केरल विधानसभा चुनाव 2026: क्या पिनाराई विजयन रचेंगे हैट्रिक का इतिहास? CPM ने 86 सीटों पर दांव लगाकर बढ़ाया सस्पेंस
नई दिल्ली : केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है और सत्ताधारी दल सीपीआई-एम (CPI-M) ने अपने पत्तों का खुलासा कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में पार्टी ने इस बार 86 सीटों पर चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला किया है, जबकि बाकी सीटें सहयोगियों के खाते में गई हैं।
क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर केरल की राजनीति में एक नया इतिहास दर्ज करेगा? इस सवाल ने पूरे राज्य में सस्पेंस पैदा कर दिया है, क्योंकि चुनावी समर में उतरे दिग्गजों की साख दांव पर लगी है।
धर्मदम से विजयन और पेरावूर से शैलजा: दिग्गजों की सीट पर टिकी निगाहें
केरल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट 'धर्मदम' एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, जहाँ से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन खुद मैदान में उतर रहे हैं। कन्नूर जिले की यह सीट सीपीआई-एम का अभेद्य किला मानी जाती है। वहीं, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा को इस बार 'पेरावूर' सीट से मैदान में उतारकर पार्टी ने बड़ा सस्पेंस पैदा कर दिया है।
पिछले चुनाव में शैलजा ने रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उनका मुकाबला केरल कांग्रेस प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ की सीट पर है। क्या ये दिग्गज अपने नए और पुराने गढ़ को बचा पाएंगे?
56 मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा: क्या काम करेगा 'प्रो-इन्कम्बेंसी' दांव?
सीपीआई-एम ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा जोखिम लेते हुए 56 मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट थमाया है। पार्टी के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन का कहना है कि यह चयन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और 'पोलित ब्यूरो' के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया है।
सस्पेंस इस बात पर है कि क्या जनता अपने पुराने प्रतिनिधियों पर दोबारा भरोसा जताएगी या विपक्ष की लहर इस 'प्रो-इन्कम्बेंसी' कार्ड को फेल कर देगी। पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनका हर कदम तीसरी बार सत्ता में वापसी के मिशन को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
9 अप्रैल को 'आर या पार' और 4 मई का सस्पेंस
केरल की सभी 140 सीटों पर मतदान की तारीख 9 अप्रैल 2026 तय की गई है। चुनाव आयोग के इस कार्यक्रम ने राजनीतिक दलों को तैयारी के लिए बहुत कम समय दिया है, जिससे प्रचार का रोमांच और बढ़ गया है। असम और पुडुचेरी के साथ ही केरल में भी एक ही चरण में मतदान होगा, जिसका परिणाम 4 मई को घोषित किया जाएगा।
क्या एलडीएफ अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखेगा या केरल की 'बारी-बारी से सत्ता बदलने' की पुरानी रवायत वापस लौटेगी? यह सस्पेंस मतगणना के दिन ही खत्म होगा।
एलडीएफ का इतिहास रचने का दावा: विपक्ष की चुनौतियों के बीच वामपंथ की परीक्षा
सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा है कि एलडीएफ तीसरी बार सत्ता पाकर इतिहास रचेगा। हालांकि, चुनावी मैदान में सक्रिय उम्मीदवारों के सामने विपक्षी गठबंधनों की कड़ी घेराबंदी है।
86 सीटों पर सीपीआई-एम का लड़ना और बाकी 54 सीटों पर सहयोगियों का तालमेल बिठाना वामपंथ के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। आने वाले दिनों में एलडीएफ का राज्यव्यापी जोरदार प्रचार अभियान इस चुनावी सस्पेंस को और भी गहरा कर देगा।
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: क्या फिर खिलेगा कमल या कांग्रेस करेगी वापसी? एक ही दिन में तय होगा 30 सीटों का भविष्य
नई दिल्ली : केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सत्ता की सबसे बड़ी जंग का आधिकारिक बिगुल बज गया है। चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस और सरगर्मी दोनों बढ़ गई हैं।
सबसे कम सीटों वाली इस विधानसभा में मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है क्योंकि यहा की सभी 30 सीटों पर महज एक ही चरण में मतदान संपन्न होगा। चुनाव आयोग के इस कार्यक्रम के साथ ही पुडुचेरी में चुनावी बिसात बिछ गई है और अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
एक ही दिन में 'आर या पार' का मुकाबला
पुडुचेरी की राजनीति में इस बार का सस्पेंस एक ही तारीख पर आकर ठहर गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, पुडुचेरी की सभी 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक साथ वोट डाले जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया को एक ही चरण में समेटकर सुरक्षा और व्यवस्था को कड़ा रखा जाएगा।
एन रंगासामी की अगुवाई वाली मौजूदा एनडीए सरकार के लिए जहा अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं विपक्ष के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई बन गई है।
क्या रंगासामी बचा पाएंगे अपना किला?
पुडुचेरी में वर्तमान में एन रंगासामी की ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन की सरकार है। पिछले चुनाव में इस गठबंधन ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करते हुए 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इस बार सस्पेंस इस बात पर है कि क्या रंगासामी और बीजेपी का यह समीकरण दोबारा काम करेगा या फिर कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन सत्ता की चाबी छीनने में सफल होगा। 15 जून को खत्म हो रहे कार्यकाल से पहले यह चुनाव तय करेगा कि पुडुचेरी की जनता को नया नेतृत्व मिलेगा या पुराना भरोसा कायम रहेगा।
चुनावी शेड्यूल: नामांकन से नतीजों तक का पूरा सफर
चुनाव आयोग ने नामांकन से लेकर मतगणना तक की पूरी समय-सारणी जारी कर दी है। 16 मार्च को राजपत्र अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 23 मार्च रखी गई है, जबकि 26 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
मतदान के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी, जिसका खुलासा 4 मई को होगा। यह पूरा शेड्यूल राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बनाने के लिए बहुत कम समय दे रहा है, जिससे मुकाबला और भी आक्रामक होने की उम्मीद है।
सत्ता का गणित: मुख्य गठबंधन और पुरानी हार का डर
पुडुचेरी की चुनावी फाइट मुख्य रूप से दो बड़े गुटों के बीच सिमटी हुई है। एक तरफ एनआर कांग्रेस की अगुवाई वाला एनडीए है, जिसमें बीजेपी और एआईएडीएमके शामिल हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस का गठबंधन है, जिसे डीएमके और लेफ्ट पार्टियों का साथ मिला है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं जैसे एवी सुब्रमण्यम और डीएमके के एसपी शिवकुमार को हार का स्वाद चखना पड़ा था।
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