शिवम दुबे ने T20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद मुंबई जाने के लिए क्यों चुना था ट्रेन यात्रा? अब खुद किया खुलासा
Shivam Dube: भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर बल्लेबाज शिवम ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 चैंपियन बनाने के बाद एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी को हैरान कर दिया. दरअसल फाइनल खेलने के बाद अहमदाबाद से जाने के लिए एक और जहां सभी खिलाड़ी फ्लाइट से घर लौटने की तैयारी में थे, तो वहीं शिवम दुबे ने ट्रेन का सफर चुना. शिवम दुबे ने अपने ट्रेन सफर को लेकर सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी थी.
शिवम दुबे ने ट्रेन से सफर करने का क्यों किया था फैसला
शिवम दुबे टी20 वर्ल्ड कप 2026 चैंपियन बनने के कुछ ही घंटे बाद टीम इंडिया से अलग हो गए थे. सभी खिलाड़ी फ्लाइट से घर जाने वाले थे, लेकिन दुबे जल्दी घर जाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने बिना ज्यादा इंतजार किए ट्रेन से घर जाने का फैसला लिया था. अब शिवम दुबे ने ट्रेन से घर जाने की पीछे की वजह बताई है. उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने फ्लाइट की जगह ट्रेन से मुंबई जाना क्यों चुना.
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दरअसल शिवम दुबे जल्द से जल्द अपनी फैमली से मिलना चाहते थे. उन्होंने बताया कि वो अपने बच्चे और पिता से जल्दी मिलने के लिए काफी बैचेन थे, लेकिन अहमदाबाद से मुंबई के लिए उस वक्त फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी. इसलिए वो बिना इंतजार किए सुबह ही ट्रेन से अहमदाबाद से मुंबई के लिए निकल गए. उन्होंने अपनी वाइफ और एक दोस्त के साथ 3-टियर एसी में सीट बुक की और सुबह 5 बजे की ट्रेन से मुंबई के लिए सफर शुरू कर दी.
Shivam Dube and his wife sharing their train journey experience after winning the T20 World Cup 2026 ????
— Fan Account Richard Kettlebourogh (@RichKettle07) March 18, 2026
A must watch video ???????? pic.twitter.com/KsEPPyuBlU
शिवम दुबे जल्दी पहुंचना चाहते थे घर
शिवम दुबे ने कहा, "कोई फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए मैंने सुबह-सुबह अहमदाबाद से मुंबई के लिए ट्रेन का सफर करने का फैसला किया. हम रोड से भी जा सकते थे, लेकिन ट्रेन ज्यादा फास्ट थी. मैं और मेरी वाइफ और एक दोस्त ने ट्रेन से जाने का फैसला किया. थर्ड एसी टिकट उपलब्ध थे, इसलिए हमने उन्हें बुक करने का निर्णय लिया." हालांकि शिवम दुबे ने पूरी प्लानिंग के साथ ट्रेन सफर करने का फैसला लिया था. अपनी पहचान छिपान के लिए शिवम दुबे ने फेस मास्क, कैप और फूल स्लीव कपड़े पहने थे.
शिवम दुबे के ट्रेन से सफर पर चिंतित थी फैमली
शिवम दुबे ने कहा, "जिनसे भी हमने बात की, फैमली और दोस्त, सभी चिंतित थे. अगर स्टेशन पर या ट्रेन के अंदर कोई मुझे पहचान लेता तो क्या होता? मैंने टोपी, मास्क और पूरी बाजू की टी-शर्ट पहनी थी. ट्रेन सुबह 5:10 बजे थी, इसलिए हमें उम्मीद थी कि उस वक्त प्लेटफार्म पर ज्यादा लोग नहीं होंगे. मैंने अपनी वाइऱ से कहा कि मैं ट्रेन के चलने से 5 मिनट पहले तक गाड़ी में इंतजार करूंगा. उसके बाद मैं ट्रेन में चढ़ने के लिए दौड़ूंगा." दुबे ट्रेन में घुसते ही सबसे ऊपर वाले बर्थ पर चढ़ गए और अपनी पहचान छिपाने के लिए रेलवे के कंबल में छिप गए.
दुबे ने कहा “जब टीटी टिकट चेकर करने आया और उसने पूछा, "शिवम दुबे? वो कौन है, क्रिकेटर?" तो मेरी वाइफ ने तुरंत कहा, "नहीं, नहीं. वो कहाँ से आएगा?" टिकट चेकर आगे बढ़ गया." इस तरह शिवम दुबे ने बिना अपनी पहचान उजागर किए पूरी ट्रेन यात्रा की. हालांकि मुंबई पहुंचकर उन्हें स्टेशन पर पुलिस को बुलाया पड़ा.
???? Shivam Dube on train incident after T20 WC ????#IPL2026pic.twitter.com/JYAgqxAfBR
— Khan (@ccricket713) March 17, 2026
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पाकिस्तान में लगभग 28 प्रतिशत बच्चे नहीं जाते स्कूल, लड़कियों की संख्या ज्यादा: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 18 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान में 5-16 साल की उम्र के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते। चिंता की बात यह है कि लड़कियों पर इसका असर ज्यादा है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, 22 प्रतिशत लड़कों की तुलना में 34 प्रतिशत लड़कियों का स्कूलों में दाखिला नहीं है।
ये असमानताएं पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती हैं, खासकर लड़कियों के मामले में। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि लिंग और भौगोलिक स्थिति किस तरह शिक्षा तक पहुंच को सीमित कर देते हैं।
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने गैलप पाकिस्तान के एचआईईएस सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि दस साल और उससे ज्यादा उम्र के दो-तिहाई पाकिस्तानियों ने कभी न कभी स्कूल में पढ़ाई की है, लेकिन पाकिस्तान में शिक्षा तक पहुंच अभी भी बहुत असमान बनी हुई है।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय साक्षरता दर 63 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 73 प्रतिशत और महिलाओं की 52 प्रतिशत है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी इलाकों में साक्षरता दर 77 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 56 प्रतिशत है। जहां 68 प्रतिशत बच्चों का दाखिला प्राइमरी स्कूल में होता है, वहीं शिक्षा के उच्च स्तरों पर यह संख्या तेजी से घट जाती है। मिडिल स्कूल में केवल 40 प्रतिशत बच्चे पढ़ते हैं, और मैट्रिक (10वीं) तक आते-आते यह संख्या लगभग 30 प्रतिशत रह जाती है।
स्कूलों में शिक्षा जारी रखने वाले छात्रों की संख्या में यह भारी गिरावट उन चुनौतियों को उजागर करती है जिनका सामना उन्हें करना पड़ता है, खासकर ग्रामीण और वंचित इलाकों में। यह सुरक्षा संबंधी चिंताओं, स्कूल की दूरी और बढ़ती अवसर लागतों (जैसे बच्चों की उम्र बढ़ना) जैसी ढांचागत बाधाओं की ओर इशारा करता है। ये बाधाएं ग्रामीण लड़कियों के लिए विशेष रूप से ज्यादा होती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक दबाव, घरेलू जिम्मेदारियां और प्राइमरी के बाद की स्कूली शिक्षा के सीमित विकल्प बच्चों के स्कूलों में पढ़ाई जारी न रखने के मुख्य कारण हैं।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट बताती है कि सामाजिक अपेक्षाओं और कम उम्र में शादी के कारण लड़कियों के लिए ये चुनौतियां और भी बढ़ जाती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में सबसे ज्यादा साक्षरता दर पंजाब प्रांत की है, जो 66 प्रतिशत है, जबकि सिंध की साक्षरता दर 61 प्रतिशत है। खैबर पख्तूनख्वा की साक्षरता दर 55 प्रतिशत है, जबकि बलूचिस्तान की साक्षरता दर केवल 43 प्रतिशत है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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