EV Sales Down: फरवरी में क्यों घटी इलेक्ट्रिक कारों की वैश्विक बिक्री? जानें प्रमुख वजहें
EV Sales Down: दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की रफ्तार फरवरी 2026 में धीमी पड़ गई है। Benchmark Mineral Intelligence (BMI) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में वैश्विक ईवी रजिस्ट्रेशन में करीब 11% की गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे महीने आई इस कमी के बाद कुल बिक्री करीब 10 लाख से थोड़ा अधिक वाहनों तक सीमित रह गई, जो फरवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
चीन में सबसे ज्यादा असर
दुनिया के सबसे बड़े ईवी बाजार China में गिरावट सबसे ज्यादा देखी गई। यहां बैटरी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर करीब 32% की कमी आई और बिक्री 5 लाख से नीचे पहुंच गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे सरकार की ऑटो ट्रेड-इन योजना की फंडिंग खत्म होना, ईवी खरीद पर टैक्स छूट खत्म होना, घरेलू बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कीमतों की लड़ाई जैसे कई कारण हो सकते हैं। BMI के डेटा मैनेजर Charles Lester के मुताबिक, उपभोक्ता इस समय कीमत को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, इसलिए जैसे ही सरकारी प्रोत्साहन कम होते हैं, मांग पर तुरंत असर दिखाई देता है।
अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में भी गिरावट
संयुक्त राज्य अमेरिका सहित पूरे उत्तरी अमेरिका में भी ईवी की मांग कमजोर हुई है। फरवरी में यहां बिक्री करीब 35% गिरकर 90,000 से कम रह गई। इसकी प्रमुख वजहों में ईवी टैक्स क्रेडिट योजना का खत्म होना और Donald Trump प्रशासन द्वारा CO₂ उत्सर्जन मानकों में संभावित ढील देने के प्रस्ताव शामिल हैं। विश्लेषकों के अनुसार इन नीतिगत बदलावों के कारण कई कंपनियों को 70 अरब डॉलर से ज्यादा का मूल्यह्रास दर्ज करना पड़ा है।
यूरोप और उभरते बाजारों में उम्मीद
हालांकि Europe में फरवरी के दौरान ईवी बिक्री में 21% की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसकी रफ्तार पिछले साल की तुलना में धीमी मानी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि एशिया के अन्य बाजारों, ऑस्ट्रेलिया और कुछ यूरोपीय देशों में ईवी की मांग तेजी से बढ़ रही है। बाकी वैश्विक बाजारों में ईवी रजिस्ट्रेशन 78% बढ़कर 1.8 लाख से ज्यादा हो गए।
आगे क्या रहेगा रुझान?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में ईवी बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों- सरकारी सब्सिडी और नीतियां, बैटरी लागत और तकनीक में सुधार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार पर निर्भर करेगी। अगर सरकारें फिर से प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करती हैं और बैटरी की लागत कम होती है, तो वैश्विक ईवी बाजार की रफ्तार एक बार फिर तेज हो सकती है।
(मंजू कुमारी)
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