भारत-रूस की यूएन पर अहम बैठक, शांति स्थापना और यूएनएससी सुधार पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। भारत और रूस ने मंगलवार को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र पर 7वीं परामर्श बैठक की। इस बैठक में आतंकवाद-रोधी प्रयास, शांति स्थापना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय (एमईए) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर अलीमोव ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी-अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया। चर्चा का केंद्र यूएनएससी का एजेंडा था, जिसमें विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी, शांति स्थापना और यूएनएससी सुधार जैसे मुद्दे शामिल थे।
रूस पहले भी कई बार कह चुका है कि भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों को यूएनएससी में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए ताकि वैश्विक प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके।
पिछले महीने, सिबी जॉर्ज ने नई दिल्ली में अलेक्जेंडर अलीमोव से मुलाकात की थी, जब वे एआई इंपैक्ट समिट में भाग लेने भारत आए थे।
दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान बातचीत की। दोनों नेताओं ने यूएनएससी में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि यह वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अधिक प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और सक्षम बन सके।
रूस ने यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन को जल्द अंतिम रूप देने और उसे अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने आतंकवाद और उससे जुड़े प्रभाव का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों को लागू करने की भी बात कही।
संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ बिना किसी समझौते के सख्त लड़ाई की अपील की। उन्होंने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर हो तथा जिसमें कोई छिपा एजेंडा या दोहरे मानदंड न हों।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सोनम वांगचुक का रिहाई के बाद बड़ा बयान, जानें क्या बताया आंदोलन का असली मकसद
लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत से रिहा होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार की ओर से 'रचनात्मक और सार्थक बातचीत' का प्रस्ताव ही उनके आंदोलन का मूल उद्देश्य था.
उनकी रिहाई के बाद अब लद्दाख से जुड़े मुद्दों जैसे-शासन, पर्यावरण और विकास पर संवाद की संभावनाएं फिर से मजबूत होती दिख रही हैं.
'संवाद के लिए ही था संघर्ष'
मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि बातचीत शुरू कराने के लिए था. उन्होंने कहा कि सरकार का संवाद का प्रस्ताव एक सकारात्मक संकेत है और यही वह मांग थी, जिसे वे लंबे समय से उठाते आ रहे थे. उनके अनुसार, अब उम्मीद है कि समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकलेगा.
विरोध के तरीकों पर भी रखी बात
वांगचुक ने आंदोलन के दौरान अपनाए गए तरीकों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से भूख हड़ताल जैसे कदमों के पक्ष में नहीं थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दों को उठाना और समाधान की दिशा में बढ़ना रहा है.
जेल के अनुभव पर बोले वांगचुक, पूरी तरह एकांत में रखा गया
हिरासत के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में काफी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह एकांत में रखा गया था, जहां वे सिर्फ वर्दी पहने लोगों को ही देख पाते थे. इस अनुभव ने उनके संघर्ष को और मजबूत किया, लेकिन उन्होंने विश्वास नहीं खोया.
न्यायिक प्रक्रिया पर जताया भरोसा
वांगचुक ने अपनी कानूनी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्याय मिलने का भरोसा था. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान धीरे-धीरे सच्चाई सामने आती गई और इससे उनके पक्ष को मजबूती मिली. उनके अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई.
समर्थकों का जताया आभार
देशभर में मिले समर्थन के लिए सोनम वांगचुक ने लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग और एकजुटता के बिना यह संभव नहीं था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कई अन्य लोग भी हैं जो इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे हैं और उन्हें भी समान ध्यान और समर्थन मिलना चाहिए.
पत्नी गीतांजलि आंगमो की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे एंग्मो ने लोगों से भावनात्मक अपील की. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को जीत-हार के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाधान की दिशा में एक कदम के रूप में समझना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि सच्चाई और धैर्य का परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है.
अब आगे क्या रहेगी राह
वांगचुक की रिहाई के बाद अब सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच जल्द ही सार्थक बातचीत शुरू होगी. सोनम ने भी संकेत दिया कि अब समय आ गया है कि सभी पक्ष मिलकर बैठें और स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ें. कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम न केवल एक व्यक्ति की रिहाई का मामला है, बल्कि लद्दाख के भविष्य से जुड़े बड़े सवालों के समाधान की ओर एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें -सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द, सरकार ने NSA की धाराएं हटाईं
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















