रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बदलते वैश्विक परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियों के बीच भारत को ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया है। नयी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने रूस यूक्रेन और ईरान इजराइल के बीच चल रहे संघर्षों का उल्लेख किया और कहा कि इन युद्धों ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इन संघर्षों को देख रही है और यह समझ रही है कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक हथियारों के साथ साथ उन्नत तकनीक आधारित प्रणालियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन तकनीक ने युद्ध को अधिक सटीक, प्रभावी और कम जोखिम वाला बना दिया है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को मजबूत करे और बाहरी निर्भरता को कम करे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को एक ऐसा मजबूत और व्यापक ड्रोन निर्माण तंत्र विकसित करना चाहिए जिसमें देश पूरी तरह आत्मनिर्भर हो। उनका मानना है कि रक्षा तैयारी और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके हर घटक स्तर तक पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ड्रोन निर्माण में सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और डिजाइन जैसे सभी महत्वपूर्ण हिस्से भारत में ही विकसित और निर्मित होने चाहिए। इस दिशा में उद्योग जगत, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अनुसंधान संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। सम्मेलन में देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों और सरकारी उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनसे रक्षा मंत्री ने इस दिशा में ठोस पहल करने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि यह कार्य आसान नहीं है। दुनिया के कई विकसित देशों में भी ड्रोन निर्माण के लिए कुछ महत्वपूर्ण घटक अन्य देशों से आयात किए जाते हैं। इसके बावजूद भारत को इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपनी तकनीकी क्षमता को मजबूत करना होगा।
उन्होंने आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम मेधा, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार ये तकनीकें न केवल रक्षा क्षेत्र बल्कि पूरे विनिर्माण क्षेत्र को बदल रही हैं। सिमुलेशन तकनीक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे डिजाइन और परीक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत से अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि भारत उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उत्पाद विकसित करता है तो वह न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिये से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब तक देश रक्षा उपकरणों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहेगा, तब तक उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
इस संदर्भ में उन्होंने उद्योग, सरकार और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि यदि सभी हितधारक मिलकर काम करें तो भारत ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन सकता है।
बहरहाल, रक्षा मंत्री का यह संदेश स्पष्ट है कि बदलते युद्ध परिदृश्य में भारत को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनना ही होगा, और ड्रोन निर्माण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में वैश्विक घटनाक्रम, ऊर्जा सुरक्षा, विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए भारत की नीतियों और प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया।
सबसे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा पकड़े गए छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक के मामले पर प्रवक्ता ने कहा कि यह एक कानूनी विषय है और इसकी जांच जारी है। उन्होंने बताया कि भारत में कुछ क्षेत्र प्रतिबंधित और संरक्षित होते हैं जहां यात्रा के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। संबंधित व्यक्तियों के पास यह अनुमति थी या नहीं, यह अब न्यायालय में स्पष्ट होगा। साथ ही, भारत ने संबंधित देशों के साथ दूतावास स्तर पर संपर्क बनाए रखा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भारत और अमेरिका के बीच सहयोग पर भी प्रकाश डाला गया। प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक कार्य समूह बना हुआ है जो इस साझा चुनौती से निपटने के लिए संस्थागत संवाद का माध्यम है। पाकिस्तान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उसकी गतिविधियां वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय हैं और वह कई देशों के लिए खतरा बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों पर असर के बीच भारतीय नाविकों की स्थिति पर भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े नाविक समुदायों में से एक है और वर्तमान में 22 जहाजों पर 611 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। कई नाविक सुरक्षित लौट आए हैं, जिनमें घायल 15 नाविक भी शामिल हैं। सरकार लगातार कंपनियों के संपर्क में है ताकि सभी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बारे में प्रवक्ता ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के हमलों और जलडमरूमध्य के बंद होने से गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत विभिन्न देशों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके और आपूर्ति बाधित न हो। साथ ही घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है।
ईरान में फंसे भारतीय छात्रों के मुद्दे पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में छात्र, जिनमें कश्मीर की छात्राएं भी शामिल हैं, वहां चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। सरकार उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी है और सलाह दी गई है कि सीमा पार करने से पहले दूतावास से संपर्क करें। आने वाले दिनों में सभी छात्रों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद जताई गई है।
मध्य पूर्व में ऊर्जा संरचनाओं पर ईरानी हमलों की निंदा करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि नागरिक और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। ऐसे हमले वैश्विक ऊर्जा संतुलन को और अस्थिर करते हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।
ब्रिक्स के संदर्भ में प्रवक्ता ने कहा कि इसकी सदस्यता और अन्य समूहों की सदस्यता अलग अलग श्रेणियां हैं, इसलिए सर्वसम्मति बनाने में कुछ कठिनाइयां आती हैं।
भारत की ऊर्जा नीति पर उन्होंने कहा कि देश विभिन्न स्रोतों से तेल और गैस खरीद रहा है, जिसमें रूस भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध विकल्प अपनाता रहेगा।
ईरान में भारतीय नागरिकों की संख्या पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 9011 भारतीयों का अनुमान था, जिनमें से कई पहले ही लौट चुके हैं। हाल में 882 नागरिकों के लौटने की प्रक्रिया जारी है और अधिकांश तीर्थयात्री भी वापस आ चुके हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों पर आई एक रिपोर्ट को उन्होंने गलत बताया और कहा कि दोनों देश सभी मुद्दों पर निकट संपर्क में हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अमेरिकी राजदूत के बीच बातचीत को सामान्य कूटनीतिक संवाद बताया गया। वहीं विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के नेताओं से बातचीत कर स्थिति पर विचार विमर्श किया है। प्रधानमंत्री ने भी ओमान, फ्रांस और मलेशिया के नेताओं से चर्चा की है और शांति तथा संवाद पर जोर दिया है।
पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की और इसे नागरिकों के खिलाफ अमानवीय कार्रवाई बताया। साथ ही पड़ोसी देशों को ऊर्जा आपूर्ति पर प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों की सहायता करता रहेगा। अंत में चाबहार बंदरगाह पर मिली अस्थायी छूट और पश्चिम एशिया संकट पर भारत की स्थिति को दोहराते हुए प्रवक्ता ने कहा कि भारत लगातार तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहेगा।
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