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Dimona Nuclear Reactor: ईरान के मिसाइल हमले ने क्यों जगाई परमाणु युद्ध की आशंका? जानिए इजरायल के इस रहस्य का सच

Iran-Israel War: मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष ने एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। हाल ही में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान, कुछ मिसाइलें इजरायल के 'डिमोना' शहर के पास गिरीं। इस घटना ने दुनिया भर में खलबली मचा दी और परमाणु युद्ध का खतरा गहराने लगा। यह दहशत अकारण नहीं थी। डिमोना वह स्थान है जहां इजरायल का 'हृदय' और उसका सबसे बड़ा 'रहस्य'-परमाणु हथियार कार्यक्रम-छिपा हुआ है।। ईरान ने इजरायल पर 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइलें दागीं।

हालांकि इजरायल के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें इजरायल के दक्षिणी 'नेगेव डेजर्ट' में स्थित 'डिमोना' शहर के पास गिरीं।

​'डिमोना' (Dimona) क्या है? क्यों है यह दुनिया का सबसे संरक्षित शहर? 
डिमोना इजरायल के नेगेव डेजर्ट में स्थित एक शहर है, लेकिन इसकी मुख्य पहचान इसके पास स्थित 'नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर' (Negev Nuclear Research Center - NNRC) के कारण है। इस सेंटर की स्थापना 1950 के दशक के अंत में फ्रांस की गुप्त मदद से की गई थी।

​आधिकारिक तौर पर इजरायल दावा करता है कि यह एक "शांतिपूर्ण परमाणु अनुसंधान केंद्र" है, लेकिन दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञ, खुफिया एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पूर्व अधिकारी मानते हैं कि डिमोना ही वह जगह है जहा इजरायल ने अपने परमाणु हथियारों का निर्माण किया है।

​डिमोना का महा-रहस्य:

प्लूटोनियम उत्पादन: यहां एक भारी पानी से चलने वाला परमाणु रिएक्टर और एक गुप्त प्लूटोनियम पुनर्संसाधन संयंत्र स्थित है, जो परमाणु हथियार ग्रेड के ईंधन का उत्पादन करता है।

गुप्त परमाणु जखीरा: अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार डेटाबेस के अनुसार, इजरायल के पास लगभग 80 से 200 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं। इजरायल 'अघोषित' परमाणु शक्ति संपन्न देश है।

अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण से दूर: चूंकि इजरायल ने 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए 'डिमोना' IAEA के किसी भी नियमित निरीक्षण या निगरानी के अधीन नहीं है, जिससे यह दुनिया का सबसे रहस्यमयी परमाणु स्थल बन जाता है।

​1986 का मोर्दचाई वनुनु (Mordechai Vanunu) कांड

​इजरायल के परमाणु रहस्य को पहली बार दुनिया के सामने लाने का काम 'मोर्दचाई वनुनु' नामक एक पूर्व इजरायली परमाणु तकनीशियन ने किया था। वनुनु ने डिमोना के भीतर की गुप्त तस्वीरों और दस्तावेजों को 1986 में ब्रिटिश अखबार 'द संडे टाइम्स' को लीक कर दिया था।

इन सबूतों ने साबित कर दिया कि इजरायल न केवल परमाणु हथियार बना रहा था, बल्कि उसके पास मिडल ईस्ट में सबसे बड़ा परमाणु जखीरा था। इस 'देशद्रोह' के लिए इजरायल ने वनुनु को अगवा किया और 18 साल जेल में रखा।

​ईरान का हमला: क्यों मची खलबली?

​ईरान ने इस हमले को सीरिया के दमिश्क में स्थित अपने दूतावास पर इजरायली हमले के जवाब में किया था। हालांकि ईरान का दावा था कि उसका मुख्य लक्ष्य इजरायल के 'नेवातिम एयरबेस' थे, लेकिन कुछ मिसाइलें डिमोना के पास गिरने से दहशत फैल गई।

​परमाणु खलबली के कारण:

​'रेड लाइन' (Red Line): डिमोना को इजरायल का 'अंतिम किला' माना जाता है। इस पर हमला करना इजरायल के लिए एक ऐसी 'रेड लाइन' है, जिसके बाद वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल (जैसे 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता) पर विचार कर सकता है।

क्षेत्रीय विनाश की आशंका: यदि कोई भी मिसाइल सीधे तौर पर डिमोना के परमाणु रिएक्टर या ईंधन भंडारण स्थल से टकराती, तो इससे न केवल इजरायल, बल्कि पूरे मिडल ईस्ट में परमाणु विकिरण फैलने का खतरा था, जो सदी की सबसे बड़ी मानवीय और पर्यावरणीय आपदा बन सकती थी।

अमेरिका की चिंता: अमेरिका के लिए भी यह हमला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि वह इजरायल की परमाणु संपत्ति की सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहता है। डिमोना पर खतरा मिडल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को अनिवार्य बना सकता था।

​इजरायल की 'परमाणु अस्पष्टता' की नीति

​इजरायल आज भी 'परमाणु अस्पष्टता' की नीति का पालन करता है। वह न तो परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इनकार करता है। इस नीति का उद्देश्य मिडल ईस्ट के अरब देशों को इस डर में रखना है कि इजरायल के पास 'अंतिम विकल्प' हमेशा मौजूद है। डिमोना पर हमले ने इस अस्पष्टता को 'कमजोरी' के रूप में पेश करने की कोशिश की, जिससे इजरायल का आक्रोश बढ़ा।

​भविष्य का खतरा: क्या टल गया परमाणु युद्ध?

ईरान के हमले के बाद, इजरायल ने भी ईरान के इस्फ़हान शहर के पास एक 'सांकेतिक' हवाई हमला किया, जहाँ ईरान का अपना एक परमाणु अनुसंधान केंद्र है। यह दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे को 'अंतिम चेतावनी' थी।

​वर्तमान स्थिति:

​फिलहाल सीधी सैन्य कार्रवाई रुक गई है, लेकिन तनाव चरम पर है।

​ईरान तेजी से 90% संवर्धित यूरेनियम बनाने की ओर बढ़ रहा है, जो परमाणु हथियार बनाने के लिए काफी है।

​डिमोना कांड ने यह साबित कर दिया है कि मिडल ईस्ट में अगला युद्ध किसी भी समय 'परमाणु' रंग ले सकता है, जिससे न केवल यह क्षेत्र, बल्कि पूरी दुनिया तबाह हो सकती है।

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