LPG Crisis: देश में एलपीजी की खपत में आई 17% की कमी, ईरान युद्ध की वजह से पेट्रोल की मांग 13% बढ़ी
LPG Crisis: ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच युद्ध जारी है, जिस वजह से दुनिया भर में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी होने लगी है. इस बीच, भारत में मार्च के पहले सप्ताह में एलपीजी गैस की खपत 17 प्रतिशत घट गई है. ये आसार वेस्ट एशिया में युद्ध के हालात बनने की वजह से हुआ है. देश के 90 प्रतिशत मार्केट पर काबिज तीन सरकारी कंपनियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में एलपीजी की खपत कम हुई है.
इस बार मार्च में एलपीजी की खपत 1.147 मिलियन टन रही है. वहीं पिछले साल इस महीने 1.387 मिलियन टन एलपीजी की खपत थी. फरवरी के पहले 15 दिन की तुलना में मार्च में 26.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. एक ओर जहां एलपीजी की खपत देश में घटी है तो वहीं पेट्रोल-डीजल की खपत देश भर में बढ़ी है. पेट्रोल की बिक्री 13.2 प्रतिशत से बढ़कर 1.5 मिलियन टन हो गई है तो वहीं डीजल की बिक्री में 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो अब 3.384 मिलियन टन हो गई है.
देश भर में महंगा हो गया खाना
लोकल सर्कल्स सर्वे के अनुसार, कमर्शियल गैस की किल्लत से देशभर में खाना महंगा हो गया है. लागत बढ़ने की वजह से एक सप्ताह के अंदर 57% रेस्टोरेंट्स और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए हैं.
एलपीजी सप्लाई पर सरकार की नजर, 12 हजार छापे
केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि घरेलू एलपीजी गैस की कमी नहीं है. सप्लाई एकदम सामान्य है. सरकार का कहना है कि जमाखोरी और कालाबजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. देश भर में अब तक 12 हजार से अधिक छापे मारे गए हैं. 15 हजार से अधिक सिलेंडरों को जब्त किया गया है. केंद्र सरकार ने आवश्यत वस्तु अधिनियम के तहत राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं.
एलपीजी सप्लाई पर दबाव को कम करने के लिए शहरी क्षेत्रों में रेस्टोरेंट, होटल और अन्य कमर्शियल उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. राज्यों से कहा गया है कि वे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन को बिछाने की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करें. देश में एलपीजी की ऑनलाइन बुंकिंग 94 प्रतिशत तक बढ़ गई है. वहीं रिफाइनरियों से एलपीजी के उत्पादन में 38 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
इस वजह से एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी
इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से 28 फरवरी 2026 को मोर्चा खोल दिया है. दोनों देशों ने एक साथ ईरान के कई सैन्य ठिकानों, परमाणु सुविधाओं, मिसाइल साइटों और नेतृत्व पर सैकड़ों हवाई हमले किए हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई उच्च अधिकारियों की इस्राइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई. इस ऑपरेशन को अमेरिका ने एपिक फ्यूरी नाम दिया है.
युद्ध की वजह से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है, जिस वजह से तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर असर पड़ा है. भारत का 80 से 85 प्रतिशत एलपीजी यहीं से आयात होता है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. भारत की जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक एलपीजी बाहर से ही आता है. इसी अपील की वजह से भारत में एलपीजी किल्लत जैसे हालात बने हैं. भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है. सरकार ने साफ कहा है कि देश में एलपीजी और तेल की कोई कमी नहीं है.
दो जहाज भारत पहुंचे
एक दिन पहले भारतीय जहाज नंदा देवी होर्मुज स्ट्रेट पार करके मंगलवार को गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा. इसमें करीब 46,500 मीट्रिक टन LPG है. सोमवार को शिवालिक जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था, जिसमें करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG था.
भारत और यूरोपीय संघ गतिशील प्रणाली की दिशा में संबंधों को मजबूत करेंगे
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञों ने एक आधिकारिक बयान के अनुसार सतत व जुड़े हुए मोबिलिटी सिस्टम का समर्थन करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, मानक व परीक्षण में भारत‑ईयू सहयोग को और गहरा करने के महत्व पर प्रकाश डाला है।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) अपनी रणनीतिक साझेदारी को भारत‑ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) के तहत और गहरा रहे हैं। इसमें हरी और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में बढ़ता सहयोग सतत मोबिलिटी, टिकाऊ नवाचार पारिस्थितिक तंत्र और भविष्य‑तैयार औद्योगिक साझेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, दूसरा भारत‑ईयू कार्यशाला इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग तकनीकों पर 15–17 मार्च को इटली के जॉइंट रिसर्च सेंटर (जेआरसी), इस्प्रा में आयोजित किया गया।
यह कार्यशाला भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) और यूरोपीय आयोग के अनुसंधान व नवाचार निदेशालय‑सामान्य (डीजी आरटीडी) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई। इसमें यूरोपीय आयोग के जॉइंट रिसर्च सेंटर (जेआरसी), भारत के ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और भारत में ईयू प्रतिनिधिमंडल ने भागीदारी की।
इसमें नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, मानक संस्थाएं, परीक्षण और अनुसंधान संस्थान और भारत व ईयू के उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए ताकि समानीकृत, इंटरऑपरेबल और भविष्य में ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम विकसित करने के मार्गों पर चर्चा की जा सके।
कार्यक्रम में नीति और मानकों के अपडेट, रणनीतिक उद्योग दृष्टिकोण, मेगावाट चार्जिंग सिस्टम, वाहन-से-ग्रिड एकीकरण और द्विदिश चार्जिंग, वायरलेस पावर ट्रांसफर पर तकनीकी सत्रों के साथ-साथ जेआरसी की ईवी और स्मार्ट ग्रिड परीक्षण सुविधाओं के प्रयोगशाला दौरे शामिल थे।
ओपीएसए के सलाहकार/वैज्ञानिक ‘जी’ ने साफ़ मोबिलिटी संक्रमण के लिए भरोसेमंद, इंटरऑपरेबल और भविष्य‑तैयार चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने में भारत‑ईयू सहयगो के महत्व पर जोर दिया।
यूरोपीय आयोग के अनुसंधान व नवाचार निदेशालय‑सामान्य (डीजी आरटीडी) की अंतरराष्ट्रीय सहयोग इकाई की प्रमुख निएनके बुइस्मैन और जेआरसी के वरिष्ठ प्रमुख डॉ. क्रिश्चियन थिएल ने भी अनुसंधान, नवाचार, मानक और परीक्षण में भारत‑ईयू सहयोग को और गहरा करने के महत्व को उजागर किया।
इससे सतत और जुड़े हुए मोबिलिटी सिस्टम की ओर संक्रमण को समर्थन मिल सकेगा।
--आईएएनएस
पीएम
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