत जेएएल के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर में ऋणदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की समाधान योजना (बोली) को मंजूरी दे दी थी।
एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च को दिवाला प्रक्रिया के तहत जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दे दी। अब खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता ने उक्त एनसीएलटी आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील दायर की है। पिछले वर्ष नवंबर में ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने उद्योगपति गौतम अदाणी की ओर से जेएएल के अधिग्रहण के लिए प्रस्तुत समाधान योजना को मंजूरी दी थी। अदाणी एंटरप्राइजेज ने वेदांता और डालमिया भारत को पीछे छोड़ते हुए जेएएल के लिए बोली जीत ली थी।
BJP सांसद Jagdambika Pal की सरकार से बड़ी मांग, Anganwadi Workers का मानदेय एक समान हो
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद ने सोमवार को देश भर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय एक समान करने तथा उन्हें 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिये जाने की मांग की। लोकसभा में शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के जगदंबिका पाल ने कहा कि देश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की संख्या करीब 12 लाख 93 हजार है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का वेतन एक समान करने की मांग करते हुए कहा, ‘‘उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, मानदेय के रूप में उन्हें विभिन्न राज्यों में छह हजार रुपये, आठ हजार रुपये या दस हजार रुपये मिल रहे हैं।’’
भाजपा सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि चूंकि वे राष्ट्रीय योजनाओं को वास्तविकता की धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं, इसलिए उन्हें नियमित करने पर विचार किया जाए। पाल ने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वर्तमान में मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से इन्हें भी इस कानून के तहत 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने की मांग की।
समाजवादी पार्टी (सपा) के नारायणदास अहिरवार ने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र जालौन (उत्तर प्रदेश) में बसौर-बरार समुदाय के लोगों की संख्या शून्य घोषित किये जाने से वे सरकार की कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘दिनांक छह जुलाई 2024 को परियोजना निदेशक द्वारा (उप्र) शासन को भेजे गए पत्र में यह उल्लेख किया गया कि जिले में इस जाति के लोगों की संख्या शून्य है।
वहीं, जब इस संबंध में परियोजना निदेशक से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि नौ विकास खंड अधिकारियों ने लिखित रूप से यह सूचित किया है कि उनके क्षेत्र में बसौर-बरार जाति के लोग निवास नहीं करते।’’ सपा सांसद ने कहा कि यह तथ्य न केवल सत्य से परे है, बल्कि एक समुदाय विशेष के प्रति ‘‘गहरी उपेक्षा और संवेदनहीनता’’ को भी दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि इस कारण समुदाय के पात्र लोग मुख्यमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण लाभ से वंचित हो गए हैं। उन्होंने जालौन जिले में समुदाय के सभी परिवारों का भौतिक सत्यापन कराने तथा मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत प्राथमिकता सूची में शामिल करने की मांग की।
सपा के ही बाबू सिंह कुशवाहा ने देश में रसोई गैस सिलेंडर की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में वृद्धि की गई, जो पिछले 11 महीने में दूसरी बार हुई है। उन्होंने कहा कि इससे आम आदमी की रसोई पर प्रभाव पड़ रहा है। कांग्रेस के किरसन नामदेव ने छत्तीसगढ़ के गडचिरौली में निजी उद्योगों के लिए किसानों की उर्वर भूमि का अधिग्रहण किये जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि किसानों की उर्वर जमीन छीन ली जाएगी तो उनके पास खेती के लिए कुछ नहीं बचेगा।
उन्होंने अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। कांग्रेस की वर्षा एकनाथ गायकवाड ने उल्लेख किया कि मुंबई में रेल लाइन के किनारे हजारों परिवारों की झुग्गियां हैं। उन्होंने कहा कि 3,150 झोपड़ियों के निवासियों को उन्हें खाली करने का नोटिस दिया गया है और उन्हें तोड़ने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर निर्मित झुग्गियों पर कोई नीति नहीं है तथा मुंबई मे हजारों लोग रक्षा विभाग और रेलवे की जमीन पर रहते हैं। उन्होंने उनके पुनर्वास की सरकार से मांग की।
भाजपा के अनूप संजय धोत्रे ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 8,110 रुपये करने की मांग की। उन्होंने कपास उत्पादकों को राहत देने के लिए इस पर आयात कर मौजूदा पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया। भाजपा के भरत सिंह कुशवाहा ने ग्वालियर के अनेक भागों में कच्चे नाले और अनियोजित सीवेज का मुद्दा उठाते हुए मध्यप्रदेश के इस शहर में सुनयोजित तरीके से जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की।
जनता दल (यूनाइटेड) के कौशलेंद्र कुमार ने बिहार में कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने पर केंद्र से विचार करने और इस संबंध में राज्य सरकार के साथ परामर्श करने का आग्रह किया। उन्होंने अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी माटी कला बोर्ड के गठन के लिए कदम उठाने की मांग की।
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