प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीति में एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। लगातार लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के मामले में उन्होंने एक अहम पड़ाव पार किया है, जिसे भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बता दें कि नरेंद्र मोदी अब देश में निर्वाचित सरकार के सबसे लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले नेता बन गए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कुल 8,931 दिन पूरे कर लिए हैं, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल शामिल है। इससे पहले यह रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जिन्होंने 8,930 दिनों तक पद संभाला था।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था और मई 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं। इस तरह उनका राजनीतिक नेतृत्व करीब 25 साल के लंबे दौर में फैल चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने गैर-कांग्रेस पृष्ठभूमि से आकर लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया और लगातार तीन आम चुनावों में जीत दर्ज की। साल 2014, 2019 और 2024 में मिली जीत ने उनके नेतृत्व को स्थायित्व दिया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक जन समर्थन का संकेत मानते हैं।
इसके अलावा यह भी गौर करने वाली बात है कि वे स्वतंत्र भारत के बाद जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। साथ ही, वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर लंबे समय तक शासन का अनुभव हासिल किया है।
डिजिटल दुनिया में भी उनकी मौजूदगी लगातार बढ़ती दिख रही है। बता दें कि हाल के समय में उन्होंने अपने वीडियो मंच पर करोड़ों सदस्य पूरे किए हैं और सोशल मीडिया पर भी उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। फरवरी महीने में उन्होंने एक मंच पर 10 करोड़ से अधिक अनुयायियों का आंकड़ा पार किया, जो किसी भी वर्तमान वैश्विक नेता के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच हालात फिर से गंभीर होते दिख रहे हैं, जहां ईरान और इजराइल के बीच टकराव ने एक नया मोड़ ले लिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
बता दें कि शनिवार देर रात ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलें इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना और अराद में गिरीं। मौजूद जानकारी के अनुसार इन हमलों में कम से कम 180 लोग घायल हुए हैं। इन दोनों शहरों की लोकेशन इजराइल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के काफी करीब मानी जाती है, जिससे इस घटना की गंभीरता और बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि इससे पहले दिन में ईरान के नतांज स्थित परमाणु संवर्धन केंद्र पर भी हमला हुआ था। हालांकि इजराइल ने इस हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। नतांज पर हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी संघर्ष के शुरुआती दौर में यह केंद्र निशाने पर आ चुका है।
ईरान ने इसी के कुछ घंटों बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल हमले किए। इजराइल की सेना के अनुसार इस बार कुछ मिसाइलें उनकी वायु रक्षा प्रणाली को भेदने में सफल रहीं, जो कि अब तक कम ही देखने को मिला था। खास तौर पर परमाणु केंद्र के आसपास के इलाके में यह पहली ऐसी घटना मानी जा रही है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को देश के लिए एक कठिन शाम बताया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि ऐसे हमले पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में बड़े स्तर के खतरे को जन्म दे सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। एजेंसी के मुताबिक फिलहाल डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को किसी प्रकार का नुकसान या विकिरण के असामान्य स्तर की जानकारी नहीं मिली है।
जानकारों का मानना है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं। मध्य पूर्व पहले से ही ऊर्जा और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है, ऐसे में परमाणु ठिकानों के आसपास बढ़ती गतिविधियां वैश्विक चिंता का कारण बन रही हैं।
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