बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद फरवरी में रिटेल एसआईपी निवेश में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड में रिटेल निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश लगभग 14.79 प्रतिशत बढ़ा है, जो फरवरी 2025 की तुलना में करीब 14.79 प्रतिशत ज्यादा है।
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में एसआईपी के जरिए निवेश बढ़कर 29,845 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह 25,999 करोड़ रुपए था। हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर जनवरी 2026 के 31,002 करोड़ रुपए की तुलना में इसमें 3.73 प्रतिशत की हल्की गिरावट देखी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि एसआईपी के जरिए नियमित निवेश करने वाले खातों की संख्या 9.44 करोड़ तक पहुंच गई है, जो एक साल पहले 8.26 करोड़ थी। वहीं कुल सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 10.45 करोड़ हो गई, जो पहले 10.17 करोड़ थी।
एसआईपी योजनाओं के तहत एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) लगभग 16.64 लाख करोड़ रुपए रही, जो म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एयूएम का करीब 20.29 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसमें हल्की गिरावट मार्केट में उतार-चढ़ाव (मार्क-टू-मार्केट करेक्शन) के कारण आई है, न कि निवेशकों की रुचि कम होने से।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रिटेल निवेशकों की म्यूचुअल फंड में दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, जो पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और व्यवहारिक बदलावों के कारण मजबूत हुई है।
कई उद्योग रिपोर्ट और नियामक आंकड़े बताते हैं कि म्यूचुअल फंड, खासकर इक्विटी-आधारित स्कीम्स और एसआईपी, लंबे समय के निवेश के लिए निवेशकों के पसंदीदा विकल्प बनते जा रहे हैं।
इससे पहले एएमएफआई के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में एसआईपी निवेश सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर लगभग 31,000 करोड़ रुपए हो गया था, जबकि जनवरी 2025 में यह 26,400 करोड़ रुपए था।
इसी बीच फरवरी में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कुल 94,530 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जिसमें इक्विटी फंड, डेट स्कीम और पैसिव प्रोडक्ट्स में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी देखने को मिली।
फरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एयूएम लगभग 82.03 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि महीने का औसत एयूएम करीब 83.43 लाख करोड़ रुपए रहा।
इक्विटी आधारित स्कीमों में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही, जहां फरवरी में 25,978 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया।
इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड में सबसे ज्यादा 6,924.65 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, इसके बाद मिड-कैप फंड में 4,003 करोड़ रुपए और स्मॉल-कैप फंड में 3,881 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Rajyasabha Elections Result 2026: बिहार तो एनडीए ने जीत लिया, ओडिशा और हरियाणा में क्या हाल?
राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने कई राज्यों में सियासी हलचल तेज कर दी है. जहां बिहार में एनडीए ने पूरी बाजी मार ली, वहीं ओडिशा में क्रॉस वोटिंग ने सत्ता समीकरण बदल दिए. दूसरी ओर हरियाणा में वोटों पर विवाद के कारण नतीजों में देरी देखने को मिली. तीनों राज्यों की स्थिति ने यह साफ कर दिया कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि रणनीति और अनुशासन की भी बड़ी परीक्षा है.
बिहार में एनडीए की क्लीन स्वीप जीत
बिहार में राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल कर ली. विपक्षी महागठबंधन के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ. मतदान के दौरान महागठबंधन के चार विधायक वोटिंग के लिए नहीं पहुंचे, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला. महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह धारी पर्याप्त वोट नहीं जुटा सके और हार गए.
एनडीए की ओर से नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश राम विजयी घोषित हुए. इस जीत ने बिहार की राजनीति में एनडीए की मजबूती को एक बार फिर साबित कर दिया.
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग से बदला खेल
ओडिशा में राज्यसभा चुनाव का सबसे बड़ा नाटकीय मोड़ देखने को मिला. यहां बीजेडी और कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट डाल दिया. बताया जा रहा है कि बीजेडी के आठ और कांग्रेस के तीन विधायकों ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया.
क्रॉस वोटिंग के चलते बीजेडी-कांग्रेस के साझा उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता की हार लगभग तय हो गई. कुल चार सीटों पर मतदान हुआ था, जिनमें से तीन सीटों पर बीजेपी की जीत की स्थिति बन गई.
क्रॉस वोटिंग करने वाले बीजेडी विधायकों में सौभिक बिस्वाल, देबीरंजन त्रिपाठी, सुबासिनी जेना, नब मल्लिक, चक्रमणि कंहर और रमाकांत भोई जैसे नाम सामने आए हैं. इसके अलावा पहले से निलंबित विधायक सनातन महाकुड़ और अरविंद महापात्र ने भी पार्टी लाइन के खिलाफ वोट दिया.
इस घटनाक्रम से बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि कई विधायकों ने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ मतदान किया.
हरियाणा में वोटों पर विवाद
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान कुल 88 विधायकों ने वोट डाला. हालांकि परिणाम आने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। तीन वोटों पर आपत्ति दर्ज होने के कारण वोटों की गिनती रोक दी गई.
बताया गया कि कांग्रेस के परमवीर सिंह और भरत बेनीवाल तथा बीजेपी के अनिल विज के वोट को लेकर विवाद हुआ है। इस मामले को चुनाव आयोग तक पहुंचा दिया गया है. जब तक आपत्तियों पर फैसला नहीं होता, तब तक नतीजों का इंतजार करना होगा.
चुनाव से निकला बड़ा संदेश
राज्यसभा चुनाव 2026 ने साफ कर दिया कि गठबंधन राजनीति में अनुशासन बनाए रखना आसान नहीं है. बिहार में जहां एनडीए का संगठन मजबूत दिखा, वहीं ओडिशा में क्रॉस वोटिंग ने बीजेडी और कांग्रेस को असहज स्थिति में ला दिया. हरियाणा में विवाद ने यह भी दिखाया कि हर वोट कितना अहम होता है. इन नतीजों के बाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.
यह भी पढ़ें - Bihar Rajyasabha Election 2026: एनडीए का क्लीन स्वीप, सभी 5 सीटों पर दर्ज की जीत
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation
















.jpg)



