बेटियों की पढ़ाई को लगेंगे पंख, गुजरात सरकार दे रही है मुफ्त साइकिल, जानें कैसे करें अप्लाई
गुजरात सरकार ने राज्य की जनजातीय यानी अनुसूचित जनजाति की बेटियों के लिए एक बेहतरीन कदम उठाया है. जनजातीय विकास विभाग द्वारा 'विद्या साधना योजना' शुरू की गई है. इस योजना का सीधा फायदा उन छात्राओं को मिलेगा जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं और जिन्हें स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. सरकार का मानना है कि अक्सर लंबी दूरी और आने-जाने के साधनों की कमी की वजह से बेटियां कक्षा 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं. इसी समस्या को खत्म करने के लिए कक्षा 9वीं की छात्राओं को मुफ्त साइकिल देने का प्रावधान किया गया है.
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?
विद्या साधना योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं. सबसे पहले तो आवेदक छात्रा गुजरात की मूल निवासी होनी चाहिए. यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की छात्राओं के लिए ही है. लाभ लेने के लिए छात्रा का किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 9वीं में पढ़ना अनिवार्य है. इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्रा के परिवार की कुल सालाना आय 6,00,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर कोई छात्रा इन सभी शर्तों को पूरा करती है, तो वह साइकिल के लिए आवेदन कर सकती है.
आवेदन की पूरी प्रक्रिया
इस योजना के लिए आवेदन करने का तरीका पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है. इसके लिए छात्राओं को 'डिजिटल गुजरात पोर्टल' की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा. सबसे पहले पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज कर रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद यूजर नेम और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा. लॉगिन करने के बाद 'माय प्रोफाइल' सेक्शन में जाकर अपनी पूरी जानकारी अपडेट करनी होगी. प्रोफाइल अपडेट होने के बाद 'स्कॉलरशिप सर्विसेज' के अंदर 'एससी स्कीम' (SC Scheme) का चुनाव करना होगा. यहां योजना को चुनकर फॉर्म भरना होगा और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे.
जरूरी दस्तावेज और सावधानी
योजना का फॉर्म भरते समय छात्राओं को कुछ दस्तावेज अपने पास तैयार रखने होंगे. इनमें आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र शामिल हैं. फॉर्म भरते समय इस बात का खास ख्याल रखना है कि एक छात्रा केवल एक ही आवेदन कर सकती है. अगर एक से ज्यादा आवेदन पाए गए, तो उन्हें तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा. साथ ही, जो दस्तावेज अपलोड किए जाएंगे, वे बिल्कुल साफ होने चाहिए. अगर दस्तावेज पढ़ने में नहीं आए, तो आवेदन खारिज हो सकता है. फोटो अपलोड करना भी अनिवार्य है. एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद स्कूल या संस्थान बदलने की कोई सुविधा नहीं मिलेगी, इसलिए सावधानी से फॉर्म भरें.
दूर होगी पढ़ाई की बाधा
गुजरात के कई आदिवासी और ग्रामीण इलाके ऐसे हैं जहां स्कूल घर से कई किलोमीटर दूर होते हैं. ऐसे में छात्राओं के लिए पैदल स्कूल जाना काफी थकावट भरा और मुश्किल होता है. मुफ्त साइकिल मिलने से न सिर्फ उनका समय बचेगा, बल्कि वे सुरक्षित और आसानी से स्कूल पहुंच सकेंगी. सरकार की इस योजना से राज्य में महिला साक्षरता दर बढ़ने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो छात्राएं राज्य के अंदर पढ़ रही हैं, उन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. यह योजना आदिवासी समाज की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है.
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2014-15 से रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट आई: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि भारतीय रेल से जुड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी गिरावट आई है, और गंभीर दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है।
बुधवार को लोकसभा में लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, और निरंतर उपायों से परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि गंभीर रेल दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 (28 फरवरी तक) में मात्र 14 रह गई है।
मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चला कि 2004-05 से 2013-14 के दौरान 1,711 गंभीर रेल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 904 लोगों की मौत हुई और 3,155 लोग घायल हुए। 2014-15 से 2023-24 के बीच यह संख्या घटकर 678 दुर्घटनाएं रह गई, जिनमें 748 लोगों की मौत हुई और 2,087 लोग घायल हुए।
उनके अनुसार, 2024-25 में ऐसी 31 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 92 लोग घायल हुए, जबकि 2025-26 (फरवरी तक) में 14 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 16 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए।
वैष्णव ने यह भी बताया कि दुर्घटनाओं में कमी कई सुरक्षा पहलों का परिणाम है, जिनमें बेहतर ट्रैक रखरखाव, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और तकनीकी उन्नयन शामिल हैं।
सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर व्यय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रुपए हो गया है, और 2026-27 के लिए 1,20,389 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
मानवीय त्रुटि को कम करने के लिए, 6,665 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जबकि 10,153 से अधिक लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है।
6,669 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग लागू की गई है, जो विद्युत माध्यम से ट्रैक पर यात्रियों की उपस्थिति की पुष्टि करने में सहायक है।
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (एटीपी) कवच को 2020 में राष्ट्रीय प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच के नवीनतम संस्करण को 1,452 किलोमीटर मार्गों पर लागू किया गया है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख व्यस्त मार्ग शामिल हैं।
वैष्णव ने कहा कि प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश से भारतीय रेलवे को सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल रही है।
--आईएएनएस
एमएस/
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