Vikram Doraiswami: विक्रम दोरईस्वामी होंगे चीन में भारत के नए राजदूत, ड्रैगन के साथ सुधरेंगे रिश्ते? जानें कौन हैं
Vikram Doraiswami Ambassador China: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी सैन्य गतिरोध और कूटनीतिक जटिलताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को घोषणा की कि वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विक्रम के. दोरईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।
वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम (UK) में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत दोरईस्वामी जल्द ही बीजिंग में अपना नया पदभार संभालेंगे। उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश साल 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद से अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन और मंदारिन भाषा के गहरे जानकार हैं दोरईस्वामी
1992 बैच के आईएफएस अधिकारी विक्रम दोरईस्वामी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का व्यापक अनुभव है। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने कुछ समय तक पत्रकार के रूप में भी कार्य किया था। उनके राजनयिक करियर की शुरुआत 1994 में हांगकांग में तीसरे सचिव के रूप में हुई, जहां उन्होंने 'न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल' से चीनी भाषा (Mandarin) में एक वैकल्पिक डिप्लोमा प्राप्त किया।
इसके बाद, सितंबर 1996 से उन्होंने बीजिंग में चार साल का महत्वपूर्ण कार्यकाल पूरा किया। उनकी भाषाई दक्षता और चीन की जमीनी समझ उन्हें इस संवेदनशील पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बनाती है।
PMO से लेकर लंदन तक का शानदार सफर
विक्रम दोरईस्वामी ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वे विदेश मंत्रालय में प्रोटोकॉल के उप-प्रमुख (समारोह) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी तैनात रहे हैं, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव की जिम्मेदारी निभाई थी। उन्होंने उज्बेकिस्तान (2014) और दक्षिण कोरिया (2015) में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया है।
इसके अलावा, अक्टूबर 2020 से सितंबर 2022 तक वे बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त रहे, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। सितंबर 2022 में उन्होंने ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त का पदभार ग्रहण किया था।
सीमा विवाद के बीच कूटनीतिक चुनौतियां
चीन में राजदूत के रूप में दोरईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में भारी अविश्वास बना हुआ है। पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी की प्रक्रिया और व्यापारिक असंतुलन जैसे मुद्दे उनके सामने मुख्य चुनौती होंगे। मंदारिन, फ्रेंच और कोरियन जैसी कई भाषाओं के जानकार दोरईस्वामी से उम्मीद की जा रही है कि वे बीजिंग के साथ सीधे और प्रभावी संवाद के जरिए भारत के राष्ट्रीय हितों की मजबूती से पैरवी करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वे जल्द ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के लिए बीजिंग रवाना होंगे।
खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाया ट्रंप का ब्लड प्रेशर: ICBM तकनीक और परमाणु जखीरे पर बड़ा खुलासा, क्या निशाने पर है वॉशिंगटन?
नई दिल्ली : ईरान के साथ जारी युद्ध और मिडिल ईस्ट की अस्थिरता के बीच अब पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका की रडार पर आ गया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की खुलकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान को लेकर गंभीर खतरे की चेतावनी दे रही हैं। नीतिगत तौर पर अमेरिका भले ही 'दोस्ती का लॉलीपॉप' दे रहा हो, लेकिन सुरक्षा के स्तर पर वह पूरी तरह 'अलर्ट मोड' में है।
बैलिस्टिक मिसाइल: अमेरिका तक पहुँचने की बढ़ती मारक क्षमता
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार अपनी बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को मजबूत कर रहा है। अमेरिका को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि पाकिस्तान अब इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने की राह पर है, जिसकी जद में सीधे अमेरिका आ सकता है।
इन मिसाइलों में परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने की क्षमता है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (NDC) समेत कई संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए थे।
आतंकवाद: पुराना खतरा अब भी वैश्विक सिरदर्द
पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी चिंता आतंकवाद है। मार्च 2026 की शुरुआत में कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने हाई अलर्ट जारी किया था। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान में सक्रिय TRF, TTP, ISIS-K और अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क न सिर्फ क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये संगठन भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ाकर परमाणु युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिसका उदाहरण अप्रैल 2025 का पहलगाम हमला है।
परमाणु हथियार: "टॉप-टियर न्यूक्लियर थ्रेट" की श्रेणी में पाकिस्तान
अमेरिका की 'एनुअल थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट' में पाकिस्तान को सीधे तौर पर "टॉप-टियर न्यूक्लियर थ्रेट" की श्रेणी में रखा गया है। पहले अमेरिका की चिंता सिर्फ इस बात तक सीमित थी कि परमाणु हथियार कहीं आतंकियों के हाथ न लग जाएं, लेकिन अब चिंता का दायरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान की बढ़ती परमाणु क्षमता खुद एक रणनीतिक खतरे के रूप में देखी जा रही है। अमेरिका 2001 के बाद से लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता रहा है कि पाकिस्तान का परमाणु जखीरा सुरक्षित रहे और इसके लिए उसने कई 'आपातकालीन सैन्य योजनाएं' भी तैयार की हैं।
FATF और आर्थिक दबाव की रणनीति
इन खतरों को देखते हुए अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाए हुए है। पाकिस्तान को FATF की निगरानी में रखना, मिसाइल संस्थानों पर प्रतिबंध लगाना, संपत्तियां फ्रीज करना और "डू नॉट ट्रैवल" जैसी एडवाइजरी जारी करना इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहाँ ट्रंप प्रशासन दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुफिया तंत्र पाकिस्तान के हर कदम की बारीकी से निगरानी कर रहा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi















.jpg)






