ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर सहयोगियों के 'ढुलमुल रवैये' पर साधा निशाना
वाशिंगटन, 17 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली ऊर्जा और तेल की आपूर्ति पर निर्भर हैं, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि कई सहयोगी देश आगे आने से हिचक रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि इन देशों को सिर्फ अमेरिका का धन्यवाद ही नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी सहायता भी करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रणनीतिक समुद्री रास्ते पर काफी हद तक निर्भर हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों का नाम लिया। ट्रंप ने कहा कि चीन को भी अमेरिका का आभार जताना चाहिए। उनके मुताबिक जापान अपनी लगभग 95 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए, चीन करीब 91 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया भी अपने तेल और ऊर्जा का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते हासिल करता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि आज देशों को साथ लाना दो हफ्ते पहले की तुलना में ज्यादा आसान हो गया है। उनका इशारा इस ओर था कि कुछ देश तब आगे आने को तैयार हुए, जब अमेरिका पहले ही कड़ा सैन्य कदम उठा चुका था।
उन्होंने कहा कि कुछ देशों के रवैये से उन्हें काफी निराशा हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि एक-दो देशों ने बहुत अच्छा सहयोग किया है और समय आने पर वह बताएंगे कि वे कौन से देश हैं।
ट्रंप ने खास तौर पर ब्रिटेन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से बातचीत के दौरान नौसेना की मदद मांगी थी। ट्रंप के मुताबिक उन्होंने कहा था कि अगर ब्रिटेन कुछ युद्धपोत और समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने वाले जहाज भेज दे, तो यह काफी मददगार होगा।
उन्होंने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया को हिचकिचाहट भरा बताया। उनके अनुसार स्टार्मर ने कहा कि वह इस बारे में अपनी टीम से सलाह करना चाहेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा कि आप प्रधानमंत्री हैं, इसलिए फैसला आपको ही करना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि बाद में जब समर्थन की पेशकश की गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने कहा, अब मुझे उनकी जरूरत नहीं है। जीत हासिल करने के बाद मुझे उनकी जरूरत नहीं है; मुझे उनकी जरूरत काम शुरू करने से पहले थी। जब हम पहले ही जीत चुके हैं, तब मुझे आपके विमानवाहक जहाज़ों की कोई जरूरत नहीं है।
इस दौरान ट्रंप ने नाटो को लेकर अपनी पुरानी चिंता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत पड़ती है तो कई देश पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा, मैंने हमेशा कहा है, आप जानते हैं, नाटो के साथ दिक्कत यह है कि हम हमेशा उनके लिए मौजूद रहेंगे, लेकिन वे कभी हमारे लिए मौजूद नहीं रहेंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ देश ऐसे भी थे जो अमेरिका का साथ देने के लिए पूरी तरह तैयार थे और वे इसमें सक्रिय भूमिका निभाना चाहते थे।
ट्रंप ने क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं या नहीं, लेकिन इस आशंका से ही अरबों डॉलर के जहाज चलाने वाली कंपनियां डर जाती हैं।
--आईएएनएस
एएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
LPG Crisis: एलपीजी की कमी जल्द होगी पूरी, ‘शिवालिक’ जहाज के बाद आज ‘नंदा देवी’ पहुंचेगा भारत
ईरान सरकार की विशेष अनुमति से होर्मुज जलडमरूमध्य से हो कर एलपीजी से लदा भारतीय जहाज शिवालिक सोमवार शाम को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया. देश में एलपीजी की कमी को देखते हुए बंदरगाह पर शिवालिक के आगमन और उससे जुड़े सभी कागजी व अन्य प्रक्रियागत कार्रवाई पहले ही पूरी कर ली गई थी ताकि जितनी जल्दी हो एलपीजी को तेल रिफाइनरियों के डिपो तक पहुंचाया जा सके.
आज भारत पहुंचेगा नंदा देवी
कुछ ऐसा ही एक अन्य जहाज नंदा देवी के साथ भी होगा जो मंगलवार को भारतीय बंदरगाह पर पहुंचेगा. इसके अलावा यूएई से 81 हजार टन कच्चा तेल ले कर एक अन्य जहाज जग लाडली भी मंगलवार को पहुंचेगा.
ये जानकारी बंदरगाह, जहाजरानी व जलमार्ग मंत्रालय की तरफ से सोमवार को पश्चिम एशिया के हालात पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई है. इन तीनों जहाजों के आने से देश में तेल व गैस आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
देश में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता- पेट्रोलियम मंत्रालय
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि, “देश में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता है लेकिन पीएनजी, सीएनजी या पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन की कोई किल्लत नहीं है और ना ही देश के किसी हिस्से में कमी होने की कोई सूचना है. इस बीच सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से एलपीजी उत्पादन में 36 फीसद की वृद्धि भी हुई है.''
वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए एलपीजी वितरण की स्थिति काफी अस्थिर है. राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने स्तर पर वाणिज्यिक एलपीजी वितरण पर फैसला करें. ऐसा कुछ राज्यों ने शुरू भी कर दिया है जो स्थानीय जरूरत के हिसाब से होटलों या उद्योगों को कमर्शियल एलपीजी का आवंटन कर रहे हैं.
एलपीजी की कालाबाजारी सबसे बड़ी चिंता
सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता एलपीजी की कालाबाजारी व ब्लैक मार्केटिंग को रोकना है. इसके लिए रोजाना दो बार केंद्र सरकार के कुछ मंत्रालयों के अधिकारी, तेल कंपनियों के अधिकारियों व राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें हो रही हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के उक्त अधिकारी ने कहा कि कालाबाजारी को रोकने में राज्यों को ही बड़ी भूमिका निभानी है.
रविवार और सोमवार को असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में स्थानीय पुलिस व सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों की टीम ने गैरकानूनी तौर पर एलपीजी सिलेंडरों को जमा करने वालों पर कार्रवाई की है.
होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय जहाज
होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे 22 भारतीय जहाजों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. इस क्षेत्र में 24 भारतीय जहाज फंसे थे, जिनमें से दो को ईरान सुरक्षित निकलने का रास्ता दिया. भारत और ईरान के बीच अन्य जहाजों को लेकर वार्ता चल रही है.
होर्मुज से जहाजों सुरक्षित निकालने के लिए ईरान से समझौता नहीं- जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में इस बात का संकेत दिया है कि सभी भारतीय जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित निकालने का ईरान से कोई समझौता नहीं हुआ है बल्कि इस बारे में जो बात हुई है उसका कुछ फायदा हुआ है. अभी भी बातचीत जारी है.
ट्रंप के प्रस्ताव पर भारत का ठंडा रुख
भारत ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को लेकर बेहद ठंडा रुख दिखाया है जिसमें होर्मुज से जहाजों के आवागमन को सामान्य करने के लिए अन्य देशों से सैन्य मदद मांगी थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा है कि, “इस बारे में कुछ देशों के बीच बात हुई है लेकिन हमने किसी के साथ इसको लेकर द्विपक्षीय बातचीत नहीं की है.'' जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों ने पहले ही इस प्रस्ताव में शामिल होने को लेकर अपनी अरुचि दिखा दी है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















