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विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान से 550 से ज्यादा भारतीयों को निकालने में मदद के लिए आर्मेनिया को दिया धन्यवाद

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर बेल्जियम के दौरे पर हैं। मिडिल ईस्ट में इस समय भारी तनाव चल रहा है। ताजा हालात में वहां के लोगों के जीवन को खतरा है। ऐसे में विदेश मंत्री ने सोमवार को ईरान से 550 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए आर्मेनियाई सरकार और वहां के लोगों को धन्यवाद दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, ईरान से अब तक 550 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए आर्मेनिया की सरकार और लोगों का धन्यवाद। इस मुश्किल समय में उनके समर्थन की तारीफ करता हूं।

बता दें कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई। देखते ही देखते यह पश्चिम एशिया तक पहुंच गया। मौजूदा हालात में भारत पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की कोशिशों में लगा हुआ है। इस बीच जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने रविवार को कहा कि ईरान से आर्मेनिया के रास्ते निकाले गए 70 भारतीय छात्रों का पहला बैच सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया है।

जेकेएसए के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने कहा, 70 से ज्यादा भारतीय छात्रों का पहला बैच, जिनमें से ज्यादातर जम्मू और कश्मीर से थे, और कई तीर्थयात्री भी थे, जो इस इलाके में चल रहे युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान में फंसे हुए थे, आज सुबह एक कमर्शियल विमान से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नई दिल्ली पर सुरक्षित पहुंच गए, जो लोगों को मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीयों को निकालने की प्रक्रिया का शुरुआती हिस्सा है।

उन्होंने आगे कहा, स्टूडेंट्स संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग में तय की गई लंबी और मुश्किल जमीनी और हवाई यात्रा के बाद आर्मेनिया और दुबई होते हुए एक कनेक्टिंग यात्रा के जरिए भारत लौटे।

विदेश मंत्रालय ने 12 मार्च को कहा था कि भारत ईरान में भारतीय नागरिकों को मदद देने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच शिपिंग की सुरक्षा और देश की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों को भी सुलझा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान में भारतीय नागरिकों को दी जा रही मदद पर जोर देते हुए कहा कि कई नागरिक घर लौट आए हैं, जबकि जो लोग जाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मदद जारी है। मंत्रालय ने ईरान छोड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों से तेहरान में भारतीय दूतावास द्वारा हाल ही में जारी की गई एडवाइजरी का पालन करने का आग्रह किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में हर हफ्ते होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “ईरान में हमारे लगभग 9,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें स्टूडेंट, नाविक, बिजनेसमैन, प्रोफेशनल और तीर्थयात्री शामिल हैं। पहले जारी की गई एडवाइजरी के बाद, कई भारतीय नागरिक, खासकर स्टूडेंट, पहले ही घर लौट चुके हैं। हमने हाल ही में तेहरान में रहने वाले कई भारतीय नागरिकों, जिनमें स्टूडेंट और तीर्थयात्री शामिल हैं, को देश के दूसरे सुरक्षित जगहों और शहरों में शिफ्ट किया है।”

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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VIDEO: वनडे क्रिकेट को लेकर क्या है सूर्यकुमार यादव की सोच जानिए

नई दिल्ली. भारत के विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा है कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, वनडे क्रिकेट उन्हें ज्यादा पसंद नहीं है, लेकिन टी20 उनकी ताकत है क्योंकि उसमें उनका हाथ सेट हो गया है. सूर्यकुमार ने पीटीआई के साथ एक खास पॉडकास्ट इंटरव्यू में मुंबई की हिंदी का इस्तेमाल किया, जैसे हाथ सेट हो गया है, जिसका अंग्रेजी में कोई सही अनुवाद नहीं है. मतलब ये है कि वह अब टी20 के माहिर खिलाड़ी बन चुके हैं और इस फॉर्मेट में उन्हें खेलना बहुत आसान लगता है. एक घंटे की बातचीत में सूर्यकुमार काफी रिलैक्स दिखे और भारत को विश्व कप में शानदार जीत दिलाने के बाद वह बहुत खुश थे. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट न खेलने की अपनी निराशा के बारे में खुलकर बात की. सूर्यकुमार ने अपनी मुस्कान के साथ याद दिलाया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला था जिसमें वह सिर्फ एक पारी खेल पाए थे. सूर्यकुमार ने कहा, जो आपकी किस्मत में लिखा होता है, वही मिलता है. मैंने भी लाल गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया था और 10-12 साल तक रणजी ट्रॉफी खेली. मुंबई में लाल गेंद से बहुत क्रिकेट खेली है, क्योंकि अगर आप मुंबई में पले बढ़े हैं तो आप लाल गेंद से ही शुरुआत करते हैं, इसलिए सब कुछ लाल गेंद के आसपास ही घूमता है. उन्होंने कहा, लेकिन धीरे-धीरे जब हमने सफेद गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया तो मेरा झुकाव उसकी तरफ हो गया. इसके बाद मैं टी20 में दिलचस्पी लेने लगा. मैंने वनडे में भी अच्छा खेलने की कोशिश की लेकिन कुछ खास नहीं कर पाया. भारतीय कप्तान ने कहा, टी20 क्रिकेट में जैसा चल रहा था, उसमें मेरा हाथ सेट हो गया है, ऐसा बोल सकते हैं. सूर्यकुमार से पूछा गया कि अगर मौका मिले तो क्या वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहेंगे? उन्होंने साफ जवाब दिया, मुझे बहुत खुशी होगी, क्योंकि जैसा मैंने बताया कि मैंने 2010-11 से 2020 तक लाल गेंद से काफी क्रिकेट खेली है. दस साल तक लाल गेंद से खेलना बहुत लंबा समय होता है. मुझे इस फॉर्मेट से बहुत लगाव था. अगर मौका मिले तो कौन टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना चाहेगा. लेकिन 35 साल की उम्र में सूर्यकुमार के लिए टेस्ट टीम में जगह बनाना लगभग नामुमकिन है. टेस्ट में उनका एकमात्र अनुभव 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया मैच था, जिसमें उन्होंने एक पारी में आठ रन बनाए थे. उसी साल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे विश्व कप के फाइनल में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 28 गेंदों में 18 रन बनाए. भारत फाइनल हार गया और सूर्यकुमार उसके बाद इस फॉर्मेट में कभी नहीं खेल पाए. सूर्यकुमार से पूछा गया कि जब टी20 कम समय में फैंस को ज्यादा रोमांच देता है और टेस्ट क्रिकेट उन्हें पारंपरिक संतुष्टि देता है, तो क्या वनडे का कोई भविष्य है? उन्होंने कूटनीतिक अंदाज में इस फॉर्मेट को पूरी तरह खारिज किए बिना उसका सम्मान दिया. वनडे में द्विपक्षीय सीरीज की संख्या लगातार घट रही है, जो इस फॉर्मेट के पतन का संकेत है और ऐसे ही चलता रहा तो वनडे क्रिकेट खत्म हो सकता है. सूर्यकुमार ने कहा, मुझे लगता है कि मैंने वनडे क्रिकेट को जितना करीब से देखा है, यह एक ऐसा फॉर्मेट है जहां आपको तीन अलग-अलग तरीके से बल्लेबाजी करनी पड़ती है. कभी-कभी अगर आप जल्दी बल्लेबाजी करने जाते हैं, अगर विकेट जल्दी गिरते हैं तो आपको टेस्ट क्रिकेट की तरह बल्लेबाजी करनी पड़ती है. उन्होंने कहा, फिर आपको वनडे की तरह अच्छे स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करनी होती है और पारी के आखिरी ओवरों में टी20 की तरह बल्लेबाजी करनी होती है. इसलिए यह एक ऐसा फॉर्मेट है जिसे मैं कभी समझ नहीं पाया. मैंने इसे खेलने की पूरी कोशिश की लेकिन यह चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट है. भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने एक बार आईसीसी को इसे पूरी तरह खत्म करने की सलाह दी थी. इंग्लैंड के केविन पीटरसन का मानना है कि टी20 क्रिकेट के लगातार बढ़ने से 50 ओवर का क्रिकेट सबसे ज्यादा खतरे में है. सूर्यकुमार ने वनडे विश्व कप 2023 के दौरान की गई तैयारी और माहौल को भी याद किया. उन्होंने कहा, जब मैं 2023 वनडे विश्व कप के लिए टीम के साथ था और उसमें खेला था, तब उस फॉर्मेट का माहौल, फाइनल से पहले की तैयारियां, वह सब 2026 और 2024 के टी20 विश्व कप में खेले गए मैचों से बिलकुल अलग था. उन्होंने कहा, इसलिए इसका आकर्षण अलग है. वनडे क्रिकेट का भी अपना अलग आकर्षण है, टी20 का तो और भी अलग Mon, 16 Mar 2026 19:24:38 +0530

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