ट्रैवल व्लॉगर ने खोल दी यूरोप की पोल, इटली की सड़कों पर कूड़ा और पटरी बाजार, देखें तो जरा!
सोशल मीडिया की दुनिया में आए दिन एक से बढ़कर एक वीडियो देखने को मिलते रहते हैं. कुछ वीडियो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें देखने के बाद हर कोई हैरानी जताता है. आपको आज एक ऐसा ही वीडियो दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आपको अपनी ही आंखों पर यकीन नहीं होगा. अब तक आपने देखा होगा कि कुछ यूरोपीय देश ऐसे हैं, जिन्हें देखने से लगता है कि वहां पर तो गरीबी है ही नहीं. लोगों के मन में यह छवि बनी हुई है कि वहां सिर्फ रईस लोग रहते हैं और सब कुछ शीशे की तरह चमकता है, लेकिन ये सब सिर्फ ऊपर-ऊपर से ही दिखाई देता है.
इटली का देसी अंदाज आया सामने
दरअसल, एक ट्रैवल व्लॉगर ने इटली के अंदर की उस तस्वीर को दिखाया है, जो एकदम एशियाई देशों की तरह है. युवती अपने वीडियो में दिखाती है कि इटली के कुछ इलाकों में घर कैसे बने हुए हैं. वह कहती है कि यहां हमारे जैसे ही पुराने और साधारण घर हैं, जबकि दुनिया को इन देशों की इमेज ऐसी दिखाई जाती है जैसे वहां सिर्फ आलीशान महल और अमीरी ही बसी हो. युवती ने साफ किया कि ये भी इटली की एक बड़ी सच्चाई है जिसे अक्सर छिपाया जाता है.
सड़कों पर फेरी और पटरी बाजार
वीडियो में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मंजर तब दिखता है जब युवती को एक सब्जी बेचने वाला मिल जाता है. वह शख्स बिल्कुल हमारे देश की तरह फेरी लगाकर सब्जी और फल बेच रहा होता है. यहां तक कि वहां पर भी लोग वैसे ही मेहनत कर रहे हैं जैसे हमारे यहां छोटे दुकानदार करते हैं. युवती आगे दिखाती है कि इटली में लोग कितनी गंदगी के बीच रहते हैं. वह सड़कों के किनारे पड़े कचरे के ढेरों का नजारा दिखाती है और कहती है कि यहां पर गंदगी काफी ज्यादा है, यह तो बिल्कुल हमारे देश जैसा ही नजारा है.
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दिल्ली की मार्केट जैसा नजारा
युवती आगे बढ़ती है और वहां के लोकल मार्केट्स दिखाती है. वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग सड़क के किनारे पटरी लगाकर कपड़े बेच रहे हैं. यह नजारा बिल्कुल वैसा ही है जैसा दिल्ली में पालिका मार्केट और राजीव चौक के पास मार्केट लगता है. कुछ उसी तरह का बाजार इटली की सड़कों पर नजर आ रहा होता है. वहां भी मोल-भाव और भीड़भाड़ का वही माहौल है जो किसी भी एशियाई देश की मार्केट में देखने को मिलता है.
बदल गई यूरोप को देखने की सोच
वीडियो में युवती ने कई सारी ऐसी चीजों को दिखाया है, जो एक आम सोच को चुनौती देती हैं. दुनिया भर में यह माना जाता है कि अगर कोई यूरोपीय देश है तो वहां वाकई में कहीं पर भी गरीबी, भुखमरी या गंदगी नहीं होगी. लेकिन इस व्लॉगर ने साफ कर दिया कि हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती. यूरोप के देशों में भी मिडिल क्लास और गरीब तबका मौजूद है जो रोजमर्रा की दिक्कतों से जूझता है. फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रहा है.
इटली में तो हमारे जैसे ही हालात हैं….
— kapil bishnoi (@Kapil_Jyani_) March 18, 2026
ये देश बाहर बाहर से ही भव्य और सुंदर दिखते हैं…
अंदरूनी जगहों पर जाकर देखो तो हमसे भी गए गुजरे दिखेंगे…!! pic.twitter.com/kmMVJVnfkB
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केंद्र और यूपी सरकार के बीच हुई बड़ी डील, जानें प्रदेशवासियों के लिए क्या आई खुशखबरी
उत्तर प्रदेश में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक अहम समझौता (एमओयू) हुआ है. इस मौके पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राज्य मंत्री बीवी सोमन्ना और यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह पहल जल जीवन मिशन को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
लाखों गांवों तक पहुंची पेयजल सुविधा
उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा राज्य है, जल जीवन मिशन का सबसे बड़ा लाभार्थी भी बनकर उभरा है. राज्य में पहले हजारों गांव ऐसे थे जहां लोगों को हैंडपंप, तालाब या नदियों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब 85,000 से अधिक गांवों को इस योजना से जोड़ा गया है और पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। इससे ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव आया है.
बीमारियों और मौतों में आई कमी
सरकार के अनुसार, पहले अशुद्ध पानी के कारण कई गंभीर बीमारियां फैलती थीं. खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से हर साल हजारों मौतें होती थीं. लेकिन स्वच्छ जल और शौचालय सुविधाओं के विस्तार के बाद पिछले कुछ वर्षों में इन मौतों में भारी कमी आई है, कई क्षेत्रों में आंकड़ा शून्य तक पहुंच गया है.
शिक्षा पर भी पड़ा सकारात्मक असर
स्वच्छ पेयजल और शौचालयों की उपलब्धता का असर शिक्षा पर भी देखने को मिला है. राज्य के 1.5 लाख से अधिक स्कूलों और लाखों आंगनबाड़ी केंद्रों में अब बच्चों के लिए अलग-अलग शौचालय और पानी की सुविधा उपलब्ध है. इससे स्कूल ड्रॉपआउट रेट में भी कमी आई है.
बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव
बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी अब “हर घर नल” योजना सफलतापूर्वक लागू होती नजर आ रही है. जहां कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहां अब घर-घर जल पहुंच रहा है.
10 साल तक रखरखाव की व्यवस्था
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि परियोजनाओं के पूरा होने के बाद 10 वर्षों तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी. इससे योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न केवल जल संकट को दूर करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव लाएगी. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया गया.
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