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IPL में KKR की कप्तानी पर Ajinkya Rahane का मंत्र, 'शांति और सकारात्मकता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत'

 पिछले साल के निराशाजनक प्रदर्शन और टीम में कई बदलाव करने के बावजूद कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने कप्तान अजिंक्य रहाणे पर अपना भरोसा बरकरार रखा है, जिन्होंने शुक्रवार को यहां कहा कि वह शांति और सकारात्मकता के साथ जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। रहाणे ने पिछले सत्र में 390 रन बनाए लेकिन उनकी टीम केवल पांच मैच ही जीत पाई और आखिर में आठवें स्थान पर रही। इस अनुभवी बल्लेबाज ने कहा कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है और वह सही मानसिकता के साथ चुनौतियों का सामना करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

रहाणे ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हर साल, एक खिलाड़ी और कप्तान के रूप में अलग-अलग चुनौतियां सामने आती हैं। मैंने अपने पूरे सफर में यही सीखा है कि चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों न हों, हर बार सकारात्मक रहना चाहिए।’’ इस 37 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं पिछले साल से टीम का नेतृत्व कर रहा हूं और फ्रेंचाइजी का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझे टीम का नेतृत्व करने की यह जिम्मेदारी दी।

मैं हर चीज को सहजता से ले रहा हूं, हर चीज को सकारात्मक तरीके से ले रहा हूं। अवसर हमेशा होते हैं, चुनौतियां भी होती हैं, लेकिन आपको हमेशा अवसर नजर आते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अपने पूरे करियर में मेरी मानसिकता हमेशा यही रही है कि अगर मुझे कोई चुनौती नजर आती है तो मैं उसे सकारात्मक तरीके से लेता हूं तथा एक खिलाड़ी और एक कप्तान के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करता हूं।

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Gangaur Festival 2026: राजस्थान का लोकोत्सव है गणगौर पर्व

राजस्थानी परम्परा के लोकोत्सव अपने में एक विरासत को संजोए हुए हैं। राजस्थान को देव भूमि कहा जाय तो गलत नहीं होगा। यहां सभी सम्प्रदाय फले फूले हैं। यहाँ के शासकों ने विश्व कल्याण की भवना से अभिभूत होकर लोक मान्यताओं का सम्मान किया है। इसी कारण यहां सभी देवी देवताओं के उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाये जाते हैं। गणगौर का उत्सव भी ऐसा ही लोकोत्सव है। जिसकी पृष्ठ भूमि पौराणिक है। समय के प्रभाव से उनमें शास्त्राचार के स्थान पर लोकाचार हावी हो गया है। परन्तु भाव भंगिमा में कोई कमी नहीं आई है। 
 
गणगौर भी राजस्थान का ऐसा ही एक प्रमुख लोक पर्व है। लगातार 17 दिनों तक चलने वाला गणगौर का पर्व मूलतः कुंवारी लड़कियों व महिलाओं का त्यौंहार है। राजस्थान की महिलाएं चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हो गणगौर के पर्व को पूरी उत्साह के साथ मनाती है। विवाहिता एंव कुवारी सभी आयु वर्ग की महिलायें गणगौर की पूजा करती है। होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां प्रतिदिन प्रातः काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं। जिस लड़की की शादी हो जाती है वो शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है। 

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गणगौर एक प्रमुख त्योहार है। यह मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में मनाया जाता है। गणगौर दो शब्दों गण और गौर से बना है। इसमें गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती से है। इस दिन अविवाहित कन्याएं और विवाहित स्त्रियां भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करती हैं। साथ ही उपवास रखती हैं। कई क्षेत्रों में भगवान शिव को ईसर जी और देवी पार्वती को गौरा माता के रूप में पूजा जाता है। गौरा जी को गवरजा जी के नाम से भी जाना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार श्रद्धाभाव से इस व्रत का पालन करने से अविवाहित कन्याओं को इच्छित वर की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों के पति को दीर्घायु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गणगौर उत्सव दो दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है। सरकारी कार्यालयों में आधे दिन का अवकाश रहता है। ईसर और गणगौर की प्रतिमाओं की शोभायात्रा राजमहल से निकलती है। इनको देखने बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैनानी उमड़ते हैं। सभी उत्साह से भाग लेते हैं। इस उत्सव पर एकत्रित भीड़ जिस श्रृद्धा एवं भक्ति के साथ धार्मिक अनुशासन में बंधी गणगौर की जय-जयकार करती हुई भारत की सांस्कृतिक परम्परा का निर्वाह करती है उसे देख कर अन्य धर्मावलम्बी भी इस संस्कृति के प्रति श्रृद्धा भाव से ओतप्रोत हो जाते हैं। ढूंढाड़ की भांति ही मेवाड़, हाड़ौती, शेखावाटी सहित इस मरुधर प्रदेश के विशाल नगरों में ही नहीं बल्कि गांव-गांव में गणगौर पर्व मनाया जाता है एवं ईसर-गणगौर के गीतों से हर घर गुंजायमान रहता है।

कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था। उसी की याद में यह त्यौहार मनाया जाता है। गणगौर व्रत गौरी तृतीया चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि को किया जाता है। इस व्रत का राजस्थान में बड़ा महत्व है। कहते हैं इसी व्रत के दिन देवी पार्वती ने अपनी उंगली से रक्त निकालकर महिलाओं को सुहाग बांटा था। इसलिए महिलाएं इस दिन गणगौर की पूजा करती हैं। कामदेव मदन की पत्नी रति ने भगवान शंकर की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया तथा उन्हीं के तीसरे नेत्र से भष्म हुए अपने पति को पुनः जीवन देने की प्रार्थना की। रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो भगवान शिव ने कामदेव को पुनः जीवित कर दिया तथा विष्णुलोक जाने का वरदान दिया। उसी की स्मृति में प्रतिवर्ष गणगौर का उत्सव मनाया जाता है। गणगौर पर्व पर विवाह के समस्त नेगचार व रस्में की जाती है।

होलिका दहन के दूसरे दिन गणगौर पूजने वाली लड़कियां होली दहन की राख लाकर उसके आठ पिण्ड बनाती हैं एवं आठ पिण्ड गोबर के बनाती हैं। उन्हें दूब पर रखकर प्रतिदिन पूजा करती हुई दीवार पर एक काजल व एक रोली की टिकी लगाती हैं। शीतलाष्टमी तक इन पिण्डों को पूजा जाता है। फिर मिट्टी से ईसर गणगौर की मूर्तियां बनाकर उन्हें पूजती हैं। लड़कियां प्रातः ब्रह्ममुहुर्त में गणगौर पूजते हुये गीत गाती हैं:-

गौर ये गणगोर माता खोल किवाड़ी, छोरी खड़ी है तन पूजण वाली।

गीत गाने के बाद लड़कियां गणगौर की कहानी सुनती है। दोपहर को गणगौर के भोग लगाया जाता है तथा कुए से लाकर पानी पिलाया जाता है। लड़कियां कुए से ताजा पानी लेकर गीत गाती हुई आती हैं:-

म्हारी गौर तिसाई ओ राज घाट्यारी मुकुट करो,
बीरमदासजी रो ईसर ओराज, घाटी री मुकुट करो,

म्हारी गौरल न थोड़ो पानी पावो जी राज घाटीरी मुकुट करो।

लड़कियां गीतों में गणगौर के प्यासी होने पर काफी चिन्तित लगती है एवं गणगौर को जल्दी से पानी पिलाना चाहती है। पानी पिलाने के बाद गणगौर को गेहूं चने से बनी घूघरी का प्रसाद लगाकर सबको बांटा जाता है और लड़कियां गीत गाती हैं:-

म्हारा बाबाजी के माण्डी गणगौर, दादसरा जी के माण्ड्यो रंगरो झूमकड़ो,
ल्यायोजी - ल्यायो ननद बाई का बीर, ल्यायो हजारी ढोला झुमकड़ो।

रात को गणगौर की आरती की जाती है तथा लड़कियां नाचती हुई गाती हैं। गणगौर पूजन के मध्य आने वाले एक रविवार को लड़कियां उपवास करती हैं। प्रतिदिन शाम को क्रमवार हर लडकी के घर गणगौर ले जायी जाती है। जहां गणगौर का ’’बिन्दौरा’’ निकाला जाता है तथा घर के पुरुष लड़कियों को भेंट देते हैं। लड़कियां खुशी से झूमती हुई गाती हैं:-

ईसरजी तो पेंचो बांध गोराबाई पेच संवार ओ राज म्हे ईसर थारी सालीछां।

गणगौर विसर्जन के पहले दिन गणगौर का सिंजारा किया जाता है। लड़कियां मेहन्दी रचाती हैं। नये कपड़े पहनती हैं, घर में पकवान बनाये जाते हैं। सत्रहवें दिन लड़कियां नदी, तालाब, कुए, बावड़ी में ईसर गणगौर को विसर्जित कर विदाई देती हुई दुःखी हो गाती हैं:-
गोरल ये तू आवड़ देख बावड़ देख तन बाई रोवा याद कर।

गणगौर की विदाई का बाद कई महिनो तक त्यौहार नहीं आते इसलिए कहा गया है-’’तीज त्यौहारा बावड़ी ले डूबी गणगौर’’। अर्थात् जो त्यौहार तीज (श्रावणमास) से प्रारम्भ होते हैं उन्हें गणगौर ले जाती है। ईसर-गणगौर को शिव पार्वती का रूप मानकर ही बालाऐं उनका पूजन करती हैं। गणगौर के बाद बसन्त ऋतु की विदाई व ग्रीष्म ऋृतु की शुरुआत होती है। दूर प्रान्तों में रहने वाले युवक गणगौर के पर्व पर अपनी नव विवाहित प्रियतमा से मिलने अवश्य आते हैं। जिस गोरी का साजन इस त्यौहार पर भी घर नहीं आता वो सजनी नाराजगी से अपनी सास को उलाहना देती है। ’’सासू भलरक जायो ये निकल गई गणगौर, मोल्यो मोड़ों आयो रे’’।

गणगौर महिलाओं का त्योहार माना जाता है इसलिए गणगौर पर चढ़ाया हुआ प्रसाद पुरुषों को नहीं दिया जाता है। गणगौर के पूजन में प्रावधान है कि जो सिंदूर माता पार्वती को चढ़ाया जाता है महिलाएं उसे अपनी मांग में सजाती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाकर किसी पवित्र सरोवर या कुंड आदि में इनका विसर्जन किया जाता है।

आज आवश्यकता है इस लोकोत्सव को अच्छे वातावरण में मनाये। हमारी प्राचीन परम्परा को अक्षुण बनाये रखे। इसका दायित्व है उन सभी सांस्कृतिक परम्परा के प्रेमियों पर है जिनका इससे लगाव है। जो ऐसे पर्वो को सिर्फ पर्यटक व्यवसाय की दृष्टि से न देखकर भारत के सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से देखने के हिमायती हैं।अब राजस्थान पर्यटन विभाग की वजह से हर साल मनाए जाने वाले इस गणगौर उत्सव में शामिल होने कई देशी-विदेशी पर्यटक भी पहुँचने लगे हैं।

- रमेश सर्राफ धमोरा
(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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  Sports

IPL 2026: Riyan Parag की युवा स्टार वैभव को चेतावनी, Social Media से बिल्कुल दूर रहो

आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) का 19वां संस्करण 28 मार्च से शुरू होने वाला है, और टूर्नामेंट से पहले, कई प्रशंसक 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस युवा सुपरस्टार ने 2025 में आईपीएल में धूम मचा दी थी, जब उन्होंने टूर्नामेंट में शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, भारत अंडर-19 के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए, वैभव एक बार फिर आईपीएल 2026 के लिए राजस्थान रॉयल्स की टीम में शामिल हो गए हैं, और इस बार उन पर काफी उम्मीदों का बोझ है।
 

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इसी संदर्भ में, रॉयल रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने आगे आकर वैभव को सोशल मीडिया से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने मीडियाकर्मियों से भी अनुरोध किया कि वे इस युवा खिलाड़ी को अकेला छोड़ दें और उसे क्रिकेट का आनंद लेने दें। पराग ने कहा कि कप्तान के तौर पर मेरा उसे यही संदेश होगा कि वह ज्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस न करे और मीडिया के चक्कर न लगाए। उसे बस अपने खेल का आनंद लेने दो, और मैं आपसे (मीडिया से) भी यही अनुरोध करूंगा। उसके मैनेजर या किसी और से संपर्क न करें; उसे बस खेलने दें। वह 15-16 साल का बच्चा है, उसे क्रिकेट खेलने दो। वह बहुत अच्छा खेल रहा है और वह देश का नाम रोशन करेगा।
 

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इसके अलावा, पराग ने स्वीकार किया कि वैभव पर दबाव तो आएगा ही, लेकिन उन्होंने युवा खिलाड़ी को बिना किसी दबाव के खुलकर खेलने और अच्छा प्रदर्शन करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने आगे कहा कि निश्चित रूप से, उन पर कुछ दबाव तो आएगा ही, लेकिन मैं उनसे यही कहूंगा कि चाहे कितना भी दबाव हो, जायसवाल उसे संभाल लेंगे क्योंकि वह इस भूमिका को निभाने में सक्षम हैं। वैभव के लिए मेरा बस यही संदेश है कि मैदान पर उतरें और खुलकर खेलें। अगर पहली गेंद पर शॉट लगाने का मौका मिले, तो लगाएं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मुझे नहीं लगता कि पिछले एक साल में किसी युवा खिलाड़ी ने ऐसा प्रदर्शन किया है जैसा उन्होंने किया है। वह हर तरफ रन बना रहे हैं।
Sat, 21 Mar 2026 13:28:40 +0530

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