आयुर्वेद के पांच सुरक्षा कवच, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। सालों से आयुर्वेद जीवन को निरोगी और स्वस्थ बनाने के सिद्धांतों पर काम कर रहा है। आयुर्वेद का मानना है कि जो कुछ है, वो हमारी प्रकृति और हमारे शरीर के भीतर है।
ऐसे में, अगर निरोगी जीवन जीना है, तो सबसे पहले अपने शरीर को आंतरिक तरीके से साफ रखना जरूरी है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में, जहां समय कम है और तनाव ज्यादा, वहां शरीर और मन दोनों का संतुलन जरूरी है। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए शरीर और मन दोनों का संतुलन जरूरी है, जिसके लिए आयुर्वेद के पांच सुरक्षा कवच को जानना जरूरी है।
आयुर्वेद में पांच सुरक्षा कवचों में पाचन शक्ति (जठराग्नि), नियमित तेल मालिश, मजबूत श्वसन तंत्र, अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता (ओज) और मानसिक स्वास्थ्य को शामिल किया गया है। यदि हम अपनी दिनचर्या में योग, प्राणायाम, संतुलित आहार, अच्छी नींद और सकारात्मक सोच को शामिल करें, तो शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
पहले बात करते हैं पाचन शक्ति की। पाचन शक्ति शरीर का सबसे जरूरी अंग है। अगर यह मंद है तो शरीर रोगों का शिकार होना शुरू हो जाता है और अगर पाचन शक्ति संतुलित है तो शरीर को आहार से मिलने वाला भरपूर पोषण मिलता है। इसके लिए अपने आहार में अलग-अलग रसों को शामिल करें और देसी घी को भी अपने आहार में शामिल करें।
दूसरा नंबर पर है नियमित तेल मालिश। शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने के साथ-साथ ऊपर देखभाल देना भी जरूरी है। त्वचा हमें बाहरी प्रभाव से बचाती है। ऐसे में रोजाना शरीर की तेल मालिश करें। इससे रक्त का संचार बना रहेगा और त्वचा को गहराई से पोषण मिलेगा। तीसरे नंबर पर आता है मजबूत श्वसन तंत्र। श्वसन तंत्र का मजबूत होना बहुत जरूरी है, क्योंकि आज की जहरीली हवा में बीमारियों से बचते हुए शुद्ध सांस शरीर को देना बहुत जरूरी है। ऐसे में रोजाना प्राणायाम करें और आहार में कच्ची हल्दी, तुलसी, और आंवला का सेवन करें।
चौथे नंबर पर है अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता। रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छे आहार और शारीरिक गतिविधियों पर आधारित होती है। इसके लिए शतावरी, गिलोय, अश्वगंधा, और आंवला जैसी चीजों को शामिल करें। पांचवा और आखिरी है मानसिक स्वास्थ्य। तनाव शरीर को बहुत प्रभावित करता है। भले ही आप कितना अच्छा आहार लें, लेकिन अगर तनाव से जूझ रहे हैं तो सब बेकार है। इसके लिए खुद को सकारात्मक रखने की कोशिश करें और अच्छी और गहरी नींद लें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाएं ये खास भोग, भूलकर भी न करें ये गलतियां
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र की पूजा का विशेष महत्व होता है. इसकी शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होती है और समापन महानवमी के दिन होता है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि कल यानी 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को समाप्त हो जाएगा. इस बार पूरे 9 दिन के नवरात्रि हैं जो बेहद शुभ माने जाते हैं. मान्यता है कि इस साल माता पालकी पर सवार होकर आएंगी और उनकी विदाई हाथी पर होगी. यह संकेत सुख-समृद्धि का माना जाता है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. हर दिन के लिए अलग-अलग भोग और पूजा सामग्री का महत्व होता है. सही विधि से भोग लगामे से घर में खुशहाली आती है और मां की कृपा प्राप्त होती है. चलिए यहां जानते हैं नवरात्रि के 9 दिनों के भोग लिस्ट के बारे में.
नवरात्रि के 9 दिनों का भोग
पहला दिन - मां शैलपुत्री
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है. इन्हें घी से बने पदार्थ अर्पित करना शुभ माना जाता है. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.
दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी
इस दिन मां को शक्कर का भोग लगाना चाहिए. इससे आयु और धन में वृद्धि होती है.
तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा
तीसरा दिन मां चंद्रघंटा का होता है. इस दिन मां को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें. इससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.
चौथा दिन - मां कूष्मांडा
मालपुआ या मीठा पकवान चढ़ाना शुभ होता है. इससे बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है.
पांचवां दिन - मां स्कंदमाता
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. इस दिन केला चढ़ाएं. इससे सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है.
छठा दिन - मां कात्यायनी
मां को शहद का भोग लगाएं. इससे विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं.
सातवां दिन - मां कालरात्रि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. इस दिन मां को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित करें. इससे भय और संकट खत्म होते हैं.
आठवां दिन - मां महागौरी
नारियल या नारियल से बनी मिठाई चढ़ाएं. इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
नौवां दिन - मां सिद्धिदात्री
वहीं नौवा दिन मां सिद्धिदात्री का होता है. इस दिन मां को हलवा-पूड़ी और खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इससे जीवन में सुख और सफलता मिलती है.
भोग लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान
नवरात्रि में भोग लगाते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा से पहले खुद को शुद्ध करें. गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है. अगर बाजार से कोई मिठाई या भोग लाएं तो उसे भी शुद्ध करें. भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में सभी में बांटना चाहिए. अंत में स्वयं भी ग्रहण करें. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
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