"संजू सैमसन राजस्थान रॉयल्स का चेहरा...", IPL 2026 से पहले फाफ डु प्लेसिस ने कह दी ये बड़ी बात
IPL 2026: आईपीएल 2026 की शुरुआत 28 मार्च से होगी. जोरो-शोरो से टूर्नामेंट की तैयारियां चल रही है. पिछले सीजन से इस बार सभी 10 टीमों के स्क्वाड में ज्यादा बदलाव नहीं नहीं आएगा, लेकिन आईपीएल 2026 का एक बदलाव जिसपर सभी की नजरें रहने वाली है. वो है संजू सैमसन का राजस्थान रॉयल्स छोड़ चेन्नई सुपर किंग्स में जाना है. अब इसपर साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज फाफ डु प्लेसिस का रिएक्शन सामने आया है, जिसमें उन्होंने इसे राजस्थान रॉयल्स के लिए नुकसान बताया है.
संजू सैमसन को लेकर फाफ डु प्लेसिस ने कही बड़ी बात
फाफ डु प्लेसिस ने आईपीएल 2026 शुरू होने से कुछ दिन पहले जियो हॉटस्टार के साथ बातचीत करते हुए कहा कि अगर हम सभी आईपीएस टीमों को देखें तो ज्यादातर टीमों के पास एक ऐसा खिलाड़ी जरूर है, जो उनके लिए पिछले काफी सालों से खेल रहा है. इन प्लेयर्स में एमएस धोनी, रोहित शर्मा और विराट कोहली का नाम शामिल हैं, जिनकी टीम का नाम लेते ही सबसे पहले उनका चेहरा सामने आता है. संजू सैमसन इसी तरह से राजस्थान रॉयल्स का चेहरा थे. उनके जाने से राजस्थान रॉयल्स को नुकसान होगा. संजू भले ही नए पीढ़ी के खिलाड़ी हैं, लेकिन वो राजस्थान टीम का चेहरा बन गए थे. इसलिए मुझे लगता है कि उनके जाने के बाद राजस्थान रॉयल्स के लिए फैंस को जोड़े रखना आसान नहीं होने वाला है.
संजू सैमसन के जाने से यशस्वी जायसवाल पर होगा दवाब - डु प्लेसिस
राजस्थान रॉयल्स को लेकर फाफ डु प्लेसिस ने आगे कहा कि संजू सैमसन के जाने के बाद सबसे ज्यादा दवाब यशस्वी जायसवाल पर पड़ेगा, जो उनके रहते हुए अपना स्वाभाविक गेम खेलते थे, लेकिन अब यशस्वी के लिए ऐसा करना आसान नहीं होने वाला है. उन्हें अब जिम्मेदारी से खेलने होगा, जो उनके लिए आसान नहीं होगा.
राजस्थान रॉयल्स ने रियान पराग को बनाया कप्तान
संजू सैमसन के जाने के बाद आईपीएल 2026 सीजन शुरू होने से पहले राजस्थान रॉयल्स ने रियान पराग को टीम का कप्तान बनाया है. पराग ने पिछले साल भी संजू की गैरमौजूदगी में शुरुआती सीजन में टीम की कप्तानी की थी. उनकी कप्तानी में RR का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. अब रियान पराग नियमित कप्तान बन गए हैं. राजस्थान ने अपनी पहली व एकमात्र आईपीएल ट्रॉफी 2008 में शेन वॉर्न की कप्तानी में जीती थी. ऐसे में अब पराग की जिम्मेदारी टीम को दूसरी ट्रॉफी दिलाने पर होगी. अब देखने वाली बात होगी कि उनकी कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन कैसा रहता है.
आईपीएल 2026 के लिए राजस्थान रॉयल्स का स्क्वाड
वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जयसवाल, अमन राव पेराला, शिम्रोन हेटमायर, शुभम दुबे, ध्रुव जुरेल, डोनोवन फरेरा, लुआन-ड्रे प्रिटोरियस, रवि सिंह, रवींद्र जड़ेजा, रियान पराग, सैम कुरेन, एडम मिल्ने, ब्रिजेश शर्मा, जोफ्रा आर्चर, कुलदीप सेन, क्वेना मफाका, नंद्रे बर्गर, रवि बिश्नोई, संदीप शर्मा, सुशांत मिश्रा, तुषार देशपांडे, विग्नेश पुथुर, यश राज पुंजा, युद्धवीर सिंह चरक
आईपीएल 2026 में 30 मार्च को अपना पहला मैच खेलेगी राजस्थान रॉयल्स
आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स की अपना पहला मैच 30 मार्च को खेलने उतरेगी. राजस्थान रॉयल्स का सामना चेन्नई सुपर किंग्स से होगा. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला गुवाहाटी के बारासापारा स्टेडियम में खेला जाएगा. इसके बाद 4 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के दूसरे मैच में गुजरात टाइटंस से भिड़ंत होगी. यह मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा.
30 मार्च - राजस्थान रॉयल्स बनाम चेन्नई सुपर किंग्स, बारासापारा स्टेडियम
4 अप्रैल - गुजरात टाइटंस बनाम राजस्थान रॉयल्स, नरेंद्र मोदी स्टेडियम
7 अप्रैल - राजस्थान रॉयल्स बनाम मुंबई इंडियंस, बारासापारा स्टेडियम
10 अप्रैल - राजस्थान रॉयल्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, बारासापारा स्टेडियम
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मध्य पूर्व संघर्ष का असर: ऊर्जा कीमतों में उछाल से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर संकट
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से पाकिस्तान की नाजुक अर्थव्यवस्था को एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान आयातित ईंधन पर बहुत ज्यादा निर्भर है, और इस संघर्ष के चलते ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं, जो अब मध्य पूर्व के कई देशों में फैल चुका है।
अगर यह युद्ध लंबा चलता है और ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो पाकिस्तान को फिर से व्यापक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो उसकी विकास की गति को बाधित करेगा। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से जीडीपी पर असर पड़ सकता है और अर्थव्यवस्था, जो हाल ही में वर्षों की अस्थिरता के बाद संभलनी शुरू हुई थी, फिर धीमी पड़ सकती है।
कराची के डॉन अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, “युद्ध के प्रभाव केवल तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में व्यवधान तक सीमित नहीं रहेंगे। लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष विदेश से आने वाले धन (रेमिटेंस) के प्रवाह को भी कमजोर कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुस्ती के कारण निर्यात मांग को भी कम कर सकता है।”
पेट्रोलियम आयात बढ़ने से आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है, जबकि निर्यात जो जुलाई से फरवरी की अवधि में पहले ही लगभग 8 प्रतिशत गिर चुके हैं, आर्थिक सुस्ती के कारण और कमजोर हो सकते हैं। साथ ही, खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की मंदी, जिनसे पाकिस्तान को अपने कुल रेमिटेंस का आधे से ज्यादा हिस्सा मिलता है, एक नकारात्मक बाहरी झटका दे सकती है। इन सभी दबावों के कारण पाकिस्तान के भुगतान संतुलन घाटे में वृद्धि हो सकती है।
यदि ये रुझान जारी रहते हैं तो चालू खाता घाटा काफी बढ़ सकता है। यह स्थिति 2022 के संकट की याद दिलाती है, जब वैश्विक तेल और वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को संकट के कगार पर पहुंचा दिया था और पाकिस्तान को आईएमएफ से सहायता लेनी पड़ी थी।
सार्वजनिक स्तर पर इसके प्रभाव और भी गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले हो सकते हैं, क्योंकि वैश्विक तेल की ऊंची कीमतें सीधे पेट्रोल और बिजली की दरों में वृद्धि करती हैं। साथ ही, परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से व्यापक महंगाई को भी बढ़ावा मिलता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें यूक्रेन युद्ध के दौरान देखे गए उच्च स्तर के करीब पहुंचती हैं तो पाकिस्तान फिर से उच्च मुद्रास्फीति के दौर में फंस सकता है, जिसका असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा, जो अभी तक पिछले झटकों से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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