Rajasthan News: अलवर जिले में बनेगा नया रीको इंडस्ट्रियल एरिया, औद्योगिक विकास को मिलने वाली है रफ्तार
Rajasthan News: राजस्थान में अलवर जिले को एक और नया रीको औद्योगिक क्षेत्र तोहफे में दिया जा रहा है. हाल ही में जिला कलक्टर की ओर से रैणी के धोराला में नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए 24.63 हैक्टेयर जमीन आरक्षित किया गया है. इसके लिए रीको को डिमांड नोट भी जारी किया जा चुका है. हालांकि, रामगढ़ में 2 और बरखेड़ा में एक औद्योगिक क्षेत्र का मामला नेशनल कंजर्वेशन जोन में लंबे समय से अटका हुआ है.
दरअसल, सरिस्का बाघ परियोजना और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने की वजह से अलवर में इंडस्ट्रियल एरिया बनाने को मंजूरी के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. खासकर प्रदूषण फैलाने वाली इकाईयों को यहां लगाने की मंजूरी आसानी से नहीं मिल पाती है. यही वजह है कि यहां से नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने का कोई प्रस्ताव जाता है तो वह काफी समय तक अटक जाता है.
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पर्यावरण नियमों से गुजरना पड़ता है
अलवर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना आसान नहीं है. इसका बड़ा कारण सरिस्का बाघ परियोजना का नजदीक होना और क्षेत्र का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल होना है.
इन दोनों कारणों से यहां सख्त पर्यावरण नियम लागू होते हैं. खासतौर पर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को अनुमति मिलना मुश्किल होता है. हर प्रस्ताव को कई स्तरों पर जांच से गुजरना पड़ता है. यही कारण है कि कई योजनाएं लंबे समय तक फाइलों में अटकी रहती हैं.
2 नए औद्योगिक क्षेत्रों को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद अलवर जिले में पिछले कुछ दिनों में दो नए औद्योगिक क्षेत्रों को मंजूर किया गया है. कठूमर के रूंध सौकरी में 25 हैक्टेयर में इंडस्ट्रियल एरिया को मंजूरी दी गई है. यहां 4 भूखंडों का आवंटन हो चुका है, जबकि 17 को डिमांड नोट जारी हुए हैं. अब रैणी के धोराला में नए औद्योगिक क्षेत्र को मंजूरी मिली है, जिससे उद्योगों को भूखंड मिल सकेगा. हालांकि, इन इलाकों में प्रदूषणरहित उद्योगों की ही स्थापना की जाएगी.
कुछ परियोजनाएं अब भी अटकी
बता दें कि रामगढ़ के मूनपुर करमाला और रसगन व मालाखेड़ा के बरखेड़ा में भी औद्योगिक क्षेत्र का प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन इनका मामला लंबे समय से NCZ में अटके हुए हैं. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही यहां काम शुरू किया जाएगा.
MIA में जगह की कमी, भिवाड़ी में विकल्प
अलवर जिले की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां उद्योगपति उद्योग लगाना तो चाहते हैं, लेकिन एमआइए में कोई भूखंड ही खाली नहीं हैं. यही वजह है कि उद्योग विभाग को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान हुए MOU में भी कई उद्योग भूखंड नहीं होने के कारण से शुरू नहीं हुए हैं. वहीं, भिवाड़ी के रीको औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड खाली पड़े हैं.
11 साल पहले अलवर में बने थे औद्योगिक क्षेत्र
अलवर में इससे पहले साल 2015 में एमआईए साउथ ईस्ट जोन एक्सटेंशन के रूप में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था. इसके बाद से लंबे समय तक नए प्रोजेक्ट का इंतजार किया जा रहा था. बीच में सौंखरी में भी एक क्षेत्र को मंजूरी मिली थी, जिससे कुछ राहत मिली.
फिलहाल जिले में एमआईए, एमआईए एक्सटेंशन, एग्रो फूड पार्क, साउथ ईस्ट जोन और इसके एक्सटेंशन सहित कई औद्योगिक क्षेत्र संचालित हैं. खेरली, थानागाजी और पुराने औद्योगिक इलाकों को मिलाकर यहां करीब 1419 औद्योगिक इकाइयां काम कर रही हैं.
विकास की ओर बढ़ता अलवर
नए औद्योगिक क्षेत्रों की मंजूरी से अलवर में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. अगर लंबित परियोजनाओं को भी जल्द मंजूरी मिल जाती है, तो अलवर आने वाले समय में एक मजबूत औद्योगिक हब बन सकता है.
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वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत हुई, निर्यातकों के लिए 38 विकसित बाजारों के अवसर खुले : पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि बीते तीन वर्षों से अधिक समय में भारत का ग्लोबल ट्रेड फुटप्रिंट काफी मजबूत हुआ है और इससे निर्यातकों के लिए 38 विकसित देशों के बाजार खुले हैं।
वैश्विक तनावों के बीच भारत की ग्लोबल ट्रेड में मजबूत होती स्थिति पर गोयल ने कहा, भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक नए युग की शुरुआत हो रही है और इसमें नया अध्याय लिखा जा रहा है, जो विश्व में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि हाल में हुए वैश्विक घटनाक्रमों का देश के व्यापारिक आंकड़ों पर असर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने प्रभाव को नियंत्रित कर लिया गया है।
गोयल ने कहा कि भारत की निर्यात की कहानी को केवल वस्तु व्यापार की दृष्टि से देखना ठीक नहीं है। भारत का सर्विस निर्यात बीते तीन से चार वर्षों से लगातार बढ़ रहा है, जो कि वैश्विक व्यापार में उठापटक के बीच देश को स्थिरता प्रदान करता है।
गोयल ने आगे कहा कि भारत द्वारा अन्य देशों के साथ किए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से 38 विकसित देशों के बाजार निर्यातकों के लिए खुले हैं। इन देशों की प्रति व्यक्ति आय काफी अधिक है। ऐसे देश में निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी, क्योंकि यह देश लागत के मोर्चे पर भारत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
केंद्रीय के मुताबिक, जैसे ही यह एग्रीमेंट ऑपरेशनल हो जाएंगे, जिसमें यूके के साथ हुआ समझौता भी शामिल है, निर्यातकों के लिए कई अवसर खुलेंगे।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था का व्यापक आधार मजबूत बना हुआ है। इसकी पुष्टि रिकॉर्ड एफडीआई इनफ्लो, वैश्विक स्तर पर भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी मजबूत करने के लिए बढ़ने रुझान से होती है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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