कतर हेलिकॉप्टर क्रैश में तुर्की के मेजर समेत तीन की मौत: रक्षा मंत्रालय
इस्तांबुल, 22 मार्च (आईएएनएस)। कतर में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में मारे गए छह में से 3 तुर्की नागरिक थे। दोहा ने रविवार को एक बयान जारी कर बताया कि मिलिट्री हेलिकॉप्टर हादसे में 6 लोग मारे गए जबकि एक लापता है। इसमें छह लोगों के नाम का भी खुलासा किया गया। तुर्की की ओर से भी एक रिलीज जारी की गई, जिसमें सशस्त्र बलों के एक सदस्य और तुर्की की डिफेंस कंपनी के दो तकनीशियनों के मारे जाने की पुष्टि की गई।
मृतक जनों को श्रद्धांजलि और पीड़ित परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए मंत्रालय ने कहा कि दुर्घटना की वजह कतर के अधिकारियों की जांच से स्पष्ट होगी।
बताया कि 21 मार्च की शाम को, कतर सशस्त्र बलों का एक हेलिकॉप्टर—जो कतर-तुर्की संयुक्त बल कमान के तत्वावधान में प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित कर रहा था—समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया; प्रारंभिक जांच के अनुसार, ऐसा किसी तकनीकी खराबी से हुआ। तत्काल चलाए गए खोज और बचाव अभियानों के परिणामस्वरूप, हेलिकॉप्टर का मलबा और हमारे शहीदों के पार्थिव शरीर बरामद किए गए।
इसमें आगे बताया गया कि दुर्घटना में, कतर सशस्त्र बलों के चार कर्मी, तुर्की सशस्त्र बलों का एक सदस्य, और एएसईएलएसएएन (अग्रणी रक्षा कंपनी) के दो तकनीशियन, जो हेलिकॉप्टर में सवार थे—ने अपनी जान गंवा दी। दुर्घटना का निश्चित कारण कतर के अधिकारियों द्वारा की जाने वाली जाँच के बाद निर्धारित किया जाएगा।
इससे पहले, कतर के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर मृतकों के नाम बताए थे। बयान में कहा गया कि सुबह चले खोज और बचाव अभियानों के तहत, कतर सशस्त्र बलों के कैप्टन (पायलट) मुबारक सलेम दवाय अल-मारी, सार्जेंट फहद हादी गनेम अल-खयारिन, और कॉर्पोरल मोहम्मद माहेर मोहम्मद; कतर-तुर्की संयुक्त बलों के मेजर सिनान ताशतेकिन; और विमान के यात्रियों में शामिल तुर्की के नागरिक सहयोगी सुलेमान जेमरा कहरामन और इस्माइल अनास कैन की मृत्यु हो गई। वहीं, कतर सशस्त्र बलों के लापता कैप्टन (पायलट) सईद नासिर समेख की खोज के लिए अभियान जारी रखा गया।
दोपहर बाद पुष्टि की गई कि सातवां शव भी बरामद कर लिया गया है और वो लापता कैप्टन सईद नासिर समेख का ही है।
--आईएएनएस
केआर/
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध को लेकर क्यों चीन ने साधी है चुप्पी? भारत की तरह US को मिलने वाला है बड़ा धोखा!
US-Israel Attack Iran: अमेरिका-इजरायल और ईरान का युद्ध अपने चरम पर पहुंच चुका है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान को तबाह करने में लगे हुए हैं. हमलों में सुप्रीम लीडर समेत कई सैन्य कमांडर भी मारे जा चुके हैं. ईरान भी पलटवार कर रहा है और उसने खाड़ी देशों में यूएस के कई ठिकानों पर हमला किया है और अब लंबी दूरी पर बने अमेरिकी बेस को निशाना बना रहा है. इस बीच ईरान का सबसे बड़े हितैशी चीन ने चुप्पी साध रखी है. युद्ध को लेकर माना जा रहा था कि चीन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा. मगर ऐसा नहीं हुआ. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से अभी तक किसी तरह का सख्त बयान सामने नहीं आया है, न ही कोई बड़ा हस्तक्षेप सामने आया है. ऐसे में कई रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस समय अपनी नई रणनीति की ओर बढ़ रहा है. वह अब ताइवान को लेकर बड़ी साजिश रचने में जुटा हुआ है.
Shocking footage from this evening of a ballistic missile striking the city of Dimona in southern Israel. Home to 40,000 residents, a direct hit on a civilian neighborhood is a war crime!
— Sacha Roytman (@SachaRoytman) March 21, 2026
I’m furious that world leaders still refuse to stand up and call out Iran.
When Israel… pic.twitter.com/PYt9hvIZDd
पूरा विश्व ऊर्जा के संकट से गुजर रहा
यह माहौल वैसा है जब 1962 में कोल्ड वॉर अपने पीक पर था. ऐसे में टाइम में चाइना ने भारत पर हमला कर दिया था. इस हमले में भारत काफी जमीन चीन के पास चली गई थी. आज भी कुछ ऐसी सिचुएशन देखने को मिल रही है. रक्षा विशेषज्ञ मंगल सिंह का कहना है कि एक तरफ यूएस ईरान में इन्वॉल्वड है. स्टेट ऑफ हॉर्मोस पूरी तरह ब्लॉकड हो चुका है. ट्रंप नाटो मेंबर्स से मदद की गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि द स्टेट ऑफ हॉर्मोस को खोलने में वे मदद करें. वहीं रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है. ऐसे में दोनों महाशक्ति अमेरिका और रूस बड़ी जंग में मशगूल हैं. वहीं पूरा विश्व ऊर्जा के संकट से गुजर रहा है.
चाइनीज एयक्राफट ताइवन क्षेत्र में दिखे
रक्षा विशेषज्ञ मंगल सिंह के अनुसार, ऐसे में चीन के पास बड़ा मौका है ताइवान पर कब्जा करने का. बताया जा रह है कि ऐसा इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि हाल ही में चाइनीस मिलिट्री एयरक्राफ्ट्स ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में दिखे हैं. यह प्रक्रिया फरवरी में थोड़ी कम हो गई थी. यह अब दोबारा से अपने पीक पर पहुंच चुकी है. आखिर चाइना ताइवान को इनवेड करेगा या नहीं करेगा? इसके कई पहलू हैं, कई डायमेंशंस हैं.
चीन सेफ गेम की ओर बढ़ना पसंद करता है
चीन ने अब तक अपनी चुप्पी साध रखी है. इसकी वजह उसके अपने फायदे हैं. वह यह देख रहा है कि अगर वह अगर ताइवान पर हमला करता है तो इस समय उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आने वाला है. चीन इस परिस्थिति का फायदा उठाने की फिराक में है. चीन हमेशा से सेफ गेम की ओर बढ़ना पसंद करता है. वह अपनी इक्नॉमी को डिस्टर्ब किए बिना ताइवान को अपना बनाने की कोशिश में लगा है. हालांकि जापान और अमेरिका उसे ऐसे करने से रोक सकते हैं.
2027 चीन के लिए बड़ा इवेंट
रक्षा विशेषज्ञ मंगल सिंह का कहना है कि चीन के लिए इस समय के हालात बेहद मुफीद है. हो सकता है कि आने वाले कुछ दिनों में चीन की ओर से ऐसी कदम उठाया जा सकता है क्योंकि 2027 में यहां पर पावर ट्रांजिशन इवेंट है. यानी कि शी जिनपिंग यह डिसाइड करेंगे कि उनके बाद में वहां पावर में कौन आने वाला है. ऐसे में शी जिनपिंग अपनी लेगेसी चाइना के अंदर छोड़ना चाहेंगे. वो अपना नाम उस लिस्ट में शामिल करना चाहेंगे, जिसमें माउजडोंग और डेंगजिया पाओ हैं. चाइना ने हाल ही में अपना डिफेंस का खर्च बढ़ाया है. इस डिफेंड स्पेंडिंग को जब से उन्होंने बढ़ाया है तो यह स्पेकुलेशन हमेशा से लगाया जा रहा है कि यह उनका एक बहुत बड़ा गोल है कि वो ताइवान को अपने में जोड़ लें.
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