Video: 6.5 फीट का गेहूं, 3 गुना मुनाफा! आंधी-बारिश भी नहीं पहुंचा पाएगा नुकसान, खेती में 'सुपरफूड' की एंट्री
High Yielding Wheat Variety: राजस्थान के सीकर के एक किसान ने गेहूं की खेती में वह कर दिखाया है. जिसने वैज्ञानिकों और किसानों दोनों को हैरत में डाल दिया है. विकास कुमार सैनी द्वारा विकसित 'अजय राज' नाम की इस अनोखी किस्म ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के मेले में सबका ध्यान खींचा है. इस गेहूं की सबसे बड़ी खासियत इसकी साढ़े छह से सात फीट तक की लंबाई है. जो आम तौर पर होने वाले गेहूं से कहीं ज्यादा है. अक्सर आंधी और बारिश में गेहूं की फसल गिरकर बर्बाद हो जाती है, लेकिन 'अजय राज' की मजबूत बनावट इसे हर मौसम में अडिग रखती है. 9 साल की कड़ी मेहनत से तैयार यह किस्म न केवल बंपर उत्पादन (40-45 क्विंटल) देती है, बल्कि पशुओं के लिए चारे की समस्या को भी जड़ से खत्म करती है. पोषण के मामले में यह गेहूं किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फाइबर भरपूर मात्रा में है. विकास के अनुसार इस बीज से किसान अपनी कमाई दो से तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं. विकास ने इस किस्म पर अपने एकाधिकार के लिए आवेदन भी कर दिया है, ताकि इसकी शुद्धता और पहचान बनी रहे.
Middle East War: पीएम मोदी की हाई-लेवल मीटिंग; देश की ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर चर्चा
PM Modi Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 22 मार्च को वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर का आकलन करना था। पीएम मोदी ने विशेष रूप से पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक जैसे क्षेत्रों की समीक्षा की, ताकि देश भर में इन आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बिना किसी बाधा के बनी रहे।
सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर सरकार की नजर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार का पूरा ध्यान सुचारू लॉजिस्टिक्स, स्थिर आपूर्ति और कुशल वितरण प्रणाली बनाए रखने पर है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की कमी को रोकना और सेवाओं को स्थिर रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है ताकि भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखा जा सके।
मिडल ईस्ट युद्ध: ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती
बता दें कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह संघर्ष अब काफी तीव्र हो चुका है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी इस जंग ने ऊर्जा परिवहन मार्गों पर संकट पैदा कर दिया है। विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा शिपमेंट गुजरती है, वहां ईरान के नियंत्रण और प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है।
पीएम मोदी की वैश्विक नेताओं से चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी इस स्थिति को "राष्ट्रीय चरित्र की कठिन परीक्षा" बताया था। उन्होंने धैर्य और सार्वजनिक जागरूकता के साथ इस संकट का सामना करने पर जोर दिया है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच पीएम मोदी लगातार सऊदी अरब, यूएई, कतर, फ्रांस, इजरायल और ईरान सहित कई वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आ रहे व्यवधानों का समाधान निकाला जा सके।
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