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सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स इस साल एआई चिप रिसर्च और सुविधाओं पर करेगी 73.3 अरब डॉलर का निवेश

सोल, 19 मार्च (आईएएनएस)। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुरुवार को कहा कि वह इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े सेमीकंडक्टर (चिप) के रिसर्च और विकास तथा सुविधाओं पर 110 ट्रिलियन वॉन (करीब 73.3 अरब डॉलर) से ज्यादा निवेश करेगी। कंपनी का लक्ष्य इस तेजी से बढ़ते और प्रतिस्पर्धी उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखना है।

योनहाप न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी ने एक नियामक फाइलिंग में इस योजना का खुलासा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य एआई के बढ़ते उपयोग के बीच इस क्षेत्र में अपनी लीडरशिप मजबूत करना है।

यह निवेश पिछले साल के 90.4 ट्रिलियन वॉन के मुकाबले 21.7 प्रतिशत ज्यादा है और कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सालाना खर्च है। यह पहली बार है जब कंपनी का सालाना निवेश 100 ट्रिलियन वॉन से ज्यादा हो गया है।

कंपनी ने यह भी कहा कि वह रोबोटिक्स, मेडिकल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स और एयर कंडीशनिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) के मौके तलाशेगी।

चिप की बढ़ती मांग को देखते हुए सैमसंग फिलहाल सियोल के दक्षिण में स्थित प्योंगटेक परिसर में अपने पी4 प्लांट में कामकाज को और बेहतर बनाने का काम कर रही है। इसके साथ ही, कंपनी अपने प्रस्तावित पी5 प्रोडक्शन लाइन के लिए जरूरी उपकरण लगाने का काम भी आगे बढ़ा रही है।

इसके अलावा, कंपनी सियोल के दक्षिण में योंगिन में अपने चिप क्लस्टर में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी बना रही है।

अमेरिका में भी सैमसंग टेक्सास के टेलर शहर में एक नई फैक्ट्री बना रही है और इस साल के अंत तक वहां उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी बीच, कंपनी के यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने कहा है कि वे प्रदर्शन-आधारित बोनस को लेकर अगले हफ्ते प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

कर्मचारियों ने बोनस पर सीमा हटाने, 7 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी और बोनस गणना में पारदर्शिता की मांग की है।

यूनियन ने कहा कि 2026 के वेतन समझौते पर कई महीनों से बातचीत चल रही थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। प्रबंधन द्वारा उनकी मांगें न मानने के कारण अब कर्मचारियों ने आंदोलन का फैसला लिया है।

कर्मचारियों ने 23 अप्रैल को प्योंगटेक में प्रदर्शन करने और 21 मई से 7 जून तक हड़ताल करने की योजना भी बनाई है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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जर्मनी में पेट्रोल कीमतों पर नियंत्रण के लिए अपनाया अजब-गजब तरीका

बर्लिन, 19 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल बाजार में आए तेज उछाल का असर अब यूरोप में साफ दिख रहा है। जर्मनी में बढ़ती ईंधन कीमतों पर लगाम लगाने के लिए संसद ने एक असामान्य कदम उठाने की तैयारी की है।

जर्मनी की संसद बुंडेस्टैग में आज एक मसौदा कानून को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके तहत पेट्रोल पंप दिन में केवल एक बार—दोपहर 12 बजे—कीमत बढ़ा सकेंगे। हालांकि, कीमतें किसी भी समय घटाई जा सकेंगी। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर 1 लाख यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इस प्रस्ताव के लागू होने पर पेट्रोल पंपों पर दोपहर से ठीक पहले लंबी कतारें देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि उपभोक्ता बढ़ी कीमतों से बचने के लिए पहले ही ईंधन भरवाने की कोशिश करेंगे।

दरअसल, अमेरिका-इजराइल सैन्य कार्रवाई के बाद जर्मनी उन यूरोपीय देशों में शामिल रहा है जहां ईंधन कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कार्रवाई से पहले के सप्ताह की तुलना में पेट्रोल की कीमतों में 27 सेंट प्रति लीटर और डीजल में 42 सेंट प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि यूरोपीय औसत—पेट्रोल के लिए 20 सेंट और डीजल के लिए 36 सेंट प्रति लीटर—से काफी अधिक है।

जर्मनी सरकार को सलाह देने वाली स्वतंत्र आर्थिक संस्था मोनोपॉलकोमिशन द्वारा संकलित इन आंकड़ों से साफ है कि देश के उपभोक्ता इस वैश्विक तेल संकट का सबसे ज्यादा बोझ झेल रहे हैं।

सोशल डेमोक्रेट्स पार्लियामेंट्री ग्रुप के डिप्टी चेयर आर्मंड जोर्न ने इंडस्ट्री पर प्रॉफिट कमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिल्ड अखबार को बताया, जर्मनी में हमें सप्लाई की समस्या नहीं है, लेकिन प्राइसिंग की साफ दिक्कत है। जोर्न ने कहा कि शायद ही किसी दूसरे यूरोपीय देश में संकट के दौरान उपभोक्ताओं की कीमत पर इतना बड़ा प्रॉफिट कमाया गया हो।

हाई नून रूल (12 बजे वाला नियम) (बुंडेसरात यानी ऊपरी सदन से पास होने के बाद लागू होगा) को लेकर लोग बंटे हुए हैं। फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज (बीडीआई) ने एंटी-ट्रस्ट कानून को सख्त बनाने की आलोचना की है।

--आईएएनएस

केआर/

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