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Explained | सरकार की स्मार्टफोन में 'Aadhaar' ऐप अनिवार्य करने की तैयारी! जानिए क्यों Apple-Google कर रहे हैं इसका विरोध

भारत सरकार और दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के बीच एक नया विवाद जन्म ले रहा है। केंद्र सरकार अब चाहती है कि देश में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन में 'Aadhaar' ऐप पहले से इंस्टॉल (Pre-installed) हो। हालाँकि, Apple, Samsung और Google जैसी बड़ी कंपनियों ने सुरक्षा और निजता का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब कुछ ही हफ़्तों पहले 'संचार साथी' ऐप को अनिवार्य बनाने के सरकार के फैसले पर भी कंपनियों ने आपत्ति जताई थी। Aadhaar सरकार का बायोमेट्रिक पहचान प्रोग्राम है, जिसमें 1.34 अरब नागरिक रजिस्टर्ड हैं। हालांकि, Apple, Samsung और Google जैसी कंपनियों ने इस मांग का विरोध किया है। यह तब हुआ है, जब कुछ ही हफ़्ते पहले Sanchar Saathi ऐप के लिए भी इसी तरह के आदेश का विरोध हुआ था।

UIDAI का प्रस्ताव: क्या है सरकार की योजना?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आईटी मंत्रालय के जरिए स्मार्टफोन निर्माताओं के सामने यह प्रस्ताव रखा है। उद्देश्य: सरकार का तर्क है कि चूंकि आधार 1.34 अरब नागरिकों की पहचान का मुख्य आधार है, इसलिए ऐप पहले से मौजूद होने पर लोगों को बैंकिंग, टेलीकॉम और एयरपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए इसे अलग से डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा। बदलाव: अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 'Aadhaar' ऐप फोन में उसी तरह मौजूद होगा जैसे कैलकुलेटर या घड़ी जैसे डिफॉल्ट ऐप होते हैं।

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों का विरोध

रिपोर्ट के अनुसार, Manufacturers' Association for Information Technology (MAIT) - जो कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है - ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। खास तौर पर Apple और Samsung ने सुरक्षा और निजता से जुड़ी चिंताएं जताई हैं; ये वही मुद्दे हैं जो पिछले साल Sanchar Saathi ऐप के प्रस्ताव के दौरान भी उठाए गए थे। इसके अलावा, MAIT ने कथित तौर पर कहा कि Aadhaar ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के लिए भारत और निर्यात बाज़ारों के लिए अलग-अलग प्रोडक्शन लाइनें बनानी पड़ेंगी, जिससे लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। 13 जनवरी को भेजे गए एक अंदरूनी ईमेल में, MAIT ने कहा कि यह प्रस्ताव "जनहित में नहीं होगा।"

भारत सरकार फ़ोन पर Aadhaar ऐप क्यों चाहती है?

UIDAI ने इस साल जनवरी में नया Aadhaar ऐप लॉन्च किया था, जिससे यूज़र अपनी निजी जानकारी अपडेट कर सकते हैं, परिवार की प्रोफ़ाइल मैनेज कर सकते हैं और गलत इस्तेमाल से बचने के लिए बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर सकते हैं।

सरकार का तर्क है कि ऐप को पहले से इंस्टॉल करने से लोगों के लिए इसे इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा, क्योंकि उन्हें ऐप को अलग से डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

Aadhaar एक 12 अंकों का खास पहचान नंबर है, जो 1.34 अरब से ज़्यादा भारतीय नागरिकों के बायोमेट्रिक डेटा से जुड़ा हुआ है। इसका इस्तेमाल बैंकिंग, टेलीकॉम और हवाई अड्डों पर पहचान की पुष्टि के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। पहले भी, Aadhaar डेटा लीक होने की वजह से करोड़ों यूज़र्स की निजी जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है। स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों ने कथित तौर पर यह तर्क दिया है कि रूस के अलावा कोई भी देश स्मार्टफ़ोन पर सरकारी ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं करता है।

क्या यह फिर से 'संचार साथी' जैसा ही मामला है?

आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का यह अनुरोध सरकार द्वारा 'संचार साथी' के अनिवार्य आदेश को वापस लेने के कुछ ही हफ़्तों बाद आया है। देखने में, यह स्थिति काफ़ी हद तक वैसी ही लगती है। लेकिन, इसमें कुछ अंतर भी हैं।

'संचार साथी' के मामले में, सरकार ने फ़ोन बनाने वाली कंपनियों पर इस ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। जबकि, आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव किसी आदेश के बजाय एक अनुरोध के तौर पर पेश किया गया था।

यह भी कहा गया था कि 'संचार साथी' ऐप सॉफ़्टवेयर अपडेट के ज़रिए पुराने फ़ोन में भी अपने आप इंस्टॉल हो जाएगा, और यूज़र्स के पास इसे डिसेबल (बंद) करने का कोई विकल्प नहीं होगा। दूसरी ओर, ऐसा लगता है कि सरकार ने आधार ऐप के लिए इस तरह के किसी भी उपाय पर चर्चा नहीं की है। 'संचार साथी' ऐप का मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम धोखाधड़ी को रोकना और चोरी हुए डिवाइस को ब्लॉक करना था।

क्या और भी ऐप्स आने वाले हैं?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आधार ऐप उन छह सरकारी ऐप्स में से केवल एक है, जिनका स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनियों ने भारत सरकार के सामने विरोध किया है। माना जा रहा है कि इन ऐप्स में से एक 'सचेत' (Sachet) है – जो एक आपदा चेतावनी सेवा है। MAIT ने कथित तौर पर 10 मार्च, 2026 को भारतीय IT मंत्रालय के अधिकारी रविंदर कुमार मीणा को लिखे एक पत्र में 'सचेत' ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। भारत का यह रवैया अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) जैसे अन्य लोकतांत्रिक देशों से बिल्कुल अलग है। ये देश सरकारी ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं करते, बल्कि इसके बजाय वे नियामक ढांचों और स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।

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Middle East War | 'उम्मीद से पहले खत्म होगा युद्ध', हवाई तबाही के बाद अब नेतन्याहू ने दिए ईरान में Ground Operation के संकेत

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के तीन हफ्तों तक चले संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अब वह परमाणु शक्ति बनने या मिसाइल विकसित करने की स्थिति में नहीं रहा। नेतन्याहू ने आत्मविश्वास के साथ कहा, "हम जीत रहे हैं और ईरान तबाह हो रहा है। यह युद्ध लोगों की सोच से भी कहीं जल्दी खत्म हो सकता है।"

परमाणु और मिसाइल क्षमता 'शून्य' होने का दावा
विदेशी मीडिया से बातचीत करते हुए नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने सीधे उन 'नसों' पर प्रहार किया है जो ईरान की सैन्य मशीनरी को चलाती थीं।नेतन्याहू ने कहा कि उन फैक्ट्रियों को चुन-चुनकर नष्ट किया जा रहा है जो मिसाइलों और परमाणु हथियारों के लिए जरूरी पुर्जे बनाती हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, ईरान के पास अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की क्षमता बची है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की। ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडार को "बड़े पैमाने पर कमजोर" कर दिया गया है और अंतिम लक्ष्य इसे पूरी तरह खत्म करना है।

अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोप को नकारा
नेतन्याहू ने उन सुझावों को सिरे से खारिज कर दिया कि इजरायल ने वाशिंगटन को इस संघर्ष में घसीटा है। उन्होंने कहा, "क्या सचमुच किसी को ऐसा लगता है कि कोई राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप को यह बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए? अरे, ऐसा बिल्कुल नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति "हमेशा वही फैसले लेते हैं, जो उन्हें अमेरिका के लिए सबसे अच्छे लगते हैं।"

उन्होंने कहा, "इस मामले में, अमेरिका के हित बिल्कुल स्पष्ट हैं। और हमारी उपलब्धियां भी उतनी ही स्पष्ट हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर, अमेरिका और इजरायल के बीच घनिष्ठ तालमेल से, हमारी सेनाओं और हमारी खुफिया एजेंसियों के सहयोग से, हम बिजली की गति से अपने लक्ष्य हासिल कर रहे हैं।"

मैं ज़िंदा हूँ: नेतन्याहू ने अफवाहों का मज़ाक उड़ाया, अमेरिका के साथ गठबंधन की तारीफ की
अपने संबोधन की शुरुआत में अपनी सेहत को लेकर चल रही अटकलों पर चुटकी लेते हुए नेतन्याहू ने कहा, "सबसे पहले, मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि मैं ज़िंदा हूँ।" इसके बाद उन्होंने वाशिंगटन के साथ तालमेल की तारीफ की और अमेरिका-इजरायल की साझेदारी को बेहद अहम बताया।

उन्होंने कहा, "हम पूरे मध्य-पूर्व की रक्षा कर रहे हैं – और मैं तो यहाँ तक कहूँगा कि हम पूरी दुनिया की रक्षा कर रहे हैं।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि ईरान के मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच "पूरी तरह से एक जैसी" है, और उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ट्रंप की "गहरी ऋणी" है।
 
नेतन्याहू: इज़राइल ने अकेले कार्रवाई की, गैस ठिकानों पर हमले रोके
नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप के अनुरोध के बाद इज़राइल ईरान के बड़े गैस ठिकानों पर आगे और हमले नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इज़राइल के हमले को मंज़ूरी दी थी, तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल ने स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की। उन्होंने कहा, "पहला तथ्य यह है कि इज़राइल ने साउथ पार्स गैस परिसर के खिलाफ अकेले कार्रवाई की। दूसरा तथ्य यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए कहा, और हम उन्हें रोक रहे हैं।"

नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व के भीतर तनाव के संकेतों की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि शासन में दरारें दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा, "काश मैं उन सभी बातों का खुलासा कर पाता," और साथ ही यह भी जोड़ा कि जहाँ एक ओर इज़राइल इस शासन के पतन के लिए परिस्थितियाँ बनाने का काम कर रहा है, वहीं "हो सकता है कि यह बच जाए, और यह भी हो सकता है कि यह न बचे।"

युद्ध का दायरा बढ़ सकता है; नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है
हालाँकि अब तक यह युद्ध हवाई हमलों के ज़रिए ही लड़ा गया है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि ज़मीनी कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। उन्होंने विस्तार से कुछ भी बताए बिना कहा, "इस ज़मीनी पहलू को लेकर कई संभावनाएँ मौजूद हैं।"

उन्होंने ईरान के नेतृत्व के भीतर अस्थिरता के संकेतों की ओर भी इशारा किया। शीर्ष अधिकारियों के बीच "काफी तनाव" का हवाला देते हुए नेतन्याहू ने कहा, "मुझे पक्का नहीं पता कि इस समय ईरान का शासन कौन चला रहा है।"

हालाँकि तनाव काफी बढ़ गया है, फिर भी उन्होंने कहा कि अभी यह अनुमान लगाना जल्दबाज़ी होगी कि क्या इस संघर्ष के परिणामस्वरूप कोई विद्रोह भड़क उठेगा। उन्होंने कहा, "यह तो ईरान की जनता को ही दिखाना होगा; उन्हें ही सही समय चुनना होगा और उस समय के अनुरूप कदम उठाना होगा।"

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  Sports

PSL 2026: तालिबान के हमलों से डरा पाकिस्तान, बंद दरवाजे के पीछे खेला जाएगा पीएसएल, 2 शहरों में होंगे मैच

Pakistan Super league: पाकिस्तान सुपर लीग 2026 को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने घोषणा की है कि इस बार टूर्नामेंट तय समय यानी 26 मार्च से शुरू होगा, लेकिन शुरुआती मैच बिना दर्शकों के खेले जाएंगे। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के चलते लिया गया। इसके अलावा पाकिस्तान का तालिबान से चल रहा संघर्ष भी इसकी एक वजह है। 

पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीएसएल पाकिस्तान की शान है और इसे किसी भी हाल में रद्द नहीं किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए स्टेडियम में दर्शकों की एंट्री पर रोक लगाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार लीग को सिर्फ दो शहरों, कराची और लाहौर तक सीमित रखा गया है।

बंद दरवाजे के पीछे होगा पीएसएल
नकवी ने साफ किया कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि सरकार द्वारा लागू किए गए खर्च में कटौती के तहत लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विदेशी खिलाड़ी पाकिस्तान पहुंचना शुरू कर चुके हैं और टूर्नामेंट सुचारु रूप से आयोजित होगा।

पीएसएल का ओपनिंग सेरेमनी नहीं होगी
इस बार पाकिस्तान सुपर लीग का उद्घाटन समारोह भी रद्द कर दिया गया है, जो आमतौर पर काफी भव्य होता है। बोर्ड ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अनावश्यक खर्च से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

दर्शकों की गैरमौजूदगी से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए पीसीबी ने खास योजना बनाई है। बोर्ड आठों फ्रेंचाइजियों को अनुमानित गेट मनी देने की कोशिश करेगा, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। पहले से तय शहरों- फैसलाबाद, रावलपिंडी, पेशावर और मुल्तान- में मैच न होने के बावजूद फ्रेंचाइजियों को मुआवजा देने की बात कही गई है।

पीएसएल के सीईओ सलमान नसीर भी इस दौरान मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि लीग लगातार आगे बढ़ रही है और इसका स्तर बेहतर हो रहा है। नकवी ने यह भी बताया कि कुछ खिलाड़ियों द्वारा पीएसएल छोड़कर आईपीएल में शामिल होने के मामलों को पीसीबी का लीगल विभाग देखेगा और जरूरी कार्रवाई करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कई शीर्ष स्तर के खिलाड़ी PSL से जुड़ रहे हैं, जो इस लीग की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है।

कुल मिलाकर, पीएसएल 2026 ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में बिना दर्शकों के मैच कराने का फैसला असामान्य जरूर है, लेकिन PCB इसे लीग को जारी रखने के लिए जरूरी कदम मान रहा है। अब देखना होगा कि यह टूर्नामेंट मैदान पर कितना सफल रहता है और खिलाड़ियों के प्रदर्शन से फैंस का मनोरंजन कितना हो पाता है।

Sun, 22 Mar 2026 17:26:42 +0530

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