Dhurandhar VS Dhurandhar 2: 'धुरंधर' या 'धुरंधर 2' किसने किया लोगों के दिलों पर राज, जानें दोनों फिल्मों की कमाई
Dhurandhar VS Dhurandhar 2: इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर और धुरंधर 2: द रिवेंज को लेकर खूब चर्चा हो रही है. जी हां, दर्शकों के बीच रणवीर सिंह की इन फिल्मों का क्रेज साफ देखा जा सकता है, लेकिन जब कमाई की बात आती है तो दोनों फिल्मों का प्रदर्शन और उनका प्रभाव अलग-अलग नजर आता है. चलिए हम आपको इस खबर में दोनों फिल्मों की कमाई के बारे में डिटेल में समझते हैं कि आखिर किस फिल्म ने कितनी कमाई की और किसका पलड़ा भारी है.
धुरंधर 2: द रिवेंज की धमाकेदार कमाई
धुरंधर 2: द रिवेंज ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला दिया. फिल्म की शुरुआत ही बेहद शानदार रही और पहले दो दिनों में ही इसने बड़ी कमाई कर ली. आपको बता दें कि फिल्म ने प्री-रिलीज शोज में- 43 करोड़ रुपये, पहले दिन- 99.1 करोड़ रुपये और दूसरे दिन- 78.94 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. इन आंकड़ों के साथ फिल्म का कुल भारतीय कलेक्शन 220.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो इसे इस साल की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल करता है.
हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का प्रदर्शन हर भाषा में समान नहीं रहा. हिंदी में जहां इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला, वहीं तेलुगू बाजार में फिल्म की पकड़ कमजोर रही. बता दें, धुरंधर 2 ने तेलुगू में पहले दिन- 2.12 करोड़ रुपये और दूसरे दिन- 1.3 करोड़ रुपये की कमाई की है. इससे साफ है कि फिल्म का मुख्य बिजनेस हिंदी बेल्ट से ही आ रहा है.
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धुरंधर (पहला पार्ट) का प्रदर्शन
वहीं रणवीर सिंह स्टारर फिल्म 'धुरंधर' (पार्ट 1) दिसंबर 2025 में रिलीज हुई थी और इसने दुनिया भर में बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,300 करोड़ से ज्यादा की कुल कमाई की है. बता दें, भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन लगभग 1,005.85 करोड़ रहा. और घरेलू बाजार में फिल्म ने लगभग 840 करोड़ की नेट कमाई की हुई. यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में से एक बनकर उभरी. ये फिल्म भी अपने समय में चर्चा में रही थी. लेकिन यह एक पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर बनने से थोड़ा पीछे रह गई. इसी वजह से इसके सीक्वल को बड़े स्तर पर रिलीज किया गया और ज्यादा बड़े पैमाने पर प्रमोशन किया गया.
तुलना में कौन आगे?
ऐसे में अगर दोनों फिल्मों की तुलना की जाए, तो ओपनिंग और कुल कमाई के मामले में: धुरंधर 2 साफ तौर पर आगे है. मार्केट पकड़ के तरीके से देखें तो धुरंधर 2 हिंदी बेल्ट में मजबूत है, लेकिन अन्य भाषाओं में कमजोर दिख रही है. वहीं पहले पार्ट यानी धुरंधर को बेस के तरीके से तैयार किया गया था, जिसका फायदा सीक्वल को खूब मिल रहा है.
AAP नेता सौरभ भारद्वाज का दावा, पालम अग्निकांड में बदनामी छुपाने के लिए सरकार ने लोगों की नहीं बचाई जान
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को पालम अग्निकांड मामले को लेकर नए खुलासे किए. उन्होंने सरकार की नाकामी की पोल खोल दी है. उन्होंने दावा किया पालम अग्निकांड में अपनी बदनामी छुपाने के लिए सरकार ने लोगों की जान नहीं बचाई. फायर बिग्रेड की हाइड्रोलिक लिफ्ट के खराब होने के बाद भी स्थानीय लोगों ने आग में फंसे परिवार को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकारी सिस्टम ने उन्हें बचाने नहीं दिया.
जब हाइड्रोलिक लिफ्ट काम नहीं की तो लोगों ने जमीन पर गद्दे बिछाने के लिए फायर बिग्रेड की गाड़ी को हटाने को कहा, लेकिन गाड़ी नहीं हटाई है. सरकार को लगा कि अगर गद्दे बिछाने से लोग बचे गए तो उसकी बदनामी होगी कि उसकी फायर बिग्रेड नाकाम रही. इसलिए परिवार के 9 लोगों मरने दिया गया.
मरे लोगों पर ही सारा दोष डालना चाहती है सरकार
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनकपुरी में गड्डे में गिर मारे गए कमल ध्यानी की तरह ही अब भाजपा और उसकी सरकार पालम अग्निकांड में मरे लोगों पर ही सारा दोष डालना चाहती है ताकि सरकार की सारी नाकामी छिप जाए. दिल्ली की जनता असलियत जान चुकी है.
लोग कूदकर अपनी जान बचा सकते थे
शुक्रवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पालम अग्निकांड के दौरान जिस मकान में आग लगी थी, उसके बिल्कुल बगल में गद्दों की दुकान है, जिसमें सैकड़ों गद्दे रखे हुए थे. वहां के करीब 500 स्थानीय लोग और दुकानदार पुलिस व फायर ब्रिगेड से विनती कर रहे थे कि वे अपनी खराब गाड़ी को वहां से हटाएं और हमें गद्दे बिछाने दें. अगर गद्दे बिछ जाते, तो ऊपर फंसे लोग कूदकर अपनी जान बचा सकते थे.
वीडियो दिखाकर किया दावा
सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि देश को देखना चाहिए कि इस अग्निकांड में आखिर किन बेकसूर लोगों की जान गई है. वीडियो में नौ लोगों की नौ चिताएं जलती हुई दिखनी चाहिए थीं, लेकिन वहां सिर्फ आठ ही चिताएं हैं. आठ चिताएं इसलिए हैं क्योंकि 70 साल की एक बुजुर्ग मां अपनी जवान बेटी को बचाने के लिए उसे गले से लगाए रही, ताकि बेटी बच जाए भले ही मां जल जाए. आग में उनकी लाशें आपस में इस कदर चिपक गईं कि मरने के बाद भी अलग नहीं हो सकीं. इसीलिए आठ चिताओं में नौ लोगों के शव जलाए गए, क्योंकि एक चिता पर मां-बेटी के दोनों शव एक साथ चिपक कर जले थे. यह सब सरकार की लापरवाही ने लोगों के साथ किया है और यह कल को किसी के साथ भी हो सकता है.
कमल ध्यानी के मामले का जिक्र किया
सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि जब जनकपुरी में कमल ध्यानी गड्ढे में गिर गया था, इस पर सरकार कहना था कि सब जगह बैरिकेडिंग थी और विभाग की कोई गलती नहीं थी. सरकार केवल खुद को बचाने में लगी हुई है. सरकार यह झूठ हर जगह फैला रही है कि उनके विभागों और पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया तथा फायर ब्रिगेड की सारी गाड़ियां ठीक थीं.
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