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पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में गहराया मानवीय संकट, दमन और उपेक्षा से बढ़ा असंतोष: रिपोर्ट

लंदन, 20 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में आवश्यक सेवाओं की कमी के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट जैसी समस्याएं राजनीतिक उपेक्षा और सुरक्षा-आधारित प्रशासन के साथ मिलकर हालात को और गंभीर बना रही हैं।

यूके स्थित अखबार ‘एशियन लाइट’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में महिलाओं और छात्रों की बढ़ती भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शन समाज में गहरे असंतोष का संकेत हैं, जो लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक उपेक्षा से जुड़ा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली की भारी कमी और बढ़े हुए बिल यहां के लोगों के लिए सालभर की समस्या बन गए हैं। विडंबना यह है कि बड़े जलविद्युत परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों को लंबी कटौती झेलनी पड़ती है और उनसे वाणिज्यिक दरों पर शुल्क वसूला जाता है।

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात इतने बिगड़ गए कि विरोध प्रदर्शन क्षेत्रव्यापी बंद में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने महंगे बिजली बिल, बकाया वेतन और नागरिक अधिकारों में कटौती का हवाला देते हुए बिल भरने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में प्रशासन ने कई बार गिरफ्तारियां, संचार बंदी और बल प्रयोग का सहारा लिया।

वहीं, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में जमीन के मालिकाना हक का मुद्दा बड़ा विवाद बनकर उभरा है। बड़ी मात्रा में जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किए जाने से स्थानीय लोगों को अपने पुश्तैनी अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। बुनियादी ढांचा और रणनीतिक परियोजनाओं के नाम पर जमीन कब्जाने और बिना मुआवजे विस्थापन के आरोपों ने लोगों में नाराजगी बढ़ाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में उत्पादित बिजली पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड में जाती है, जबकि स्थानीय लोग बिजली संकट और महंगे टैरिफ से जूझ रहे हैं। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग बाहरी हितों के लिए किया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आलोचकों का आरोप है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां, खासकर आईएसआई, समस्याओं के समाधान के बजाय विरोध को दबाने पर ज्यादा ध्यान देती हैं। निगरानी, डराने-धमकाने और जबरन गायब किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा धीरे-धीरे ध्यान खींच रहा है। 2025 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध पर पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अक्सर विरोध प्रदर्शनों को “बाहरी प्रभाव” का परिणाम बताया है, जबकि स्थानीय लोग लगातार आर्थिक और मानवीय समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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क्या भोजन के साथ फल खाना सही है? जानें क्या कहता है आयुर्वेद

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। भोजन और फल दोनों ही शरीर के लिए जरूरी हैं। बदलती जीवनशैली में शादी-ब्याह, पार्टियों और होटलों में खाने के साथ फल परोसना आम हो गया है। बच्चे हों या बड़े, कई लोग बिना सोचे-समझे भोजन के साथ फल खा लेते हैं, जबकि आयुर्वेद इसे सही नहीं मानता।

शादी के फंक्शन से लेकर होटलों में खाने के साथ फल परोसे जाते हैं, और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक भोजन के साथ फल खाने से परहेज नहीं करते, लेकिन क्या दोनों को साथ खाना सही है? होटल या किसी फंक्शन में परोसे गए फल ठंडे होते हैं और कई बार यह स्टोरेज से निकाले गए होते हैं। ऐसे फल पाचन अग्नि को मंद करते हैं, जिससे खाना पेट में सड़ने लगता है।

आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ भोजन जैसे दाल, रोटी, चावल आदि पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लेते हैं, जबकि उसके उलट फल मुलायम और अलग-अलग तासीर के होते हैं और खाने की तुलना में फलों को पचने में कम समय लगता है। ऐसे में दोनों अलग-अलग तरह का आहार पचने की बजाय सड़ने लगता है और शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। इससे गैस, कब्ज, भारीपन, अम्लता और शरीर में विषाक्त पदार्थों का जमाव ज्यादा होने लगता है और शरीर रोगों से ग्रस्त हो जाता है।

फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण कभी मिलता है, जब दोनों को अलग-अलग समय पर खाया जाए। फल और भोजन विशुद्ध आहार होते हैं। ऐसे में दोनों को अलग-अलग खाना ही बेहतर होता है। आयुर्वेद भोजन को केवल स्वाद नहीं, एक विज्ञान मानता है जहां समय, मात्रा और संयोजन तीनों का समान महत्व है।

फल खाने के लिए सुबह और शाम का समय बहुत अच्छा होता है। आप चाहें तो सुबह खाली पेट फल भी खा सकते हैं, लेकिन सुबह के वक्त खट्टे फल खाने से बचें, क्योंकि खट्टे फल गैस और जलन को बढ़ा सकते हैं।

शाम के समय सूरज ढलने से पहले भी फलों का सेवन किया जा सकता है, लेकिन बात का विशेष ध्यान रखें कि फलों को दूध या दही के साथ न खाएं। आयुर्वेद इसे विरुद्ध आहार मानता है और फल खाने के तकरीबन 1 घंटे तक भोजन न करें। फलों के पच जाने के बाद भोजन किया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीएस/वीसी

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