गर्मियों की छुट्टी में लगेगा झटका: फ्लाइट टिकट की कीमतें छू सकती आसमान, कंपनियों ने दे दिए संकेत
High Air Fare this Summer: गर्मी की छुट्टियों में अगर आप फ्लाइट से यात्रा करने की सोच रहे हैं,तो जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। इस बार हवाई टिकट पहले से कहीं ज्यादा महंगे हो सकते हैं। वजह है-कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,ईरान युद्ध का असर और एयरस्पेस में लग रही पाबंदियां।
एविएशन सेक्टर इस वक्त दबाव में है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं,जो कुछ समय पहले 70-72 डॉलर के आसपास थीं। इसका सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर पड़ता है,जो एयरलाइंस के कुल खर्च का 30-40% तक होता है। ऐसे में कंपनियां अब यह बढ़ा हुआ खर्च सीधे यात्रियों से वसूलने लगी।
फ्यूल सरचार्ज लगा रहीं कंपनियां
भारतीय एयरलाइंस ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। इंडिगो ने 14 मार्च से फ्यूल चार्ज लागू कर दिया है। वहीं एयर इंडिया ने भी चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। घरेलू और सार्क रूट्स पर यह 399 रुपये से शुरू होकर लंबी दूरी की फ्लाइट्स के लिए 200 डॉलर तक जा सकता है। अकासा एयर ने भी 199 से 1300 रुपये तक का सरचार्ज लागू किया है।
एयरस्पेस पाबंदियों से भी बढ़ेगा किराया
मामला सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है। एयरस्पेस पाबंदियों ने भी एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर पा रहीं और पश्चिम एशिया में भी कई रूट्स प्रभावित हैं। इसका मतलब है कि अब फ्लाइट्स को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर मुंबई से लंदन की फ्लाइट, जो पहले कम समय लेती थी, अब करीब 10.5 घंटे तक पहुंच रही है। इससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और लागत भी।
इसका सीधा असर कनेक्टिविटी पर भी पड़ा है। भारत से यूरोप,अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका जाने वाले करीब 40% यात्री दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे हब के जरिए यात्रा करते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में इन रूट्स पर सीटों की कमी हो गई है, जिससे किराए और बढ़ गए हैं। खासकर मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे शहरों के लिए, जहां डायरेक्ट फ्लाइट नहीं है, यात्रियों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यूरोप जाना भी महंगा हो सकता
आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ईरान युद्ध गर्मियों तक जारी रहा, तो यूरोप की एयरलाइंस भी किराए बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यात्रियों का रुख सिंगापुर, हांगकांग या फ्रैंकफर्ट जैसे वैकल्पिक हब की ओर हो सकता है। वहीं कोलंबो और थाईलैंड जैसे डेस्टिनेशन की डिमांड बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, बढ़ते किरायों के बावजूद भारतीय एयरलाइंस को ज्यादा फायदा नहीं मिलने वाला। वजह यह है कि उनके पास लंबी दूरी की फ्लाइट्स के लिए सीमित संसाधन हैं और एयरस्पेस पाबंदियां भी ऑपरेशन को प्रभावित कर रही हैं। फिलहाल साफ है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और जियोपॉलिटिकल तनाव जारी रहता है, तो यात्रियों को इस गर्मी महंगी और थोड़ी मुश्किल यात्रा के लिए तैयार रहना होगा।
(प्रियंका कुमारी)
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