पाकिस्तान टीम के पूर्व खिलाड़ी ने अपने ही देश में होने वाले पीएसएल (PSL) को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व खिलाड़ी ने यह भी बताया कि आईपीएल और पीएसएल में जमीन आसमान का अंतर है। उन्होंने आईपीएल (IPL) को पीएसएल (PSL) से बेहतर बताया।
वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स की नई रिपोर्ट सामने आई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी की गई इस रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग 116वीं रही है। वहीं, पिछले तीन साल से युद्ध लड़ रहे इजरायल की रैंकिंग 8वीं और ईरान की 97 रही है। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान भी भारत से आगे है।
Gautam Gambhir Court case: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर अब मैदान के बाहर एक नई लड़ाई लड़ रहे हैं। डिजिटल दुनिया में उनके नाम, चेहरे और आवाज के गलत इस्तेमाल के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला एआई से बने फर्जी वीडियो, डीपफेक और बिना अनुमति कमाई से जुड़ा है।
गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल सूट दायर किया है, जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है। यह केस 2026 में दर्ज हुआ है और इसमें 16 पक्षों को शामिल किया गया है। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियां भी शामिल हैं।
गंभीर की लीगल टीम के मुताबिक, 2025 के आखिर से उनके नाम पर फर्जी कंटेंट तेजी से बढ़ा। इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें AI तकनीक से उनका चेहरा और आवाज बनाकर गलत बयान दिखाए गए। एक फर्जी रेजिग्नेशन वीडियो को 29 लाख से ज्यादा बार देखा गया, जबकि एक और वीडियो में उन्हें सीनियर खिलाड़ियों पर टिप्पणी करते दिखाया गया, जिसे 17 लाख व्यूज मिले।
मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर बिना अनुमति पोस्टर और मर्चेंडाइज बेचे जा रहे थे। गंभीर ने इसे सीधे तौर पर “अनऑथराइज्ड कमर्शियल एक्सप्लॉइटेशन” बताया है।
इस केस में Meta Platforms, X Corp और Google (यूट्यूब) जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी शामिल किया गया है, ताकि कोर्ट के आदेशों को लागू कराया जा सके।
कानूनी रूप से यह मामला कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क्स एक्ट 1999 और कमर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है। गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है, साथ ही सभी फर्जी कंटेंट हटाने और भविष्य में रोक लगाने की अपील की है।
गंभीर ने साफ कहा कि मेरी पहचान, मेरा नाम, चेहरा और आवाज, का गलत इस्तेमाल किया गया। यह सिर्फ निजी मामला नहीं है, बल्कि कानून और गरिमा का सवाल है, खासकर AI के इस दौर में। उन्होंने कोर्ट से यह भी मांग की है कि बिना लिखित अनुमति कोई भी उनके नाम, आवाज या छवि का इस्तेमाल न कर सके, चाहे वह AI, डीपफेक या फेस-स्वैप तकनीक से ही क्यों न हो। साथ ही, तुरंत सभी फर्जी कंटेंट हटाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग भी की गई है।
यह मामला साफ दिखाता है कि AI के दौर में सेलिब्रिटीज की पहचान कितनी असुरक्षित हो गई है और अब इस पर कानूनी लड़ाई तेज होने वाली है।