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चीन-रूस ने ईरान को दी घातक टेक्नोलॉजी, पलट गया पूरा युद्ध!

अमेरिका और इजराइल भले ही ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हो लेकिन ईरान के हमलों में इन्हें कितना भारी नुकसान हो रहा है उसने सबको चौंका दिया है। ईरान को यह ताकत कहीं और से नहीं बल्कि रूस और चीन से आ रही है। रूस और चीन ने ऐसा खेल किया है कि अमेरिका इजराइल के हमलों की तुलना में ईरान के हमले ज्यादा तबाही मचा रहे हैं। रूस और चीन कैसे ईरान के लिए चट्टान की तरह काम कर रहे हैं, इसका खुलासा खुद ईरान ने ही कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अराशी ने बहुत बड़ा बयान दिया है। एक मीडिया इंटरव्यू में अराशी ने कहा कि मैं दुनिया के सामने अपने मित्र देशों के साथ सहयोग की संपूर्ण जानकारी नहीं रख सकता। लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि इन मित्र देशों के साथ हमारा पुराना सहयोग रहा है। यह साझेदारी आज भी कायम है और मैं कामना करता हूं कि ईरान से मित्र देशों का सहयोग भविष्य में जारी रहेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह स्वीकार किया है कि रूस और चीन के साथ उनका सहयोग जारी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या युद्ध के दौरान रूस और चीन से ईरान को पलटवार के लिए हथियार मिल रहा है या फिर रूस और चीन ने ईरान को अमेरिकी और इजरायली मिसाइलों को बचाने के लिए रक्षा प्रणालियां सप्लाई की है। 

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दरअसल आधिकारिक तौर पर रूस और चीन ने ईरान पर हमले की निंदा की है। लेकिन साथ ही साथ यह भी कहा है कि वह सीधे तौर पर ईरान को कोई सैन्य मदद नहीं दे रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस और चीन से सीधे सैन्य मदद नहीं मिल रही तो युद्ध के दौरान ये दोनों देश ईरान के साथ कौन सा सहयोग आगे बढ़ा रहे। लेकिन इसे लेकर अब दुनिया में टकराव और तनाव का आकलन करने वाली कंपनी स्पेशल यूरेशिया की हालिया रिपोर्ट में बहुत बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान के युद्ध में चीन और रूस की भूमिका सैन्य नहीं बल्कि तकनीक है। रूस की भूमिका सैन्य नहीं बल्कि तकनीक है। रिपोर्ट में कहा गया कि अपनी 500 से ज्यादा सेटेलाइट्स के जरिए चीन से ईरान को अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की लोकेशन मिल रही है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि चीन ने ईरान को एक नया नेविगेशन सिस्टम यानी जीपीएस उपलब्ध कराया है। जीपीएस की वजह से अमीर रडार ईरानी मिसाइलों के सिग्नल को जाम नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से ईरान की मिसाइलें टारगेट को तबाह करने में कामयाब हो रही हैं। 

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पिछले साल जब ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक युद्ध हुआ था तो अमेरिका ने इसी तकनीक का इस्तेमाल करके ईरानी मिसाइलों को भटका दिया था। लेकिन इस बार ईरान को चीन का जीपीएस सिस्टम मिल गया है। इस सिस्टम की फ्रीक्वेंसी के साथ अमेरिकी फौज छेड़छाड़ नहीं कर पा रही। तो यह रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रूस ने अपनी एक सेटेलाइट पूरी तरह ईरान को सेवा में तैनात कर दी है। यह सेटेलाइट अंतरिक्ष से इजराइली और अमेरिकी सैन्य अड्डों की हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें ले रही है और ईरान को दे रही है। इन तस्वीरों के जरिए सैन्य अड्डों पर तैनाती से लेकर हमलों के बाद नुकसान का सटीक आकलन ईरानी फौज को मिल रहा है। भले ही रूस और चीन ने सीधे तौर पर सैन्य तैनाती नहीं की है। लेकिन ये दोनों ही देश तकनीक के जरिए ईरान को बड़ी मदद पहुंचा रहे हैं। 

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Iran पर होगा अब तक का सबसे बड़ा Attack! Trump के सहयोगी की सीधी चेतावनी, कहा- तैयार रहे तेहरान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि ईरान को एक बार फिर सबसे बड़े हमले का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि खाड़ी युद्ध अमेरिका की शर्तों पर ही समाप्त होगा और वाशिंगटन अपने मिशन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिकी सेना अब तक ईरान में 7,000 से अधिक ठिकानों पर हमला कर चुकी है और गुरुवार को भी पिछले दिन की तरह ही "सबसे बड़ा हमला" किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हमारी क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि ईरान की क्षमताएं लगातार कम हो रही हैं।" उन्होंने आगे कहा कि ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियां पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं। हेगसेथ ने कहा कि खारग द्वीप पर ईरान की सैन्य क्षमताओं पर हमले से अमेरिका को देश के भाग्य पर नियंत्रण मिल जाता है। 

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शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रतिबद्ध

अपनी ब्रीफिंग की शुरुआत करते हुए हेगसेथ ने कहा कि बुधवार को जब ईरान युद्ध में शहीद हुए अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर वापस लाए गए, तब वे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वहां मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि शहीद सैनिकों के परिवारों ने प्रशासन से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि जब तक काम पूरा न हो जाए, तब तक वे रुकें नहीं। हेगसेथ ने कहा कि निश्चित रूप से, हम इसे पूरा करेंगे। हम उनके बलिदान को सम्मान देंगे।

लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की चिंताओं को लेकर मीडिया की आलोचना

अमेरिकी जनता को सीधे संबोधित करते हुए, हेगसेथ ने इस आलोचना का खंडन किया कि संघर्ष एक लंबे युद्ध में तब्दील हो सकता है। उन्होंने मीडिया के कुछ वर्गों पर स्थिति को एक अंतहीन खाई या सदाबहार युद्ध के रूप में चित्रित करने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि सच्चाई इससे कोसों दूर है।

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अमेरिकी लक्ष्य 'योजना के अनुरूप' हैं

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान में अमेरिकी लक्ष्य पहले दिन से अपरिवर्तित रहे हैं और लक्ष्य और योजना के अनुरूप हैं। हेगसेथ के अनुसार, इन लक्ष्यों में मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करना, ईरान के रक्षा-औद्योगिक आधार को ध्वस्त करना, उसकी नौसेना को निष्क्रिय करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए। हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि संघर्ष की शुरुआत के बाद से अमेरिकी सेनाओं पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और एकतरफा ड्रोन हमलों में 90% की कमी आई है। उन्होंने कहा कि नई बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन की ईरान की क्षमता को संभवतः सबसे अधिक नुकसान हुआ है। अधिक जानकारी देते हुए, हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने कम से कम 120 ईरानी नौसैनिक जहाजों को क्षतिग्रस्त या डुबो दिया है, जिससे सतही बेड़ा अब कोई मायने नहीं रखता और ईरान की 11 पनडुब्बियां नष्ट हो चुकी हैं।

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  Sports

Sanju Samson के बाद Riyan Parag बने Rajasthan के नए Captain, बताई Team की भविष्य की Strategy

आईपीएल के नए सीजन से पहले राजस्थान की टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां युवा खिलाड़ी रियान पराग को टीम की कप्तानी सौंपी गई है। बता दें कि यह वही टीम है जिसकी कप्तानी पहले शेन वार्न, राहुल द्रविड़ और हाल के समय में संजू सैमसन जैसे बड़े नाम संभाल चुके हैं।

गौरतलब है कि संजू सैमसन के टीम छोड़ने के बाद राजस्थान को एक नए नेतृत्व की जरूरत थी, जिसे अब रियान पराग के रूप में देखा जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार पराग ने खुद सैमसन को टीम के लिए “अपूरणीय” बताया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टीम नए संयोजन के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

पराग ने साफ किया कि पिछले सीजन में टीम को कई करीबी मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा, जो उनके लिए बड़ा सबक रहा। उन्होंने कहा कि अगर उन छोटे-छोटे पलों में सही फैसले लिए जाते, तो टीम की स्थिति अलग हो सकती थी। ऐसे में इस बार उनका पूरा ध्यान उन्हीं अहम मौकों पर बेहतर निर्णय लेने पर रहेगा।

बता दें कि टीम के संयोजन में इस बार अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की वापसी भी हुई है, जो पहले भी राजस्थान का हिस्सा रह चुके हैं। पराग का मानना है कि जडेजा का अनुभव टीम के लिए काफी अहम साबित होगा, खासकर स्पिन विभाग में जहां उनके साथ रवि बिश्नोई की जोड़ी टीम को मजबूती दे सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार जयपुर और गुवाहाटी की पिचों को ध्यान में रखते हुए स्पिन गेंदबाजी इस बार टीम की बड़ी ताकत बन सकती है। पराग ने कहा कि जडेजा और बिश्नोई की जोड़ी किसी भी परिस्थिति में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती है।

वहीं टीम के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी काफी चर्चा है। बता दें कि वह इस सीजन में ओपनिंग की भूमिका निभा सकते हैं और उनके साथ यशस्वी जायसवाल होंगे। पराग ने इस युवा खिलाड़ी को लेकर कहा कि उन पर ज्यादा दबाव नहीं डाला जाएगा और उन्हें सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देने की सलाह दी जाएगी।

गौरतलब है कि पराग ने अपने करियर के संघर्षों का भी जिक्र किया और कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हीं अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनाया है। उन्होंने राजस्थान प्रबंधन का भी आभार जताया, जिसने मुश्किल समय में उनका समर्थन किया।

मौजूद जानकारी के अनुसार टीम के मुख्य कोच कुमार संगकारा ने भी पराग की कप्तानी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि टीम ने कप्तान चुनने के लिए गंभीर प्रक्रिया अपनाई और अंत में पराग सबसे उपयुक्त विकल्प साबित हुए।
Thu, 19 Mar 2026 21:49:38 +0530

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