कनाडा में उज्जैन के छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा की मौत, परिजनों ने हत्या का आरोप लगाकर मांगा न्याय
भोपाल/उज्जैन, 15 मार्च (आईएएनएस)। उज्जैन के रहने वाले गुरकीरत सिंह मनोचा की ब्रिटिश कोलंबिया के फोर्ट सेंट जॉन में एक दुखद घटना में मौत हो गई। परिवार का दावा है कि उनकी हत्या किसी विवाद के चलते की गई। 14 मार्च को हुई एक कहासुनी के दौरान हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला किया था। परिवार और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरकीरत, जो पार्श्वनाथ कॉलोनी, देवास रोड, उज्जैन के गुरजीत सिंह मनोचा के पुत्र हैं, लगभग ढाई साल पहले कनाडा चले गए थे। वह नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट पोस्ट-डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम में नामांकित थे।
परिवार ने बताया कि घटना शनिवार (14 मार्च) को हुई, जब विवाद के दौरान हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला किया। पिता गुरजीत सिंह ने कहा कि कनाडाई पुलिस ने मामले की पूरी जांच शुरू कर दी है। सटीक परिस्थितियां और मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
परिवार ने जोर देकर कहा कि विवाद की जड़ अभी तक सामने नहीं आई है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा।
इस घटना ने उज्जैन में परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय समुदाय में गहरा शोक पैदा कर दिया है, जहां गुरकीरत को जाना-पहचाना और प्यारा माना जाता था।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को कभी-कभी हिंसा या विवाद जैसी असुरक्षाओं का सामना करना पड़ सकता है।
परिवार कनाडाई पुलिस की चल रही जांच से न्याय और सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।
मध्य प्रदेश के अधिकारी भी इस मामले पर ध्यान दे रहे हैं, और मुख्यमंत्री ने इस कठिन समय में परिवार का समर्थन किया है। विदेश में बेहतर अवसरों की तलाश में गए इस युवा के निधन से परिचित लोग स्तब्ध हैं।
गुरकीरत की बिजनेस मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा की इच्छा उनके उज्जवल भविष्य की आकांक्षाओं को दर्शाती थी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, परिवार उम्मीद कर रहा है कि जवाबदेह लोगों को न्याय के सामने लाया जाएगा।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बिहार में भीख को लेकर नीतीश सरकार का बड़ा कदम, शुरू किया भिक्षावृत्ति निवारण अभियान; होने लगे सर्वे
Bihar News: क्या आप जानते हैं कि बिहार में एक ऐसी योजना है जो कि भीख मांगने में संलिप्त व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से शुरू की गई है. जी हां, हम बात कर रहे हैं भिक्षावृत्ति निवारण अभियान की जो कि बिहार सरकार की ओर से चलाया जा रहा है. प्रदेश सरकार ने इसके तहत अपने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से राज्य में ‘मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना’ और ‘SMILE Scheme’ का शुभारंभ किया है.
38 जिलों में हुई अभियान की शुरुआत
राज्य के सभी 38 जिलों में शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को भिक्षुक सर्वेक्षण अभियान की शुरुआत हुई. इस अभियान का उद्घाटन समाज कल्याण विभाग की सचिव और ‘सक्षम’ की कार्यकारिणी समिति की अध्यक्ष बंदना प्रेयषी ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया. इस अवसर पर ‘सक्षम’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी योगेश कुमार सागर भी मौजूद रहे.
सर्वेक्षण कैसे होगा
इस अभियान के तहत राज्य के सभी सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर भिक्षुकों की पहचान की जाएगी. इसमें पुरुष, महिला, बच्चे और ट्रांसजेंडर सभी शामिल हैं.
राजन कुमार को किया नियुक्त
बांका जिले में इस सर्वेक्षण कार्य को तेज करने के लिए राजन कुमार को सर्वेयर के रूप में नियुक्त किया गया है. वह इलाके में जाकर भिक्षुकों की जानकारी पहले हार्ड कॉपी फॉर्म में अंकित करेंगे और बाद में उसे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करेंगे. इस पूरी प्रक्रिया में मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है ताकि डेटा सटीक और भरोसेमंद हो.
अभियान का उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं है. सरकार चाहती है कि भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोग विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े और उनका पुनर्वास किया जा सके. सर्वेक्षण के बाद इन लोगों को उचित देखरेख, शिक्षा और कौशल विकास के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा. इसका लक्ष्य है कि वे आत्मनिर्भर बनें और समाज की मुख्यधारा में वापस आ सकें.
कब तक चलेगा सर्वेक्षण
राज्य में यह सर्वेक्षण 30 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अभियान के दौरान आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800-345-6262 पर दें. इससे सरकार को इस सामाजिक समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी और एक मजबूत, सशक्त बिहार बनाने की दिशा में कदम उठाया जा सकेगा.
यह भी पढ़ें: पटना में ‘रन फॉर नशामुक्त बिहार’ की गूंज, 10 हजार लोगों ने लगाई दौड़; विदेशी धावकों का भी दिखा दम
क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण
भिक्षावृत्ति सिर्फ सामाजिक और आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोग अक्सर शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हैं. इस अभियान के माध्यम से सरकार उन्हें नई जिंदगी देने का प्रयास कर रही है. मोबाइल ऐप और ऑनलाइन डेटा संग्रह की मदद से अभियान की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है.
यह भी पढ़ें: स्पोर्ट्स स्टार एसेस अवार्ड्स 2026: बिहार को मिला बेस्ट स्टेट प्रमोटिंग स्पोर्ट्स का प्रतिष्ठित पुरस्कार
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण और पुनर्वास कार्यक्रम से भिक्षावृत्ति की समस्या कम हो सकती है और लोग आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं.
मिलेगा सम्मानजनक जीवन
बिहार सरकार की यह पहल न सिर्फ भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाएगी, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों को जीवन की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करेगी. यह राज्य को एक अधिक समावेशी और सशक्त समाज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
यह भी पढ़ें: Bihar News: नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा का समापन, बेगूसराय को 330 करोड़ की सौगात; 402 योजनाओं की शुरुआत
यह भी पढ़ें: Bihar News: खगड़िया को 304 करोड़ का बड़ा तोहफा देंगे सीएम नीतीश, आज करेंगे सैकड़ों योजनाओं का उद्घाटन
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation


















